October 28, 2026 9:13 am

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बंगाल में न्यायाधीशों द्वारा पात्र ठहराए गए मतदाताओं के विरुद्ध चुनाव आयोग की 16 लाख अपीलों पर सवाल: 

कर्ण बीर सिंह सिद्धू ने सार्वजनिक जवाब माँगे, आरटीआई का सहारा लिया

बाबूगिरी न्यूज़

चंडीगढ़, 25 अक्टूबर 2026 |  सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल के जिन मतदाताओं को पात्र ठहराया, उनके विरुद्ध भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कथित रूप से दायर लगभग 16 लाख अपीलों का निर्वाचन कानून में कोई स्पष्ट आधार नहीं है। यह कहना है पंजाब सरकार के सेवानिवृत्त विशेष मुख्य सचिव और अमृतसर के पूर्व ज़िला निर्वाचन अधिकारी कर्ण बीर सिंह सिद्धू का। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर सार्वजनिक स्पष्टीकरण माँगा है।
प्रकाशित समाचारों के अनुसार, जिनकी सत्यता की ज़िम्मेदारी कर्ण बीर सिंह सिद्धू नहीं लेते, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने जिन 32.7 लाख मतदाताओं को पात्र पाया, उनमें से लगभग आधे के विरुद्ध आयोग ने अपील की। बताया जाता है कि इनमें से 12 लाख से अधिक अपीलों पर एक ही दाखिल-तिथि, 5 अप्रैल 2026, अंकित है, यानी विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची फ्रीज़ होने से दो दिन पहले।
कर्ण बीर सिंह सिद्धू बताते हैं कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के अंतर्गत किसी अन्य व्यक्ति का नाम सूची में शामिल किए जाने पर आपत्ति केवल उसी निर्वाचन क्षेत्र का पंजीकृत मतदाता कर सकता है, और अपील केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसकी सुनवाई रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ने की हो।
उनके अनुसार, आयोग का तंत्र कानून और अपने कार्यकारी निर्देशों के अनुसार, विवादास्पद एसआईआर सहित, पूरी सावधानी से मतदाता सूची तैयार करता है; उसमें कोई त्रुटि हो तो उसका सुधार विधि की सम्यक् प्रक्रिया से होता है, किसी मतदाता की आपत्ति पर या नोटिस देकर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा। उन्होंने कहा, “सूची स्वयं तैयार करने के बाद आयोग आपत्तिकर्ता की शक्तियाँ अपने हाथ में नहीं ले सकता, विशेषकर तब जब इसके लिए कोई वैधानिक प्रावधान ही नहीं है।”
अपने पत्र में उन्होंने आयोग से छह प्रश्नों के सार्वजनिक उत्तर माँगे हैं:
किस कानून या सर्वोच्च न्यायालय के किस आदेश के तहत आयोग को न्यायाधीशों द्वारा पात्र ठहराए गए मतदाताओं के विरुद्ध अपील करने का अधिकार प्राप्त हुआ?
अपीलों पर हस्ताक्षर किसने किए, और क्या अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इसके लिए लिखित रूप से अधिकृत किया गया था?
क्या प्रत्येक अपील में संबंधित मतदाता के लिए अलग, तर्कसंगत आधार दिया गया है, या आधार थोक में तैयार किए गए?
क्या लगभग 12 लाख अपीलें एक ही दिन अपलोड की गईं, और उन्हें किसने तैयार किया और जाँचा?
294 में से 222 निर्वाचन क्षेत्रों में 40 से 60 प्रतिशत की लगभग एकसमान अपील-दर का कारण क्या है?
व्यक्तिगत नागरिकों पर दस आपत्तियों की अपनी ही सीमा और प्रतिदिन लाखों की दर से दायर अपीलों के बीच आयोग तालमेल कैसे बैठाता है?
कर्ण बीर सिंह सिद्धू ने आग्रह किया है कि उत्तर केवल उन्हें भेजने के बजाय सार्वजनिक किए जाएँ। यदि एक सप्ताह के भीतर सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं आता, तो उनके पत्र को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आवेदन माना जाए।
कर्ण बीर सिंह सिद्धू एसआईआर पर चल रही बहस में राष्ट्रीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में संविधान के अनुच्छेद 326 की सर्वोपरिता पर लगातार बल देते रहे हैं। अनुच्छेद 326 अठारह वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रत्येक नागरिक को मताधिकार की गारंटी देता है, जो केवल अयोग्यताओं की एक सीमित सूची के अधीन है; कानून इसमें केवल सामान्य निवास की शर्त जोड़ता है, जो बेघर व्यक्तियों पर भी लागू होती है। उन्होंने कहा, “मताधिकार नियम है; अयोग्यता एक संकीर्ण अपवाद है।”
1984 बैच के पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारी कर्ण बीर सिंह सिद्धू अमृतसर के ज़िला निर्वाचन अधिकारी रह चुके हैं और लगातार तीन लोकसभा चुनावों में भारत निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक रहे हैं।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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