October 13, 2026 5:41 pm

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त्योहारों के सीजन में ट्राइसिटी में मिलावटखोरों का आतंक, नकली मावा और मिठाइयों की बिक्री जोरों पर

सस्ते मुनाफे के चक्कर में लोगों की सेहत से खिलवाड़, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से आ रहा नकली मावा; कई कॉलोनियों में मिलावटी खाद्य पदार्थों का कारोबार फलने-फूलने का आरोप

बाबूगिरी न्यूज़

चंडीगढ़/पंचकूला। त्योहारों का मौसम शुरू होते ही ट्राइसिटी चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में मिठाइयों तथा अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ गई है। दीपावली सहित दूसरे त्योहारों पर लोग अपने परिवारों, रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए मिठाइयां खरीदते हैं। इसी बढ़ती मांग के बीच मिलावटखोरी का खतरा भी गंभीर होता जा रहा है। बाजारों में नकली मावे, मिलावटी मिठाइयों और घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर चिंता जताई जा रही है। आरोप हैं कि कुछ कारोबारी अधिक मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत को दांव पर लगा रहे हैं।
मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ ही मावा, दूध, घी, पनीर, सूखे मेवे और अन्य खाद्य सामग्री की खपत में भी वृद्धि होती है। ऐसे में यदि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी कमजोर पड़ती है तो मिलावटखोरों को अपनी गतिविधियां बढ़ाने का मौका मिल सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि आम ग्राहक के लिए दुकान पर रखी मिठाई की शुद्धता की पहचान करना आसान नहीं होता। देखने में आकर्षक और ताजा नजर आने वाली मिठाई भी गुणवत्ता के मानकों पर खरी उतरेगी या नहीं, इसका पता सामान्य तौर पर केवल देखकर नहीं लगाया जा सकता।
त्योहारी सीजन में खाद्य सुरक्षा विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। बाजारों में नियमित जांच, संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेना और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है, ताकि त्योहारों की खुशियां लोगों की सेहत के लिए खतरा न बनें।

राजस्थान और उत्तर प्रदेश से मावा आने की चर्चा, सस्ते माल पर सवाल
त्योहारी सीजन में मावे की मांग बढ़ने के कारण दूसरे राज्यों से भी इसकी आपूर्ति होती है। ट्राइसिटी के बाजारों में राजस्थान और उत्तर प्रदेश से मावा आने की बात कही जा रही है। हालांकि, बाहर से आने वाला हर मावा मिलावटी नहीं होता, लेकिन उसकी गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच जरूरी है।
मिठाई कारोबार से जुड़े लोगों के सामने भी चुनौती रहती है कि बढ़ती मांग के बीच उन्हें पर्याप्त मात्रा में अच्छी गुणवत्ता वाला कच्चा माल उपलब्ध हो। इस स्थिति का फायदा उठाकर यदि कोई कारोबारी सस्ते और संदिग्ध मावे की आपूर्ति करता है तो इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की सेहत पर पड़ सकता है।
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के तहत मावे और दूध से बने उत्पादों की नियमित जांच, आपूर्ति के स्रोतों की पड़ताल तथा संदिग्ध खेपों के नमूने लेना महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से त्योहारों से पहले परिवहन के माध्यम से आने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर निगरानी रखी जानी चाहिए।

सस्ती मिठाइयों के लालच में न करें सेहत से समझौता
त्योहारों के दौरान बाजार में अलग-अलग कीमतों पर मिठाइयां उपलब्ध होती हैं। कई ग्राहक कम कीमत के कारण मिठाई खरीदना पसंद करते हैं, लेकिन केवल सस्ती कीमत को गुणवत्ता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। यदि किसी खाद्य पदार्थ की कीमत सामान्य बाजार भाव से असामान्य रूप से कम है तो ग्राहक को उसकी गुणवत्ता और विक्रेता की विश्वसनीयता के प्रति सतर्क रहना चाहिए।
मिठाई तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला मावा, दूध, घी, चीनी और अन्य सामग्री मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। इसके अलावा मिठाइयों को तैयार करने, रखने और बेचने के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है।
खुले में रखी मिठाइयों पर धूल-मिट्टी, मक्खियों और दूसरे प्रदूषकों का खतरा रहता है। लंबे समय तक अनुचित तापमान पर रखी गई खाद्य सामग्री की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए दुकानदारों को खाद्य पदार्थों को ढककर रखने, स्वच्छ बर्तनों का इस्तेमाल करने और खराब होने की आशंका वाली मिठाइयों को बिक्री से हटाने की व्यवस्था करनी चाहिए।

सिंथेटिक मिठाइयों और मिलावटी खाद्य पदार्थों से स्वास्थ्य को खतरा
खाद्य पदार्थों में मिलावट का मामला केवल आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा है। घटिया या दूषित सामग्री से तैयार मिठाइयों के सेवन से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। मिलावट में इस्तेमाल किए जाने वाले पदार्थों की प्रकृति और मात्रा के आधार पर नुकसान की गंभीरता अलग-अलग हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ हानिकारक रसायनों या असुरक्षित पदार्थों के सेवन से शरीर के विभिन्न अंगों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए दूषित खाद्य पदार्थ अधिक जोखिम पैदा कर सकते हैं। यही वजह है कि मिठाई की गुणवत्ता को लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, किसी मिठाई को केवल उसके रंग, स्वाद या बनावट के आधार पर सिंथेटिक अथवा मिलावटी घोषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए उचित जांच और प्रयोगशाला की रिपोर्ट जरूरी होती है। इसलिए संदिग्ध खाद्य सामग्री मिलने पर संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देना और वैज्ञानिक जांच कराना महत्वपूर्ण है।

