October 28, 2026 9:13 am

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चंडीगढ़ ने निगम चुनाव नजदीक आते ही पार्षदों को आई वार्डों की याद, पेवर ब्लॉक से उद्घाटनों तक तेज हुई भागदौड़

पेवर ब्लॉक लगाने का काम युद्धस्तर पर, मरम्मत कार्यों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने की होड़;

उद्घाटन समारोहों ने भी पकड़ी रफ्तार, जनता पूछ रही—पूरे कार्यकाल में कहां थी इतनी सक्रियता?

बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 25 अक्तूबर। नगर निगम चुनाव नजदीक आते ही शहर के वार्डों में विकास कार्यों और राजनीतिक सक्रियता का माहौल तेज होने लगा है। कहीं फुटपाथ की मरम्मत चल रही है, कहीं पेवर ब्लॉक लगाए जा रहे हैं, तो कहीं सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को लेकर गतिविधियां बढ़ गई हैं। इसके साथ ही उद्घाटन समारोहों का सिलसिला भी रफ्तार पकड़ रहा है। वार्डों में हो रहे इन कार्यों के बीच पार्षदों की सक्रियता, प्रचार-प्रसार और उपलब्धियां गिनाने के तरीके चर्चा में हैं।
नगर निगम चुनाव की तैयारी के बीच शहर की राजनीति में एक बार फिर वार्ड स्तर के कामकाज का महत्व बढ़ गया है। पार्षद अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों को जनता के सामने रखने में जुटे हैं। निर्माण और मरम्मत के दौरान तस्वीरें खिंचवाई जा रही हैं, उन्हें सामाजिक माध्यमों पर साझा किया जा रहा है और स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वार्डों में विकास कार्यों की यह तेजी नियमित प्रशासनिक कामकाज का हिस्सा है या चुनाव से पहले जनता के बीच अपनी सक्रियता दिखाने की कवायद भी है?

पेवर ब्लॉक लगाने से लेकर फुटपाथ मरम्मत तक पर जोर
शहर के विभिन्न वार्डों में पेवर ब्लॉक लगाने, फुटपाथ ठीक करने और सड़कों की मरम्मत जैसे कार्यों पर जोर दिखाई देने लगा है। ये ऐसे काम हैं जिनका सीधा संबंध आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी से है। खराब फुटपाथ, उखड़े हुए पेवर ब्लॉक, टूटी सड़कें और जलभराव जैसी समस्याएं लोगों को लगातार परेशान करती हैं।
अब इन कार्यों को लेकर पार्षदों की सक्रियता बढ़ने के साथ उनकी सार्वजनिक चर्चा भी तेज हुई है। हालांकि, सवाल केवल यह नहीं है कि काम शुरू हुआ या नहीं, बल्कि यह भी है कि वह कितनी गुणवत्ता के साथ पूरा होगा, लोगों को कितनी राहत मिलेगी और संबंधित क्षेत्र में लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान होगा या नहीं।
नगर निगम के विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसलिए जरूरी है कि कामों की निगरानी, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और समयसीमा पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए, जितना उनके प्रचार पर दिया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर उपलब्धियां गिनाने की तैयारी
चुनावी माहौल बनने के साथ सामाजिक माध्यमों पर विकास कार्यों की तस्वीरें और गतिविधियां साझा करने का चलन भी चर्चा में है। किसी वार्ड में फुटपाथ की मरम्मत की तस्वीर सामने आती है, तो कहीं सीवरेज कार्य को लेकर आमंत्रण-पत्र जारी किया जाता है। इन गतिविधियों के जरिए पार्षद अपने कामकाज को जनता तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
चंडीगढ़ में भाजपा पार्षद गुरबख्श रावत की ओर से फुटपाथ की मरम्मत की तस्वीरें साझा किए जाने और आम आदमी पार्टी के पार्षद योगेश ढींगरा की ओर से सीवरेज मरम्मत के लिए आमंत्रण जारी किए जाने का उल्लेख प्रकाशित रिपोर्ट में किया गया है। इस संदर्भ में सार्वजनिक कार्यों को व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में पेश करने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का अपने कामकाज की जानकारी जनता को देना स्वाभाविक है। लेकिन नागरिकों के मन में यह सवाल भी उठता है कि नियमित विकास कार्यों को प्रदर्शित करने के साथ उन समस्याओं का हिसाब भी सामने आना चाहिए, जो लंबे समय से लंबित हैं।

