टेंडर नहीं मिलने पर अधिकारी के खिलाफ शिकायतें करने की चर्चा, डॉ. अतुल कुमार के फैसले को लेकर अस्पताल प्रशासन में हो रही चर्चा
बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 17 अक्तूबर। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और वेतन भुगतान से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर की गई कार्रवाई के बाद चंडीगढ़ के सरकारी विभागों में आउटसोर्स एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच), सेक्टर-32 में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए जारी करीब 43 करोड़ रुपये के टेंडर का मामला भी चर्चा में आ गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीबीआई की कार्रवाई के दायरे में आई बताई जा रही एक आउटसोर्स एजेंसी ने जीएमसीएच-32 में मैनपावर उपलब्ध करवाने के लिए टेंडर भरा था। हालांकि, अस्पताल के अधिकारियों ने एजेंसी की ओर से जमा करवाए गए दस्तावेजों को निर्धारित मानकों के अनुरूप स्वीकार नहीं किया। इसके चलते एजेंसी को टेंडर नहीं मिल पाया था।
टेंडर नहीं मिलने के बाद अधिकारी के खिलाफ की थी शिकायत
सूत्रों के अनुसार, टेंडर नहीं मिलने के बाद संबंधित अधिकारी के खिलाफ कथित तौर पर पैसे मांगने की शिकायतें किए जाने की चर्चा रही। बताया जाता है कि इस मामले को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और पंजाब के राज्यपाल, जो चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं, के समक्ष भी शिकायत की गई थी।
हालांकि, इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति, उनमें लगाए गए आरोपों और जांच के निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दस्तावेजों को स्वीकार नहीं करने का फैसला अब चर्चा में
जीएमसीएच-32 में करीब 43 करोड़ रुपये के इस टेंडर को लेकर अब एक बार फिर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूत्रों का दावा है कि अस्पताल प्रशासन ने संबंधित एजेंसी के दस्तावेजों को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया था और इसी वजह से एजेंसी को टेंडर नहीं मिल पाया।
अब सीबीआई की कार्रवाई के बाद एजेंसी के दस्तावेजों और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल से जुड़े कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच यह चर्चा भी है कि यदि उस समय दस्तावेजों को लेकर आपत्तियां नजरअंदाज कर दी जातीं, तो स्थिति अलग हो सकती थी।
डॉ. अतुल कुमार के फैसले पर भी चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच जीएमसीएच-32 के अधिकारी डॉ. अतुल कुमार के फैसले की भी चर्चा हो रही है। सूत्रों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों को स्वीकार नहीं करने के निर्णय को लेकर पहले सवाल उठाए जा रहे थे, लेकिन अब सीबीआई की कार्रवाई के बाद कुछ लोग उनके निर्णय को उचित मान रहे हैं।
आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर फिर सवाल
जीएमसीएच-32 में सामने आया यह मामला आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की पारदर्शिता और दस्तावेजों के सत्यापन के महत्व को रेखांकित करता है। करोड़ों रुपये के सरकारी टेंडरों में एजेंसियों की पात्रता, अनुभव, वित्तीय क्षमता और प्रस्तुत दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
अब सवाल यह है कि क्या संबंधित एजेंसी की ओर से जमा करवाए गए दस्तावेजों की जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे? क्या टेंडर प्रक्रिया में शामिल अन्य एजेंसियों के दस्तावेजों का भी सत्यापन होगा? और क्या शिकायतों के आधार पर अधिकारी के खिलाफ की गई कार्रवाई या पूछताछ का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध है?













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