वर्ष 2026 में 21 अक्टूबर तक 171 ट्रैप केस दर्ज, पिछले एक दशक में सर्वाधिक; वर्ष 2025 के मुकाबले भी 21.3 प्रतिशत की वृद्धि
शिकायत से कार्रवाई तक”की प्रक्रिया को बनाया गया और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी – डॉ चावला
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 23 अक्टूबर 2026। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2026 में ब्यूरो ने ट्रैप केसों के मामले में पिछले 10 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 21 अक्टूबर 2026 तक हरियाणा एसीबीद्वारा कुल 171 ट्रैप केस दर्ज किए जाल चुके हैं, जो वर्ष 2016 से अब तक किसी भी एक वर्ष में दर्ज ट्रैप केसों की सर्वाधिक संख्या है। वर्ष 2022 में दर्ज 170 ट्रैप केसों का पिछला रिकॉर्ड भी इस वर्ष पीछे छूट गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 अभी समाप्त नहीं हुआ है और ब्यूरो ने अक्टूबर माह में ही पिछले दशक का सर्वाधिक वार्षिक आंकड़ा पार कर लिया है।
–एसीबी चीफ डॉ. ए.एस. चावला का भ्रष्ट अधिकारियों को कड़ा संदेश:
रिश्वतखोर और जनता को जानबूझकर परेशान करने वाले अधिकारी एसीबी के रडार पर
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रमुख डॉ. ए.एस. चावला ने भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जो अधिकारी या कर्मचारी बिना रिश्वत लिए आमजन का जायज काम नहीं करते, लोगों को जानबूझकर कार्यालयों के चक्कर कटवाते हैं और अपने पद का दुरुपयोग कर उन्हें परेशान करते हैं, वे यह गलतफहमी निकाल दें कि वे कानून की पकड़ से बाहर हैं। ऐसे भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी एसीबी के रडार पर हैं। आमजन को परेशान कर रिश्वत मांगने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। सरकारी पद जनता की सेवा करने के लिए है, न कि लोगों को प्रताड़ित कर अवैध वसूली करने के लिए। भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को यह स्पष्ट समझ लेना चाहिए कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है और कानून के अनुसार उन्हें जवाबदेह बनाया जाएगा। ईमानदारी से काम करना हर सरकारी कर्मचारी की जिम्मेदारी है और इस जिम्मेदारी से बचने वालों के विरुद्ध एसीबी की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
हरियाणा सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का असर:
एसीबी की “शिकायत से कार्रवाई तक” की प्रक्रिया को बनाया गया और अधिक पारदर्शी और प्रभावी
हरियाणा सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत भ्रष्टाचार के उन्मूलन एवं पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए समय-2 पर कड़े एवं प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी के परिणाम स्वरूप राज्य सर्तकता एंव भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, हरियाणा द्वारा रिश्वतखोरी एवं भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए लगातार ट्रैप कार्रवाई की जा रही है। सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायत से कार्रवाई तक” की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाया गया है। इसके परिणामस्वरूप भ्रष्टाचार के मामलों की रिपोर्टिंग एवं पहचान में वृद्धि हुई है। ट्रैप कार्रवाइयों में हुई वृद्धि न केवल सरकार की सक्रिय निगरानी, बेहतर शिकायत-निवारण व्यवस्था, प्रभावी परिवर्तन तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध दृढ़ राजनीतिक एवं प्रशासनिक इच्छाशक्ति को दर्शाती है बल्कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध नागरिकों में बढ़ते विश्वास का प्रतीक है।
नौ महीनों में 191 आपराधिक मुकदमे दर्ज:
ब्यूरो द्वारा 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 तक विभिन्न अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के विरुद्ध कुल 191 आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें से 155 ट्रैप केसों में 16 राजपत्रित अधिकारियों, 131 अराजपत्रित कर्मचारियों तथा 25 निजी व्यक्तियों सहित कुल 172 आरोपियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर रिश्वत मांगने या लेने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
जांच और विभागीय कार्रवाई में भी तेजी:
वर्ष 2026 के दौरान 30 सितंबर तक ब्यूरो ने 88 नई जांचें दर्ज कीं। वहीं, 15 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 61 जांचें पूरी की गईं। इन पूर्ण जांचों में से 16 जांचों के आधार पर 74 राजपत्रित अधिकारियों और 20 अराजपत्रित कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई। इसके अतिरिक्त, 10 जांचों में 7 राजपत्रित अधिकारियों, 16 अराजपत्रित कर्मचारियों तथा 40 निजी व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि ब्यूरो रिश्वत के मामलों में कार्रवाई करने के साथ-साथ भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों और अनियमितताओं की जांच कर आगे की कार्रवाई के लिए भी लगातार प्रयासरत है।
21 मामलों में 26 आरोपियों को कठोर कारावास
भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई को प्रभावी बनाने में दोषसिद्धि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 तक की अवधि के दौरान ब्यूरो द्वारा दर्ज 21 आपराधिक मामलों में 23 अधिकारियों/कर्मचारियों तथा 3 निजी व्यक्तियों सहित कुल 26 आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। दोषसिद्ध अधिकारियों एवं कर्मचारियों में विद्युत विभाग के 5, पुलिस विभाग के 6, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के 1, सिंचाई विभाग के 2, शिक्षा विभाग के 2, आबकारी एवं कराधान विभाग के 2, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के 2, स्किल डेवलपमेंट विभाग के 1, हरियाणा वेयरहाउस के 1 तथा हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं संरचना विकास निगम के 1 अधिकारी/कर्मचारी शामिल हैं।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई रहेगी जारी
चावला ने कहा कि हरियाणा एसीबी सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ट्रैप केसों में पिछले एक दशक का रिकॉर्ड टूटना भ्रष्टाचार के विरुद्ध ब्यूरो तथा सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित करता है। ब्यूरो आमजन से अपील करता है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी सरकारी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी सूचना एसीबी की ऐप सतर्क हरियाणा पर दें, ताकि शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके और भ्रष्टाचार में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध प्रभावी कदम उठाए जा सकें।













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