October 28, 2026 4:39 am

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चंडीगढ़ में STA की कथित सेटिंग ने CTU की हालत बिगाड़ी, अवैध बसों के संचालन पर उठे सवाल

सेक्टर-43 बस स्टैंड से लेकर शहर के अन्य मार्गों पर बसों के संचालन को लेकर विवाद, बिना वैध लाइसेंस यूपी-बिहार की बसें चलने का आरोप;

सीटीयू यूनियन ने उठाई आवाज, संबंधित अधिकारियों पर सुनवाई नहीं करने के आरोप

बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 20 अक्तूबर। चंडीगढ़ में स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) की कार्यप्रणाली और निजी बसों के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि शहर में उत्तर प्रदेश और बिहार की कुछ बसें बिना जरूरी लाइसेंस या वैध अनुमति के संचालित हो रही हैं। इससे चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) के कारोबार पर असर पड़ने के साथ-साथ चंडीगढ़ प्रशासन को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस मामले में सीटीयू यूनियन ने भी विरोध जताया है, लेकिन यूनियन का आरोप है कि संबंधित अधिकारी उनकी शिकायतों पर गंभीरता से सुनवाई नहीं कर रहे हैं।

सेक्टर-43 बस स्टैंड के आसपास बसों के संचालन पर सवाल
चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डे और शहर के अन्य हिस्सों में अंतरराज्यीय बसों के संचालन को लेकर परिवहन व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ निजी बसें निर्धारित नियमों का पालन किए बिना यात्रियों को लाने-ले जाने का काम कर रही हैं। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि संबंधित बसों के पास वैध परमिट, लाइसेंस और अन्य आवश्यक दस्तावेज हैं या नहीं।
यदि कोई बस बिना निर्धारित अनुमति के संचालित हो रही है, तो यह परिवहन नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है कि दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे।

सीटीयू की बसों के सामने बढ़ रही चुनौती
चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग शहर और आसपास के क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराती है। सीटीयू के बेड़े में शामिल बसों के संचालन, रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं पर सरकारी संसाधन खर्च होते हैं। ऐसे में यदि निजी बसें नियमों के विपरीत यात्रियों को ढोती हैं, तो इससे सीटीयू की यात्री संख्या और आमदनी प्रभावित होने की आशंका है।
सीटीयू से जुड़े लोगों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सभी ऑपरेटरों के लिए नियमों का समान रूप से पालन जरूरी है। यदि किसी निजी बस को निर्धारित परमिट या लाइसेंस के बिना संचालन की अनुमति मिलती है, तो इससे नियमों का पालन करने वाले परिवहन संचालकों के सामने प्रतिस्पर्धा की असमान स्थिति पैदा हो सकती है।
हालांकि, सीटीयू को हुए वास्तविक आर्थिक नुकसान का पता विभागीय आय, यात्री संख्या और बस संचालन के आंकड़ों की जांच के बाद ही चल सकेगा।

एसटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल, किसकी जिम्मेदारी?
इस पूरे मामले में स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। अंतरराज्यीय बसों के परमिट, संचालन संबंधी नियमों और संबंधित दस्तावेजों की जांच के जरिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी बस नियमों का उल्लंघन कर सड़क पर न चले।
उठ रहे आरोपों के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि यदि कुछ बसें बिना जरूरी अनुमति के संचालित हो रही हैं, तो उनकी नियमित जांच क्यों नहीं हो रही? क्या संबंधित विभाग को इसकी जानकारी है? यदि शिकायतें दी गई हैं, तो उन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की ओर से आना जरूरी है। साथ ही, आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं नियमों के पालन में लापरवाही तो नहीं बरती जा रही।

सीटीयू यूनियन का विरोध, अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप
सीटीयू यूनियन भी कथित अवैध बस संचालन के मुद्दे को लेकर विरोध जता रही है। यूनियन का आरोप है कि इस समस्या को उठाने के बावजूद संबंधित अधिकारी अपेक्षित कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इससे कर्मचारियों में नाराजगी है।
यूनियन की मांग है कि शहर में संचालित अंतरराज्यीय बसों के परमिट और लाइसेंस की जांच कराई जाए। यदि कोई बस नियमों के विरुद्ध चलती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। यूनियन का यह भी कहना है कि सरकारी परिवहन व्यवस्था को प्रभावित करने वाले मामलों पर प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

राजस्व के नुकसान की आशंका, जांच से सामने आएगी हकीकत
नियमों के उल्लंघन की स्थिति में परिवहन विभाग की ओर से निर्धारित शुल्क, जुर्माने और अन्य राजस्व मदों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, चंडीगढ़ प्रशासन को कितना नुकसान हुआ है, इस संबंध में आधिकारिक आंकड़े सामने आना जरूरी है।
इसलिए पूरे मामले में केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहने के बजाय संबंधित बसों के दस्तावेजों, परमिट, संचालन मार्गों और विभागीय कार्रवाई की जांच की जानी चाहिए।
अब सवाल यह है कि एसटीए और चंडीगढ़ प्रशासन सीटीयू यूनियन की शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं। यदि बसों का संचालन नियमों के विरुद्ध हो रहा है, तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करना जरूरी होगा। वहीं, यदि बसों के पास सभी जरूरी दस्तावेज हैं, तो विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि परिवहन व्यवस्था को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर हो सके।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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