October 14, 2026 5:12 pm

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चंडीगढ़ के सेक्टर-30 में एक साल में ही उखड़ने लगा पार्क का फुटपाथ, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

आम आदमी पार्टी ने जेई और ठेकेदार पर कसा तंज, ‘चंडीगढ़ करप्शन रत्न’ देने की मांग; नगर निगम से जांच और जिम्मेदारी तय करने की अपील

बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 14 अक्टूबर। चंडीगढ़ के सेक्टर-30 में दशहरा मैदान के साथ बने नए पार्क में फुटपाथ की हालत ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले वर्ष जून में बनाया गया फुटपाथ एक साल के भीतर ही बदहाल हो गया। जिस फुटपाथ का निर्माण पार्क की सुंदरता बढ़ाने और लोगों को बेहतर पैदल मार्ग उपलब्ध कराने के लिए किया गया था, वही अब पार्क की खूबसूरती पर दाग बनता दिखाई दे रहा है।
इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी, चंडीगढ़ ने नगर निगम के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। पार्टी से जुड़े प्रेम गर्ग ने फुटपाथ की मौजूदा स्थिति को लेकर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार पर तंज कसते हुए उन्हें व्यंग्यात्मक रूप से ‘चंडीगढ़ करप्शन रत्न पुरस्कार’ देने की मांग की है। हालांकि, निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार होने की पुष्टि किसी जांच रिपोर्ट से नहीं हुई है। ऐसे में यह मांग निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठाए गए सवालों और राजनीतिक व्यंग्य के रूप में सामने आई है।

एक साल में ही खराब हो गया फुटपाथ
स्थानीय निवासियों के अनुसार, सेक्टर-30 में दशहरा मैदान के साथ स्थित नए पार्क में जून 2025 के दौरान फुटपाथ का निर्माण किया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि नया फुटपाथ लंबे समय तक टिकाऊ रहेगा और पार्क में सैर करने आने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी। लेकिन निवासियों का दावा है कि निर्माण के महज एक साल के भीतर ही इसकी हालत खराब हो गई।
लोगों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक निर्माण कार्य की गुणवत्ता का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि वह निर्धारित समय तक कितना टिकाऊ रहता है। यदि किसी फुटपाथ को तैयार होने के कुछ ही समय बाद मरम्मत की जरूरत पड़ने लगे, तो उसके निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री, काम करने के तरीके और अधिकारियों की निगरानी की समीक्षा जरूरी हो जाती है।
निवासियों ने आरोप लगाया कि फुटपाथ के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और कारीगरी पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित विभाग की तकनीकी जांच और सामग्री की गुणवत्ता संबंधी रिपोर्ट सामने आना जरूरी है।

पार्क की सुंदरता बढ़ाने के बजाय बना ‘नजरबट्टू’
फुटपाथ की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय निवासियों ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि इसे पार्क की सुंदरता बढ़ाने के लिए बनाया गया था, लेकिन अब यह सुंदरता पर ‘नजरबट्टू’ बन गया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर विकास कार्यों का उद्देश्य लोगों को बेहतर सुविधाएं देना और शहर की सुंदरता में इजाफा करना होता है। यदि नया निर्माण थोड़े समय में ही खराब होने लगे, तो ऐसे कार्यों की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
निवासियों ने कहा कि चंडीगढ़ की पहचान सुनियोजित शहर और बेहतर नागरिक सुविधाओं के लिए रही है। ऐसे में पार्कों, सड़कों, फुटपाथों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। खासकर उन स्थानों पर, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग सैर करने और समय बिताने आते हैं, वहां सुविधाओं का सुरक्षित और टिकाऊ होना जरूरी है।

जेई और ठेकेदार को ‘चंडीगढ़ करप्शन रत्न’ देने का तंज
फुटपाथ की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए निवासियों ने संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) और ठेकेदार को ‘चंडीगढ़ करप्शन रत्न पुरस्कार’ देने की मांग की। यह मांग व्यंग्य के रूप में की गई है, जिसके माध्यम से लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसकी निगरानी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
निवासियों का कहना है कि जनता की गाढ़ी कमाई से होने वाले विकास कार्यों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। निर्माण कार्यों के लिए सरकारी धन खर्च किया जाता है, इसलिए संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार की जिम्मेदारी है कि काम निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और उचित समय तक टिकाऊ बना रहे।
लोगों के अनुसार, यदि निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कमी पाई जाती है, तो केवल मरम्मत करवाना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों का पालन हुआ था या नहीं और काम की निगरानी करने वाले अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाई थी या नहीं।

नगर निगम से निष्पक्ष जांच और गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
इस मामले में स्थानीय निवासियों ने चंडीगढ़ नगर निगम से कई मांगें उठाई हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि फुटपाथ के निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच करवाई जाए, ताकि उसकी मौजूदा स्थिति और खराब होने के कारणों का पता लगाया जा सके।

निवासियों ने निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया था या नहीं। साथ ही, निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
लोगों ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में निर्माण की गुणवत्ता में कमी या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए।

दोबारा जनता पर न पड़े मरम्मत का बोझ
स्थानीय निवासियों की एक प्रमुख मांग यह भी है कि यदि फुटपाथ की खराब स्थिति के लिए ठेकेदार का दोष सामने आता है और नियमों के तहत उसकी जिम्मेदारी बनती है, तो मरम्मत उसी के खर्च पर करवाई जाए। उनका तर्क है कि जनता के पैसे से बने निर्माण की गुणवत्ता खराब होने पर उसकी मरम्मत के लिए दोबारा सरकारी धन खर्च करना उचित नहीं होगा, जबकि संबंधित ठेकेदार को जवाबदेह बनाया जा सकता है।
निवासियों का कहना है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करने से भविष्य में होने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। यदि समय रहते कमियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए, तो सरकारी धन की बर्बादी रोकने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जा सकती हैं।
अब नगर निगम की जांच और कार्रवाई पर नजर
सेक्टर-30 के पार्क में फुटपाथ की बदहाल स्थिति को लेकर उठे सवालों के बाद अब नगर निगम की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यदि विभाग इस मामले में तकनीकी जांच करवाता है, तो निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री और कार्य की निगरानी से जुड़े पहलुओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल, स्थानीय निवासियों की ओर से लगाए गए आरोपों और उठाई गई मांगों पर नगर निगम की ओर से किसी जांच रिपोर्ट, आधिकारिक प्रतिक्रिया या कार्रवाई की जानकारी इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं कराई गई है।
मुख्य सवाल यही है कि यदि एक साल के भीतर ही नया फुटपाथ खराब हो गया, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है और क्या नगर निगम इसकी जांच करवाकर जवाबदेही तय करेगा? अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या पार्क के फुटपाथ की बदहाली यूं ही बनी रहती है।
स्रोत: प्रेम गर्ग, आम आदमी पार्टी, चंडीगढ़ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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