उद्घाटन समारोहों ने भी पकड़ी रफ्तार
वार्डों में निर्माण और मरम्मत कार्यों के साथ उद्घाटन कार्यक्रमों की गतिविधियां भी तेज होने लगी हैं। छोटे-बड़े विकास कार्यों के उद्घाटन के जरिए स्थानीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिशें दिखाई दे रही हैं। इन आयोजनों के माध्यम से जनप्रतिनिधि लोगों से संपर्क बढ़ाने और अपने कामकाज को सामने रखने का प्रयास करते हैं।
हालांकि, किसी परियोजना का उद्घाटन उसके सफल और उपयोगी होने की अंतिम कसौटी नहीं है। असली महत्व इस बात का है कि सुविधा वास्तव में जनता के काम आ रही है या नहीं। यदि किसी सड़क, फुटपाथ या सीवरेज परियोजना का उद्घाटन हो जाता है, लेकिन कुछ समय बाद ही लोगों को दोबारा उसी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो ऐसे कार्यों की उपयोगिता पर सवाल उठना तय है।
इसलिए जरूरी है कि उद्घाटन समारोहों के साथ परियोजनाओं की लागत, काम पूरा होने की समयसीमा, गुणवत्ता और रखरखाव की जानकारी भी सार्वजनिक की जाए।

पूरे कार्यकाल का हिसाब भी जरूरी
चुनाव से पहले पार्षदों की सक्रियता के बीच सबसे अहम सवाल पूरे कार्यकाल के प्रदर्शन का है। वार्ड में कौन-कौन से विकास कार्य स्वीकृत हुए, कितने पूरे हुए, किन परियोजनाओं में देरी हुई और किन समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार शिकायतें करनी पड़ीं—इन सभी बिंदुओं पर जवाबदेही जरूरी है।
नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके वार्ड के लिए निर्धारित बजट का कितना उपयोग हुआ और उससे कौन-सी सुविधाएं विकसित की गईं। केवल नई परियोजनाओं की घोषणा या मरम्मत के दौरान तस्वीरें साझा करना पर्याप्त नहीं है। वार्ड में पहले से मौजूद समस्याओं का समाधान और विकास कार्यों का टिकाऊ होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
यदि चुनाव से पहले कामकाज की समीक्षा होती है, तो इसमें केवल पूरे किए गए कार्यों की सूची ही नहीं, बल्कि लंबित परियोजनाओं और अधूरी घोषणाओं का विवरण भी शामिल होना चाहिए।

बंदरों के आतंक से लेकर सड़क और सीवरेज की समस्या तक
चंडीगढ़ के कुछ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के साथ ऐसी समस्याएं भी सामने आती रही हैं, जिनका समाधान केवल निर्माण कार्यों से नहीं हो सकता। सेक्टर-27डी में बंदरों की गतिविधियों से लोगों की परेशानी, सड़कों की खराब स्थिति और सीवरेज संबंधी दिक्कतों जैसे मुद्दे नियमित निगरानी और संबंधित विभागों की प्रभावी कार्रवाई की मांग करते हैं।
प्रकाशित रिपोर्ट में सेक्टर-27डी के निवासियों की ओर से बंदरों के आतंक को लेकर शिकायतें किए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप भी उल्लेखित है। यदि नागरिक लंबे समय तक शिकायतें करते रहें और समाधान के लिए इंतजार करना पड़े, तो केवल अन्य विकास कार्यों का प्रचार उनकी परेशानी दूर नहीं कर सकता।
ऐसे मुद्दों पर पार्षदों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे शिकायतों की स्थिति स्पष्ट करें और समाधान के लिए ठोस कदम उठाएं।

जनता को दिखना चाहिए विकास का वास्तविक असर
वार्डों में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ना सकारात्मक हो सकता है, बशर्ते इसका लाभ नागरिकों को वास्तविक रूप से मिले। पेवर ब्लॉक मजबूत हों, फुटपाथ सुरक्षित बनें, सड़कें गड्ढामुक्त हों, सीवरेज व्यवस्था सुचारु रहे और नागरिकों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो—इन्हीं कसौटियों पर विकास का आकलन होना चाहिए।
चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और कामकाज पर चर्चा होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। जनता को भी अपने वार्ड में हुए कार्यों, खर्च हुए बजट और लंबित समस्याओं के बारे में सवाल पूछने चाहिए।
बड़ा सवाल यही है कि चुनाव नजदीक आने के साथ वार्डों में तेज हुई भागदौड़ क्या चुनाव के बाद भी इसी रफ्तार से जारी रहेगी? पेवर ब्लॉक लगाने, फुटपाथ सुधारने और उद्घाटन समारोह आयोजित करने से आगे बढ़कर नागरिकों को स्थायी सुविधाएं चाहिए। जनप्रतिनिधियों के काम का वास्तविक मूल्यांकन तस्वीरों, प्रचार और समारोहों से नहीं, बल्कि पूरे कार्यकाल में हुए काम और जनता को मिली राहत से होना चाहिए।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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