हिसार बार एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश का किया भव्य अभिनंदन
चंडीगढ़/हिसार, 9 जनवरी। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि बदलते अपराध स्वरूप और वैश्विक स्तर पर उभरती नई चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिवक्ताओं—विशेषकर युवा वकीलों—को निरंतर स्वयं को अपडेट रखना होगा। उन्होंने जोर दिया कि ई-लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधनों और आधुनिक तकनीक से लैस होने पर न केवल अधिवक्ताओं की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि न्याय वितरण प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनेगी।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत शुक्रवार को स्थानीय न्यायिक परिसर में हिसार बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने आधुनिक तकनीक का विश्व में सर्वाधिक उपयोग किया है और कोविड-19 महामारी के दौरान वर्चुअल कोर्ट व डिजिटल माध्यमों से न्याय प्रक्रिया को निर्बाध जारी रखकर वैश्विक मिसाल कायम की।
अपने करियर की शुरुआत को याद करते हुए सीजेआई ने कहा कि हिसार बार एसोसिएशन से उनका संबंध केवल पेशेवर नहीं, बल्कि पारिवारिक और भावनात्मक भी है। उन्होंने 1984 में हिसार बार के सदस्य के रूप में वकालत की शुरुआत की और बाद में पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में प्रैक्टिस की, लेकिन हिसार बार से उनका जुड़ाव सदैव बना रहा। उन्होंने कहा कि हिसार बार का इतिहास गौरवशाली है और इसके सदस्यों ने देश के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्र सेवा में अमूल्य योगदान दिया है।

सीजेआई ने कहा कि आज अपराधों का ग्राफ और प्रकृति तेजी से बदल रही है। साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्रॉड और तकनीक आधारित अपराधों में निरंतर वृद्धि हो रही है। ऐसे मामलों में प्रभावी पैरवी के लिए वकीलों को तकनीक की समझ और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि आमजन को समयबद्ध न्याय दिलाने में अधिवक्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और संसाधनों के विकास के साथ न्याय में देरी कम करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था के मजबूत होने से विदेशी निवेश बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप वाणिज्यिक विवाद और कॉरपोरेट वादों में वृद्धि हुई है। बदलते विवाद स्वरूप के अनुरूप वकीलों को अपनी रणनीतियों में बदलाव कर आधुनिक न्यायिक आवश्यकताओं के अनुसार स्वयं को ढालना होगा।
इस अवसर पर हिसार बार एसोसिएशन के प्रधान

संदीप बूरा ने मुख्य न्यायाधीश सहित सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और सीजेआई को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। बार एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य पी.के. संधीर ने 1984 में न्यायमूर्ति सूर्यकांत के साथ कार्य करने के अनुभव साझा करते हुए इसे हिसार बार के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणादायक क्षण बताया।
समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश की धर्मपत्नी सविता वशिष्ठ, पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस शील नागू, न्यायमूर्ति अलका सरीन, न्यायमूर्ति एच.एस. सेठी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अलका मलिक, उपायुक्त महेंद्र पाल, पुलिस अधीक्षक शशांक कुमार सावन, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील जिंदल, एसडीएम ज्योति मित्तल सहित वरिष्ठ न्यायिक, प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी तथा बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।











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