13 साल में 5 जिलों को नहरी पानी की एक बूंद नहीं; 41,275 दूषित पेयजल की शिकायतें सरकार की नाकामी का प्रमाण: आदित्य सुरजेवाला
बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़। हरियाणा में लगातार बिगड़ती पेयजल व्यवस्था, दूषित पानी को लेकर कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। विधानसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या 16 के जवाब में सरकार द्वारा सदन में रखे गए आंकड़ों का हवाला देते हुए सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार के अपने दस्तावेज हरियाणा में पेयजल संकट की भयावह तस्वीर सामने रख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज सुबह भी हरियाणा के किसी गाँव में किसी माँ ने नल से गिलास भरकर अपने बच्चे को पानी दिया होगा। पानी खारा या धुंधला रहा होगा, बर्तन पर सफेद परत जम गई होगी और मजबूरी में उसने पानी उबालकर बच्चे को पिलाया होगा। लेकिन उबालने से पानी में घुले हुए लवण, टीडीएस, फ्लोराइड या नाइट्रेट खत्म नहीं होते। सवाल यह है कि जिस साफ और सुरक्षित पेयजल की जिम्मेदारी सरकार की है, उसके लिए हरियाणा की जनता कब तक संघर्ष करती रहेगी?
सुरजेवाला ने कहा कि दूषित और खारा पेयजल अब केवल पानी का मुद्दा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, परिवार की आय और बच्चों के भविष्य का गंभीर सवाल बन चुका है। पलवल, नूंह, महेंद्रगढ़, जींद, सोनीपत और चरखी दादरी सहित प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में लोग वर्षों से खारे पानी की समस्या झेल रहे हैं।
भाजपा सरकार के आंकड़े ही बता रहे हैं पेयजल संकट की गंभीरता
1. हरियाणा के 62 प्रतिशत ब्लॉकों का पानी पीने योग्य मानकों पर खरा नहीं
सरकार के वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा के 142 में से 88 ब्लॉकों में भूजल का औसत टीडीएस 500 mg/L की स्वीकार्य सीमा से ऊपर है। इनमें 35 ब्लॉक ऐसे हैं जहां टीडीएस 1,000 mg/L या उससे अधिक है।
आदित्य सुरजेवाला ने कहा कि यह सरकार द्वारा सदन में रखे गए सात साल के रिकॉर्ड में सबसे चिंताजनक स्थिति है।
2. तीन साल में 65.5 प्रतिशत ब्लॉकों का पानी और खराब हुआ
2022 की तुलना में वर्ष 2025 में 142 में से 93 ब्लॉकों यानी 65.5 प्रतिशत ब्लॉकों में भूजल की गुणवत्ता और खराब हुई है।
1,500 mg/L से अधिक टीडीएस वाले ब्लॉकों की संख्या 2 से बढ़कर 9 हो गई। वहीं राज्य का औसत टीडीएस 658 mg/L से बढ़कर 737 mg/L पहुंच गया।
सुरजेवाला ने कहा, “पानी सुधर नहीं रहा, बल्कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हर साल बिगड़ रहा है।”
3. पलवल और नूंह में स्थिति सबसे चिंताजनक
पलवल में औसत टीडीएस तीन साल में 74 प्रतिशत बढ़कर 940 से 1,636 mg/L हो गया और जिले के सभी छह ब्लॉक प्रभावित हुए।
नूंह के इंदी ब्लॉक में टीडीएस लगभग दोगुना होकर 1,002 से 1,974 mg/L पहुंच गया है। यह 2,000 mg/L की उस अंतिम सीमा के बेहद करीब है, जिसे भारतीय मानक केवल ऐसी परिस्थितियों में स्वीकार करते हैं जब कोई वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध न हो।
सुरक्षित सीमा से 19 गुना तक खारा पानी
सुरजेवाला ने कहा कि सरकार के वर्ष 2025 के परीक्षण रिकॉर्ड में कुछ पेयजल स्रोतों में टीडीएस 9,553 mg/L, 8,791 mg/L, 6,979 mg/L और 6,140 mg/L तक दर्ज किया गया है।
जबकि स्वीकार्य सीमा 500 mg/L है।
उन्होंने सवाल किया कि “जब सरकार के अपने आंकड़े बताते हैं कि कहीं-कहीं पानी सुरक्षित सीमा से 19 गुना तक अधिक खारा है, तो सरकार इसे पेयजल व्यवस्था की सफलता कैसे बता सकती है?”
13 साल में पांच जिलों को नहरी पानी की एक बूंद नहीं
सुरजेवाला ने कहा कि सरकार के अपने रिकॉर्ड के अनुसार फरीदाबाद, गुरुग्राम, पलवल, पंचकूला और यमुनानगर आज भी 100 प्रतिशत भूजल पर निर्भर हैं।
2014 में भी स्थिति शून्य थी और 2026 में भी शून्य है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा नहरों का प्रदेश है, पानी के स्रोत मौजूद हैं और नहरी जलापूर्ति के लिए योजनाएं भी बनाई जाती रही हैं, लेकिन अगर 13 वर्षों में पांच जिलों की नहरी पानी की कवरेज शून्य रहती है तो यह केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल है।
करनाल 13 साल से लगभग 1.90 प्रतिशत पर अटका
सुरजेवाला ने कहा कि करनाल जिले में 2014 से आज तक नहरी पानी की कवरेज लगभग 1.90 प्रतिशत और भूजल पर निर्भरता करीब 98.10 प्रतिशत बनी हुई है।
उन्होंने सवाल किया, “जब सरकार अपने ही मुख्यमंत्री के गृह जिले में नहरी पानी की व्यवस्था नहीं सुधार सकी, तो पलवल, नूंह और कैथल के लोगों को किस आधार पर उम्मीद दी जा रही है?”
