April 5, 2026 7:48 pm

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HARYANA: HERC सरकार के इशारों पर काम कर रहा, उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी : प्रो. संपत सिंह

फिक्स्ड चार्ज, फ्यूल सरचार्ज खत्म करने और किसानों के 2 लाख लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन मंजूर करने की मांग

चंडीगढ़, 9 जनवरी: पूर्व मंत्री एवं इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (एचईआरसी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह आयोग उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के बजाय सरकार के निर्देशों पर काम कर रहा है। शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि एचईआरसी के सदस्यों का व्यवहार बेहद खराब है और ऐसा प्रतीत होता है कि वे एक स्वतंत्र नियामक संस्था के सदस्य नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारी हों।
प्रो. संपत सिंह ने कहा कि एचईआरसी का गठन पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए किया गया था, लेकिन वर्तमान में आयोग सरकार, यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन जैसी बिजली वितरण कंपनियों के पक्ष में खड़ा नजर आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग डिस्कॉम द्वारा की जा रही मनमानी और गैर-तार्किक टैरिफ वृद्धि को रोकने में पूरी तरह विफल रहा है। वितरण हानि, लाइन लॉस और बिजली चोरी पर नियंत्रण न होने का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19, 2020-21 और 2023-24 में राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से एचईआरसी के बिना सब्सिडी निर्देशों के कुछ उपभोक्ता वर्गों को टैरिफ रियायतें दीं, जिससे अन्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। जबकि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 65 के तहत सरकार द्वारा घोषित किसी भी सब्सिडी का भुगतान अग्रिम रूप से किया जाना अनिवार्य है, जिसे लागू कराने में आयोग विफल रहा।
प्रो. संपत सिंह ने एग्रीगेट रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) दाखिल करने की प्रक्रिया में गंभीर खामियों को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि एआरआर फाइलिंग में किसी भी टैरिफ प्रस्ताव का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, सार्वजनिक नोटिस भ्रामक हैं और उपभोक्ता प्रभावों को छिपाया गया है। इसके अलावा पिछले एक दशक से वोल्टेज-वार और उपभोक्ता-श्रेणी-वार कॉस्ट ऑफ सर्विस अध्ययन को लेकर एचईआरसी और एपटेल के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर डिस्कॉम वित्त वर्ष 2026-27 में 1,605 करोड़ रुपये के राजस्व सरप्लस का अनुमान दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 4,484.85 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे की मांग कर रहे हैं, जो पूरी तरह विरोधाभासी है।
प्रो. संपत सिंह ने बताया कि एचईआरसी द्वारा अनुमोदित औसत पावर लागत 3.12 रुपये प्रति यूनिट है, इसके बावजूद फरीदाबाद गैस पावर प्लांट से 85 से 153 रुपये प्रति यूनिट तक की महंगी बिजली खरीदी जा रही है और उपभोक्ताओं को 7.29 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेची जा रही है। उन्होंने कहा कि खराब बुनियादी ढांचा, अनुशासनहीनता और सुधारों की कमी के चलते बिजली उपक्रम घाटे में जा रहे हैं, जबकि 22 लाख डिफॉल्टर्स से करीब 8,000 करोड़ रुपये की वसूली अब तक लंबित है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जून 2024 तक समाप्त होने वाला 47 पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त फ्यूल एंड पावर कॉस्ट चार्ज अब भी उपभोक्ताओं से वसूला जा रहा है, जिससे छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं को करीब 50 प्रतिशत तक अधिक बिल चुकाना पड़ रहा है। वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता भी फिक्स्ड और एनर्जी चार्ज में भारी बढ़ोतरी से परेशान हैं।
प्रो. संपत सिंह ने मांग की कि फिक्स्ड चार्ज, बढ़े हुए एनर्जी चार्ज, फ्यूल सरचार्ज, फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट और क्रॉस-सब्सिडाइजेशन को तुरंत समाप्त किया जाए। साथ ही एचईआरसी किसानों के 2 लाख लंबित ट्यूबवेल कनेक्शनों को मंजूरी देने के लिए डिस्कॉम को आदेश दे और 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करे।
उन्होंने यह भी मांग की कि एचईआरसी प्रदर्शन मानकों को सख्ती से लागू करे और इस बात की जांच करे कि डीएचबीवीएन और यूएचबीवीएन वर्ष 2020-21 में 800 करोड़ रुपये के लाभ से 2023-24 में 4,484 करोड़ रुपये के घाटे तक कैसे पहुंच गए। इस घाटे का बोझ उपभोक्ताओं पर न डाले जाने के स्पष्ट निर्देश दिए जाएं।

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Author: BabuGiri Hindi

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