गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को लाइसेंस देने के बाद सरकार का बड़ा कदम, पूरे हरियाणा में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस लागू नहीं करने के निर्देश
बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 23 अक्टूबर। हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी की एंट्री को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हरियाणा सरकार के ऊर्जा विभाग ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) को बिजली वितरण के समानांतर लाइसेंस को लेकर निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत आयोग को निर्देश दिया है कि राज्य में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस बनाया, चालू या प्रभावी नहीं किया जाए।
ऊर्जा विभाग के दस्तावेज के अनुसार, हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने 19 अक्टूबर 2026 को याचिका संख्या 30/2026 में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड (ईपीपीएल) को गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस प्रदान किया था। इन जिलों में पहले से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड बिजली वितरण का काम कर रहा है।
सरकार ने इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं, किसानों, आम जनता और बिजली विभाग के कर्मचारियों के बीच पैदा हुई आशंकाओं तथा विरोध की जानकारी मिलने का उल्लेख करते हुए जनहित और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर यह निर्देश जारी किया है।
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आयोग के फैसले पर उठाए गए थे कई सवाल
सरकारी दस्तावेज में कहा गया है कि आयोग ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को लाइसेंस देने से पहले संबंधित पक्षों से आपत्तियां आमंत्रित की थीं। इनमें दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम भी शामिल थे।
लाइसेंस का विरोध करते हुए कंपनी की वित्तीय क्षमता, तकनीकी तैयारियों, पूंजी की पर्याप्तता, ऋण चुकाने की क्षमता और लाइसेंस वाले पूरे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी निभाने की क्षमता पर सवाल उठाए गए थे।
दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि कंपनी की ओर से चरणबद्ध तरीके से वितरण नेटवर्क विकसित करने की प्रस्तावित योजना के बावजूद पूरे लाइसेंस क्षेत्र में सभी उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी निभाने को लेकर चिंताएं थीं।
इसके अलावा, अधिक राजस्व देने वाले उपभोक्ताओं को चुनिंदा रूप से अपने साथ जोड़ने की आशंका, बिजली वितरण निगमों को मिलने वाली क्रॉस-सब्सिडी पर संभावित प्रभाव, पहले से की गई बिजली खरीद संबंधी प्रतिबद्धताओं, अनुपयोगी पड़ सकने वाली परिसंपत्तियों और वितरण ढांचे के दोहराव जैसे मुद्दे भी उठाए गए थे।
सरकार ने उपभोक्ताओं और सरकारी बिजली व्यवस्था के हितों का दिया
ऊर्जा विभाग के निर्देश में कहा गया है कि राज्य सरकार समानांतर लाइसेंस दिए जाने के उपभोक्ताओं और सार्वजनिक हित पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। सरकार ने इसे अपनी मौजूदा नीति से अलग भी बताया है।
दस्तावेज के अनुसार, लाइसेंस दिए जाने के बाद आम जनता, बिजली उपभोक्ताओं, किसानों और राज्य के बिजली उपक्रमों के कर्मचारियों में विरोध तथा आशंकाओं से संबंधित जानकारी सरकार को मिली थी।
इन्हीं परिस्थितियों में राज्य सरकार ने सरकारी राजस्व, उपभोक्ताओं के हित और व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए आयोग को पूरे हरियाणा में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस नहीं बनाने, चालू नहीं करने और प्रभावी नहीं करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री की मंजूरी से जारी हुए निर्देश
ऊर्जा विभाग के दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि ये निर्देश हरियाणा के मुख्यमंत्री की मंजूरी से जारी किए गए हैं। इन्हें बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत राज्य सरकार के नीतिगत निर्देश के रूप में हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष रखा गया है।
हालांकि, दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार फिलहाल 19 अक्टूबर को आयोग द्वारा पारित आदेश के निष्कर्षों की सही या गलत होने के सवाल पर विचार नहीं कर रही है। सरकार ने अपने कदम का आधार उपभोक्ता हित, सरकारी राजस्व और जनहित को बताया है।
क्या है इस फैसले का महत्व?
इस निर्देश से हरियाणा में निजी कंपनियों के माध्यम से समानांतर बिजली वितरण व्यवस्था शुरू करने को लेकर महत्वपूर्ण नीतिगत सवाल खड़े हो गए हैं। गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए लाइसेंस के संदर्भ में सरकार का यह कदम खास महत्व रखता है। अब इस निर्देश के संबंध में आयोग की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।













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