“दूषित पेयजल की शिकायतें 7.2 गुना बढ़ीं
सरकारी आंकड़ों के अनुसार दूषित पेयजल से संबंधित शिकायतें 2019 में 1,356 से बढ़कर 2025 में 9,769 हो गईं। यानी शिकायतों में लगभग 7.2 गुना वृद्धि हुई है।
2025 में रिपोर्ट किए गए 21 जिलों में से 15 जिलों में यह अब तक का सबसे खराब साल रहा। वर्ष 2026 में भी अब तक 6,676 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।
आदित्य सुरजेवाला ने कहा कि “41,275 शिकायतें केवल आंकड़ा नहीं हैं। हर शिकायत के पीछे एक परिवार है, जिसकी रोजमर्रा की जिंदगी दूषित पानी ने मुश्किल बना दी है।”
खारे पानी का सबसे ज्यादा बोझ गरीब परिवारों पर
सुरजेवाला ने कहा कि दूषित और खारा पानी गरीब परिवारों पर एक “छिपा हुआ टैक्स” बन चुका है। जिन घरों में नल का पानी पीने योग्य नहीं है, उन्हें मजबूरी में 20 लीटर के कैन खरीदने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा, “जिस पानी की जिम्मेदारी सरकार की थी, उसके लिए मजदूर और गरीब परिवार अपनी जेब से पैसा खर्च कर रहे हैं। यह केवल स्वास्थ्य का संकट नहीं, आर्थिक अन्याय भी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि खारा पानी पाइप और मोटर को नुकसान पहुंचाता है, खेती और पशुपालन को प्रभावित करता है तथा ग्रामीण परिवारों की आय पर सीधा असर डालता है।
सरकार ने फ्लोराइड, नाइट्रेट और आर्सेनिक की पर्याप्त जानकारी क्यों नहीं दी?
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि सरकार ने टीडीएस के आंकड़े तो सदन में रखे, लेकिन जहां भूजल की गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब है, वहां फ्लोराइड, नाइट्रेट और आर्सेनिक जैसे स्वास्थ्य के लिए गंभीर तत्वों की विस्तृत स्रोतवार जानकारी सामने नहीं रखी।
उन्होंने कहा, “सरकार ने नमक तो नापा, लेकिन यह बताने की जरूरत नहीं समझी कि उस पानी में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक तत्व कितनी मात्रा में हैं।”
सीवर और पेयजल की मिलावट पर सरकार के पास पूरा रिकॉर्ड तक नहीं
सुरजेवाला ने कहा कि उनके विधानसभा प्रश्न में 2019 से अब तक सीवरेज और बरसाती पानी के कारण पेयजल दूषित होने की घटनाओं की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन विभाग ने घटनाओं का विस्तृत रिकॉर्ड देने के बजाय पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का आंकड़ा प्रस्तुत कर दिया।
उन्होंने कहा कि शिकायतों की संख्या और वास्तविक दूषित पानी की घटनाओं की संख्या एक ही बात नहीं है। बहुत से गरीब और ग्रामीण परिवार शिकायत दर्ज ही नहीं करा पाते“
41,275 शिकायतें जल संकट की पूरी तस्वीर नहीं
सुरजेवाला ने कहा कि 41,275 शिकायतें हरियाणा के जल संकट का पूरा आकार नहीं हैं। यह उस संकट का केवल वह हिस्सा है जो शिकायत बनकर सरकारी रिकॉर्ड तक पहुंचा। असली संकट इससे कहीं बड़ा हो सकता है।”
उन्होंने कहा कि जिस समस्या को सरकार मापेगी ही नहीं, उसके समाधान की जवाबदेही भी तय नहीं की जा सकती।
कांग्रेस की मांग—अब आंकड़े नहीं, कार्रवाई चाहिए
विधायक आदित्य सुरजेवाला ने भाजपा सरकार से मांग की कि:
2014 से अब तक सभी नहर आधारित पेयजल योजनाओं पर श्वेत पत्र जारी किया जाए, जिसमें जिलेवार स्वीकृत राशि, खर्च और वास्तविक प्रगति बताई जाए।
दूषित पेयजल की शिकायतों के साथ-साथ जल-प्रदूषण की घटनाओं का अलग से राज्यव्यापी रजिस्टर बनाया और सार्वजनिक किया जाए।
1,000 mg/L से अधिक टीडीएस वाले सभी स्रोतों की फ्लोराइड, नाइट्रेट, आर्सेनिक और भारी धातुओं की तत्काल जांच कराई जाए।
ब्लॉक के औसत आंकड़ों के बजाय स्रोतवार जल गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
पलवल, नूंह और फरीदाबाद जैसे गंभीर रूप से प्रभावित जिलों के लिए निश्चित समयसीमा वाली नहरी पेयजल योजना घोषित की जाए।
जिन पांच जिलों में वर्षों से नहरी पानी की कवरेज शून्य है, वहां जवाबदेही तय कर समयबद्ध कार्ययोजना लागू की जाए।
अंत में आदित्य सुरजेवाला ने कहा:
“भाजपा सरकार के अपने आंकड़े उसकी नाकामी का प्रमाण हैं। 13 साल में पांच जिलों को नहरी पानी की एक बूंद नहीं मिली, 62 प्रतिशत ब्लॉकों का भूजल स्वीकार्य सीमा से ऊपर है और दूषित पेयजल की 41 हजार से ज्यादा शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। हरियाणा की जनता को आंकड़े नहीं, साफ और सुरक्षित पानी चाहिए। कांग्रेस जनता के इस अधिकार के लिए सड़क से विधानसभा तक आवाज उठाती रहेगी।”













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