August 27, 2026 5:34 am

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हरियाणा के पांच पुलिस कमिश्नरेट में शक्तियों का असमान बंटवारा, उठे कानूनी सवाल

गुरुग्राम-फरीदाबाद में धारा 163 BNSS की मजिस्ट्रियल शक्ति डीसी के पास, पंचकूला-सोनीपत-झज्जर में पुलिस कमिश्नर कर रहे जिलाधीश की शक्तियों का प्रयोग
बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़, 22 अगस्त। हरियाणा में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी और प्रशासनिक सवाल सामने आया है। प्रदेश के पांच पुलिस कमिश्नरेट—गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत और झज्जर—में पुलिस आयुक्तों को प्राप्त शक्तियों में समानता नहीं होने का मुद्दा उठाया गया है। विशेष रूप से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163, जो पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 का स्थान ले चुकी है, के तहत प्राप्त मजिस्ट्रियल शक्तियों को लेकर यह अंतर चर्चा में आया है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार के अनुसार, पंचकूला, सोनीपत और झज्जर में पुलिस कमिश्नरों को धारा 163 BNSS के तहत जिलाधीश की शक्तियां प्रदान की गई हैं। इसके विपरीत गुरुग्राम और फरीदाबाद के पुलिस आयुक्तों को ऐसी शक्तियां प्राप्त नहीं हैं। इन दोनों जिलों में धारा 163 के तहत आदेश जारी करने की शक्ति उपायुक्त-सह-जिलाधीश अथवा संबंधित एसडीएम के पास बनी हुई है।

एक ही राज्य में अलग-अलग व्यवस्था क्यों?
हेमंत कुमार ने सवाल उठाया कि यदि पंचकूला, सोनीपत और झज्जर में पुलिस कमिश्नर को जिलाधीश की शक्तियां दी जा सकती हैं तथा उनके अधीन डीसीपी/एसीपी को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान की जा सकती हैं, तो गुरुग्राम और फरीदाबाद में इसी प्रकार की व्यवस्था लागू करने में क्या कानूनी अथवा प्रशासनिक बाधा है।
उनके मुताबिक, धारा 163 BNSS के तहत सार्वजनिक उपद्रव, आशंकित खतरे अथवा आपात परिस्थितियों में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने की शक्ति सामान्य तौर पर जिलाधीश, उपमंडल मजिस्ट्रेट अथवा राज्य सरकार द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट को प्राप्त होती है।
गुरुग्राम और फरीदाबाद में डीसी के पास शक्ति
वर्तमान व्यवस्था में पंचकूला, सोनीपत और झज्जर को छोड़कर प्रदेश के अन्य जिलों में धारा 163 BNSS के तहत आदेश संबंधित जिले के उपायुक्त-सह-जिलाधीश अथवा एसडीएम द्वारा जारी किए जा सकते हैं। इनमें गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे पुलिस कमिश्नरेट वाले जिले भी शामिल हैं।
हेमंत कुमार का कहना है कि इससे एक असामान्य स्थिति पैदा होती है। एक तरफ पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में होती है, वहीं धारा 163 से संबंधित मजिस्ट्रियल शक्ति जिला प्रशासन के पास रहती है। दूसरी ओर प्रदेश के तीन अन्य पुलिस कमिश्नरेट में यही शक्ति पुलिस आयुक्त को प्रदान की गई है।

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के पास कमिश्नरेट की कमान
पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था में सामान्यतः जिला पुलिस अधीक्षक के स्थान पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को पुलिस आयुक्त नियुक्त किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गुरुग्राम में 1999 बैच के आईपीएस सिबास कबिराज एडीजीपी रैंक में पुलिस आयुक्त हैं, जबकि फरीदाबाद में 2004 बैच के आईपीएस सतेन्द्र कुमार गुप्ता आईजी रैंक में पुलिस आयुक्त हैं।
पंचकूला में भी एडीजीपी रैंक के सिबास कबिराज के पास पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त कार्यभार है। सोनीपत में 1996 बैच की आईपीएस अधिकारी एडीजीपी ममता सिंह पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रही हैं। झज्जर में डॉ. राजश्री सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद नियमित पुलिस आयुक्त की नियुक्ति लंबित बताई जा रही है और रोहतक रेंज के आईजी सिमरदीप सिंह झज्जर पुलिस कमिश्नर का कार्यभार देख रहे हैं।

सरकार के सामने दो विकल्प
हेमंत कुमार ने हरियाणा सरकार के समक्ष दो विकल्प रखे हैं। उनका कहना है कि या तो पंचकूला, सोनीपत और झज्जर की तरह गुरुग्राम व फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नरों को भी धारा 163 BNSS के तहत जिलाधीश की शक्तियां प्रदान की जाएं, अथवा यदि सरकार ऐसा नहीं करना चाहती तो पंचकूला, सोनीपत और झज्जर के पुलिस कमिश्नरों से भी यह शक्ति वापस लेकर संबंधित उपायुक्तों को दी जाए।
उन्होंने हरियाणा पुलिस कानून, 2007 की धारा 8 का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था की मूल अवधारणा में जिलाधीश की शक्तियों का प्रयोग पुलिस आयुक्त द्वारा किए जाने की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। ऐसे में समान प्रकृति के पुलिस कमिश्नरेट में शक्तियों का अलग-अलग वितरण समानता, प्रशासनिक एकरूपता और कानून के समान अनुप्रयोग के दृष्टिकोण से जांच का विषय बनता है।

सरकार के जवाब का इंतजार
हेमंत कुमार के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर वह पहले भी प्रदेश सरकार और गृह विभाग के प्रशासनिक सचिव को कई बार ज्ञापन भेज चुके हैं, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
ऐसे में अब मुख्य सवाल यही है कि जब तीन पुलिस कमिश्नरों को धारा 163 BNSS के तहत जिलाधीश की शक्तियां दी जा सकती हैं, तो गुरुग्राम और फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर इससे वंचित क्यों हैं? यह मामला आने वाले समय में हरियाणा की पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था में अधिकारों के समान वितरण को लेकर महत्वपूर्ण प्रशासनिक और कानूनी बहस का आधार बन सकता है।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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