August 28, 2026 8:13 am

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मनरेगा बचाओ अभियान: कांग्रेस का प्रदेशव्यापी विरोध, जिला मुख्यालयों पर एक साथ पत्रकार वार्ताएं

मनरेगा ग्रामीण आजीविका की रीढ़, इसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ घातक – राव नरेंद्र सिंह
चंडीगढ़/नारनौल, 10 जनवरी 2026: केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के मूल स्वरूप में बदलाव की कोशिशों के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रदेशभर में “मनरेगा बचाओ अभियान” शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में नारनौल सहित सभी जिला मुख्यालयों पर एक साथ पत्रकार वार्ताओं का आयोजन किया गया।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया एक अधिकार आधारित कानून है, जिसने प्रत्येक ग्रामीण परिवार को रोजगार मांगने का वैधानिक अधिकार दिया। उन्होंने कहा कि बीते करीब 20 वर्षों से मनरेगा ग्रामीण भारत की जीवनरेखा बनी हुई है।
प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान मनरेगा के तहत 4.6 करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। प्रतिवर्ष इस योजना से 5 से 6 करोड़ परिवारों को काम मिलता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन में कमी आती है। उन्होंने यह भी बताया कि मनरेगा के कुल कार्यदिवसों में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है।
राव नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा को कमजोर कर उसकी जगह “GRAM G – विकसित भारत रोजगार आजीविका गारंटी मिशन विधेयक” लाने की तैयारी में है। यह प्रस्ताव काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है, ग्राम पंचायतों और ग्राम समाजों को कमजोर करता है तथा यह अधिकार केंद्र सरकार के हाथ में देता है कि किस राज्य में यह योजना लागू होगी और किसमें नहीं।
उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के कुल खर्च का लगभग 90 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करती थी और 10 प्रतिशत भार राज्य सरकारों पर होता था, लेकिन अब यह बोझ बढ़ाकर राज्यों पर 40 प्रतिशत तक डाल दिया गया है। कर्ज में डूबी राज्य सरकारें इस भार को उठाने में असमर्थ होंगी, जिससे मनरेगा को धीरे-धीरे समाप्त करने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
राव नरेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि यदि यह बदलाव लागू हुए तो ग्रामीण बेरोजगारी में भारी इजाफा होगा, न्यूनतम मजदूरी की सुरक्षा खत्म होगी, शहरों की ओर पलायन बढ़ेगा और ग्राम पंचायतों के अधिकार समाप्त हो जाएंगे।
इस दौरान जिला अध्यक्ष सतबीर यादव ने कहा कि यह भाजपा सरकार की मनरेगा के खिलाफ सोची-समझी साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना करोड़ों मजदूरों के अधिकारों पर हमला है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के 90 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी दलित और पिछड़े वर्ग से आते हैं और उन्हें सामाजिक न्याय से वंचित करने की कोशिश की जा रही है।
यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निशित कटारिया ने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना के तहत प्रत्येक परिवार को न्यूनतम 100 दिन के काम की कानूनी गारंटी थी, लेकिन नए बदलावों के बाद यह गारंटी समाप्त हो जाएगी और काम केवल केंद्र द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा।
महिला जिला अध्यक्ष डॉ. राज सुनेश ने कहा कि मनरेगा के तहत न्यूनतम मजदूरी की कानूनी गारंटी थी, लेकिन प्रस्तावित बदलावों के बाद फसल कटाई के दौरान काम नहीं मिलेगा और मजदूरी भी सरकार अपने अनुसार तय करेगी।
प्रदेश अध्यक्ष ने ग्राम पंचायतों को दरकिनार किए जाने पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले पंचायतों के माध्यम से गांवों के विकास कार्य होते थे और मनरेगा मेट व रोजगार सहायकों की भूमिका अहम थी, लेकिन अब यह अधिकार भी छीना जा रहा है।
उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रखेगी।
पत्रकार वार्ता में महेंद्र रातां, मनोज पाटीकरा, युवा ब्लॉक अध्यक्ष रवींद्र मांदी, राम सिंह जोया, तोता राम कोली, एडवोकेट कुलदीप भारगढ़, ओबीसी अध्यक्ष विक्रम अवाना, राकेश यादव, पूर्व जज प्रो. भूप सिंह, सेवादल जिला अध्यक्ष अजीत यादव, अविनाश मांदी, श्याम सुंदर सोनी, दलीप सिंह चेयरमैन, राजबीर प्रोफेसर, शक्ति मंधाना, रेवाड़ी युवा अध्यक्ष राज प्रकाश सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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