August 27, 2026 6:04 am

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चंडीगढ़ नगर निगम के फैसले पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई का पत्र! 2025 में भेजा गया पत्र सदन के सामने क्यों नहीं रखा गया?

गुरप्रीत सिंह गबी ने उठाए गंभीर सवाल, नगर निगम हाउस से पत्र छिपाए जाने का लगाया आरोप
बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 20 अगस्त। चंडीगढ़ नगर निगम से जुड़े एक अहम मामले में प्रशासन के स्थानीय निकाय एवं शहरी विकास विभाग की ओर से वर्ष 2025 में नगर निगम आयुक्त को भेजे गए एक पत्र को लेकर अब सवाल खड़े हो गए हैं। सामने आए दस्तावेज के अनुसार, प्रशासन ने कानून विभाग की राय के आधार पर नगर निगम के एक फैसले को नियमों के विरुद्ध बताते हुए उसे रद्द करने के लिए सरकार की क्षमता का उल्लेख किया था। आरोप है कि यह महत्वपूर्ण पत्र नगर निगम को भेजे जाने के बावजूद इसे निगम सदन के समक्ष नहीं रखा गया।
नगर निगम से जुड़े मामले को लेकर गुरप्रीत सिंह गबी ने सवाल उठाते हुए कहा है कि जब प्रशासन की ओर से नगर निगम को स्पष्ट पत्र भेजा गया था तो इसे हाउस के संज्ञान में क्यों नहीं लाया गया। उन्होंने पूरे मामले में पत्र को कथित तौर पर सदन से छिपाए जाने की जांच की मांग की है।


प्रशासन ने कानून विभाग से मांगी थी राय
सामने आए पत्र में चंडीगढ़ प्रशासन के लोकल गवर्नमेंट एंड अर्बन डेवलपमेंट ब्रांच ने नगर निगम आयुक्त को संबोधित करते हुए दो विषयों का उल्लेख किया है। इनमें नगर निगम की 336वीं जनरल हाउस बैठक, 9 जुलाई 2024 के मिनट्स तथा “Newspaper-clip titled as ‘MC House approves free 20 litre water, parking’s published in the Chandigarh Tribune on 12.3.2024’” से संबंधित मामला शामिल है।
पत्र में नगर निगम के पूर्व मेमो का भी संदर्भ दिया गया है। प्रशासन ने बताया कि मामले को कानून विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन के पास राय के लिए भेजा गया था।

कानून विभाग की राय का भी पत्र में उल्लेख
पत्र में कहा गया है कि कानून विभाग की राय के अनुसार नगर निगम, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ द्वारा 333वीं बैठक में लिए गए निर्णय और 336वीं बैठक में पहले लिए गए निर्णय को दोहराया जाना उप-नियमों (Bye-laws) के खिलाफ है।
इसके साथ ही पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सरकार नगर निगम के इस निर्णय को रद्द करने के लिए सक्षम है। इसमें यह भी कहा गया है कि तत्काल आदेश जारी करना आवश्यक समझे जाने की स्थिति में नगर निगम अधिनियम की धारा 423 के तहत शो-कॉज नोटिस की प्रक्रिया से छूट देते हुए निर्णय को रद्द किया जा सकता है।

सबसे बड़ा सवाल—हाउस को क्यों नहीं बताया गया?
गुरप्रीत सिंह गबी का कहना है कि यदि प्रशासन का यह पत्र वर्ष 2025 में नगर निगम को प्राप्त हो चुका था, तो इसकी जानकारी नगर निगम सदन के पार्षदों को दी जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि इतना महत्वपूर्ण प्रशासनिक पत्र हाउस के सामने नहीं लाया गया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि:
प्रशासन का पत्र नगर निगम को कब प्राप्त हुआ?
पत्र मिलने के बाद इसे किस अधिकारी ने देखा?
क्या इसे सदन की बैठक के एजेंडे में शामिल किया गया?
यदि नहीं किया गया तो इसका कारण क्या था?
कानून विभाग की राय और प्रशासन के आदेश से पार्षदों को अवगत क्यों नहीं कराया गया?
क्या पत्र को जानबूझकर सदन के संज्ञान से बाहर रखा गया?
गबी ने मांग की है कि पूरे मामले की रिकॉर्ड के आधार पर जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि प्रशासन के पत्र को नगर निगम हाउस के समक्ष क्यों नहीं रखा गया।

दस्तावेज की प्रामाणिकता और रिकॉर्ड की जांच जरूरी
हालांकि सामने आए दस्तावेज में प्रशासन और कानून विभाग की राय से संबंधित बातें दर्ज हैं, लेकिन पत्र को सदन के समक्ष न रखे जाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नगर निगम की बैठक के रिकॉर्ड, एजेंडा और कार्यवाही विवरण से की जानी बाकी है। ऐसे में मामले में प्रशासन और नगर निगम से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
गबी ने कहा कि यदि सरकार ने नगर निगम के फैसले को उप-नियमों के विपरीत माना था, तो इस संबंध में भेजा गया पत्र हाउस के सदस्यों से छिपाए जाने के बजाय सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए था।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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