बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 3 अगस्त 2026। उद्योग व्यापार मंडल, चंडीगढ़ ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा तिब्बत मार्केट को सार्वजनिक भूमि पर दुकानें लगाने की अनुमति तथा ग्राउंड रेंट में विशेष रियायत दिए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे शहर के स्थानीय व्यापारियों के हितों के विपरीत बताया है।
उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष कैलाश चंद जैन एवं महासचिव नरेश कुमार जैन ने कहा कि यह किसी समुदाय विशेष का विरोध नहीं है, बल्कि चंडीगढ़ के हजारों स्थायी व्यापारियों के अधिकारों, आजीविका और समान अवसर की रक्षा का विषय है।
यूवीएम अध्यक्ष कैलाश चंद जैन ने कहा कि चंडीगढ़ के स्थानीय व्यापारी पूरे वर्ष अपने व्यवसाय को चलाने के लिए भारी आर्थिक बोझ उठाते हैं। वे नियमित रूप से जी.एस.टी., आयकर, नगर निगम शुल्क, बिजली-पानी के बिल, किराया, कर्मचारियों के वेतन तथा अन्य सभी सरकारी दायित्वों का निर्वहन करते हैं। पूरे वर्ष वे त्योहारों एवं सर्दियों के व्यापारिक सीजन का इंतजार करते हैं, ताकि उसी अवधि में होने वाली बिक्री से पूरे वर्ष के खर्चों की भरपाई कर सकें।
उन्होंने कहा कि जैसे ही व्यापार का प्रमुख सीजन आता है, अस्थायी तिब्बत मार्केट शुरू हो जाती है और ग्राहकों का एक बड़ा हिस्सा उसकी ओर आकर्षित हो जाता है। परिणामस्वरूप स्थानीय दुकानदारों की वर्षों की मेहनत, निवेश और पूरे वर्ष की व्यापारिक योजना प्रभावित होती है। स्थानीय व्यापारी स्वयं को उपेक्षित एवं ठगा हुआ महसूस करते हैं।
जैन ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यदि तिब्बत मार्केट को सार्वजनिक भूमि पर दुकानें लगाने तथा विशेष ग्राउंड रेंट रियायत की अनुमति दी जा सकती है, तो क्या यही सुविधा चंडीगढ़ के किसी भी मार्केट एसोसिएशन, व्यापारी संगठन अथवा व्यक्तिगत नागरिक को समान शर्तों पर उपलब्ध कराई जाएगी? यदि नहीं, तो केवल एक वर्ग को यह विशेष सुविधा किस नियम, नीति अथवा वैधानिक प्रावधान के अंतर्गत प्रदान की जा रही है? प्रशासन को इस संबंध में स्पष्ट एवं सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखना चाहिए।
उद्योग व्यापार मंडल का मानना है कि प्रशासन की प्रत्येक नीति समानता, पारदर्शिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। किसी एक वर्ग को विशेष रियायत देकर स्थानीय व्यापारियों के साथ असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति उत्पन्न करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।
मंडल ने राज्यपाल एवं प्रशासक, चंडीगढ़ से मांग की है कि तिब्बत मार्केट लगाए जाने तथा ग्राउंड रेंट में दी गई विशेष रियायत के निर्णय की तत्काल समीक्षा की जाए। साथ ही सार्वजनिक भूमि पर अस्थायी व्यापार की अनुमति के लिए ऐसी समान, पारदर्शी एवं भेदभाव-रहित नीति बनाई जाए, जो सभी नागरिकों, व्यापारी संगठनों एवं पात्र आवेदकों पर समान रूप से लागू हो।
मंडल ने कहा कि चंडीगढ़ के स्थानीय व्यापारियों के हितों की रक्षा करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। स्थानीय व्यापारी ही वर्षभर करों का भुगतान कर शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, रोजगार उपलब्ध कराते हैं तथा सरकारी राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसलिए ऐसी किसी भी नीति से बचा जाना चाहिए जिससे उनके वैध व्यापारिक हितों को अनावश्यक क्षति पहुँचे।













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