October 14, 2026 4:22 pm

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चंडीगढ़ मेयर चुनाव में मतपत्रों पर कथित अवैध निशान लगाने का मामला फिर गरमाया, आप ने डीजीपी को सौंपी शिकायत

अनिल मसीह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी 2024 के फैसले और पहले दी गई पुलिस शिकायत का दिया हवाला

बाबूगिरी न्यूज़

चंडीगढ़, 14 अक्टूबर। चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में मतपत्रों की कथित हेराफेरी और मतगणना प्रक्रिया में अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आम आदमी पार्टी (आप) चंडीगढ़ ने बुधवार को इस मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को औपचारिक शिकायत सौंपी। पार्टी ने 30 जनवरी 2024 को हुए मेयर चुनाव में तत्कालीन पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की भूमिका की आपराधिक जांच कराने और उनके खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने की मांग की है।
आप चंडीगढ़ के अध्यक्ष विजयपाल सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी को शिकायत सौंपकर मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी की कोर कमेटी के चेयरमैन प्रेम गर्ग, महासचिव ओंकार सिंह औलख, नेता प्रतिपक्ष हरदीप सिंह बुटरेला और मुख्य प्रवक्ता योगेश ढींगरा शामिल रहे।
पार्टी ने अपनी शिकायत में सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी 2024 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मेयर चुनाव के दौरान मतपत्रों की गिनती में कथित अनियमितताओं और मतपत्रों पर निशान लगाए जाने के मामले की विस्तृत आपराधिक जांच की जानी चाहिए। आप का कहना है कि मामले में उपलब्ध दस्तावेजों, न्यायालय के निष्कर्षों और पहले दी गई पुलिस शिकायत को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।

आठ मतपत्र अमान्य घोषित किए जाने पर उठा था विवाद
30 जनवरी 2024 को चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर पद के लिए चुनाव हुआ था। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार कुलदीप कुमार मैदान में थे, जबकि भारतीय जनता पार्टी की ओर से अलग उम्मीदवार ने चुनाव लड़ा था।
मतगणना के दौरान कुलदीप कुमार के पक्ष में पड़े आठ मतपत्रों को अमान्य घोषित कर दिया गया था। इसके बाद घोषित परिणाम में भाजपा उम्मीदवार को विजयी घोषित किया गया। चुनाव परिणाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया और मामला न्यायालय पहुंच गया।
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान मतपत्रों पर कथित रूप से अवैध निशान लगाए गए और चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं। पार्टी का कहना है कि इन आरोपों की जांच कर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बनाया कार्रवाई का आधार
आप ने डीजीपी को दी गई शिकायत में सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी 2024 के फैसले का विशेष रूप से उल्लेख किया है। यह फैसला कुलदीप कुमार बनाम केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ एवं अन्य मामले में सुनाया गया था। सिविल अपील संख्या 2874/2024 से संबंधित इस मामले में शीर्ष अदालत ने मतपत्रों और मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच की थी।
शिकायत के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह के आचरण पर गंभीर टिप्पणियां की थीं। आप ने इन्हीं न्यायिक निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला देते हुए पुलिस प्रशासन से मामले में आपराधिक कार्रवाई करने की मांग की है।

पार्टी का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मामले को केवल चुनाव परिणाम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह भी जांच होनी चाहिए कि क्या किसी व्यक्ति ने कानून का उल्लंघन किया था। इसी उद्देश्य से शिकायत में प्राथमिकी दर्ज करने और निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
31 जनवरी 2024 को भी पुलिस को दी गई थी शिकायत
आम आदमी पार्टी ने अपनी नई शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि मेयर चुनाव से संबंधित घटना के अगले दिन, 31 जनवरी 2024 को सेक्टर-17 पुलिस थाने में शिकायत दी गई थी।

पार्टी के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया को लेकर आपत्ति तत्काल पुलिस के समक्ष उठा दी गई थी। अब डीजीपी को सौंपी गई शिकायत में पहले दी गई शिकायत, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा कर आगे की कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।
आप ने शिकायत के साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रति और संबंधित समाचार पत्र की कटिंग भी संलग्न की है। इसके अलावा शिकायत की एक प्रति चंडीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

अनिल मसीह सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग
शिकायत में आप ने मांग की है कि सक्षम पुलिस अधिकारी को अनिल मसीह के खिलाफ लागू कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के लिए निर्देश दिए जाएं। साथ ही, यदि जांच के दौरान अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
पार्टी ने पुलिस प्रशासन से शिकायत पर की गई कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज करने की स्थिति के बारे में लिखित जानकारी देने का भी अनुरोध किया है।
आप का कहना है कि मामले की जांच उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायालय के निष्कर्षों के आधार पर होनी चाहिए, ताकि किसी भी स्तर पर पक्षपात की आशंका न रहे। हालांकि, डीजीपी को शिकायत सौंपना अपने आप में प्राथमिकी दर्ज होने या किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग
आम आदमी पार्टी ने कहा कि चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी निष्पक्षता पर जनता का विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। पार्टी के अनुसार, मतगणना में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल न उठें।
पार्टी ने पुलिस प्रशासन से आग्रह किया है कि शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं की जांच की जाए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल, आप की ओर से डीजीपी को शिकायत सौंपकर इस पुराने चुनावी विवाद में पुलिस कार्रवाई की मांग की गई है। अब मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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