कॉलोनियों में भी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर निगरानी जरूरी
ट्राइसिटी के प्रमुख बाजारों के साथ-साथ रिहायशी कॉलोनियों में भी मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री होती है। कई स्थानों पर छोटी दुकानें, स्थानीय मिठाई विक्रेता और अस्थायी दुकानें त्योहारों के दौरान कारोबार बढ़ाते हैं। ऐसे प्रतिष्ठानों पर भी खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर खाद्य पदार्थ तैयार करने और बेचने वाले सभी कारोबारियों को स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण और गुणवत्ता संबंधी नियमों का पालन करना चाहिए। किसी भी प्रतिष्ठान को केवल छोटा कारोबार होने के कारण जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
प्रशासन और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को ऐसी जगहों पर भी निरीक्षण करना चाहिए, जहां खाद्य पदार्थ खुले में रखे जाते हैं या जहां सफाई की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। संदिग्ध सामग्री मिलने पर नियमानुसार नमूने लेकर जांच कराई जानी चाहिए। जांच में मिलावट या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

त्योहारों से पहले तेज होनी चाहिए खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई
त्योहारी सीजन में मिलावटखोरी पर नियंत्रण के लिए केवल अपील करना पर्याप्त नहीं है। बाजारों में नियमित निरीक्षण और कार्रवाई का प्रभावी तंत्र होना भी जरूरी है। खाद्य सुरक्षा विभाग को मिठाई की दुकानों, दूध एवं मावा विक्रेताओं, गोदामों, थोक आपूर्तिकर्ताओं और खाद्य सामग्री के परिवहन से जुड़े स्थानों पर नियमानुसार जांच करनी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जा सकता है:
मावे और दूध से बने उत्पादों की जांच: संदिग्ध सामग्री के नमूने लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण कराया जाए।
मिठाइयों की गुणवत्ता: निर्माण प्रक्रिया, इस्तेमाल होने वाली सामग्री और भंडारण की स्थिति की जांच हो।
स्वच्छता के नियम: दुकानों में सफाई, खाद्य पदार्थों को ढककर रखने और कर्मचारियों की स्वच्छता पर ध्यान दिया जाए।
निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि: पैक की गई खाद्य सामग्री पर आवश्यक विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज हों।
शिकायतों पर कार्रवाई: उपभोक्ताओं से मिली शिकायतों की जांच कर नियमानुसार कदम उठाए जाएं।
दोषियों पर कानूनी कार्रवाई: जांच में मिलावट या अन्य उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य केवल मिलावटखोरों पर शिकंजा कसना नहीं, बल्कि बाजार में बिकने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता के प्रति भरोसा कायम करना भी है।

प्रशासन की अपील: विश्वसनीय दुकानों से खरीदें मिठाइयां
त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं की सतर्कता भी मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। लोगों को मिठाइयां खरीदते समय दुकान की साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों को रखने के तरीके और पैक की गई सामग्री पर लिखे विवरण पर ध्यान देना चाहिए।
पैक की गई खाद्य सामग्री खरीदते समय निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि और पैकेट की स्थिति जांचनी चाहिए। मिठाइयों की खरीद के लिए विश्वसनीय विक्रेताओं को प्राथमिकता देना उचित है। यदि किसी खाद्य पदार्थ की गंध, रंग या स्थिति असामान्य लगे तो उसे खरीदने से बचना चाहिए।
यदि किसी ग्राहक को मिलावट का संदेह हो तो वह संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी या प्रशासन को शिकायत दे सकता है। शिकायत के साथ दुकान का नाम, स्थान और खाद्य पदार्थ से संबंधित उपलब्ध जानकारी देने से जांच में मदद मिल सकती है।

मिलावटखोरी पर लगाम के लिए नियमित निगरानी जरूरी
ट्राइसिटी में त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के बीच गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन, कारोबारियों और उपभोक्ताओं की साझा जिम्मेदारी है। कारोबारियों को अधिक मुनाफे के बजाय ग्राहकों की सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए, जबकि संबंधित विभागों को नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
मिलावटखोरी पर नियंत्रण के लिए जरूरी है कि जांच केवल त्योहारों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे वर्ष खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी रखी जाए। इससे न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा होगी, बल्कि ईमानदारी से कारोबार करने वाले दुकानदारों को भी अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने में मदद मिलेगी।
नोट: नकली मावे की आपूर्ति और कॉलोनियों में मिलावटखोरी से संबंधित आरोपों की पुष्टि जांच एवं आधिकारिक जानकारी के आधार पर की जानी चाहिए। किसी खाद्य पदार्थ को मिलावटी घोषित करने के लिए संबंधित जांच के निष्कर्ष आवश्यक हैं।

 

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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