चंडीगढ़/हिसार: हरियाणा में ठंड का प्रकोप लगातार बना हुआ है. मकर संक्रांति के दिन भी प्रदेश के अधिकांश इलाके शीतलहर और घने कोहरे की गिरफ्त में रहे. मौसम विभाग ने सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, जींद, झज्जर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, भिवानी, चरखीदादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और नूंह समेत कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. सुबह और रात के समय बढ़ती ठंड ने आमजन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
सुबह घने कोहरे से जनजीवन प्रभावित
बुधवार सुबह जींद, कैथल, सोनीपत, हिसार, भिवानी, झज्जर और सिरसा में घनी धुंध की चादर छाई रही. कई स्थानों पर दृश्यता बेहद कम दर्ज की गई, जिससे सड़कों पर वाहन चालकों को धीमी गति से चलना पड़ा. कोहरे के चलते स्कूल जाने वाले बच्चों और दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों को खासा परेशान होना पड़ा.
तापमान में भारी गिरावट
पिछले 24 घंटों के दौरान हरियाणा के तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई है. प्रदेश का अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 3.8 डिग्री सेल्सियस कम रहा. पलवल में अधिकतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि करनाल में दिन का तापमान गिरकर मात्र 10.0 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया.
अगले चार दिन कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के अनुसार 15 और 16 जनवरी को शीतलहर का असर कुछ कम हो सकता है, लेकिन कई इलाकों में घना कोहरा बना रहेगा. 17 जनवरी को मौसम शुष्क रहने की संभावना है, हालांकि सुबह के समय धुंध छा सकती है. 18 और 19 जनवरी को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने की उम्मीद है.
मौसम विशेषज्ञ की चेतावनी
मौसम वैज्ञानिक डॉ. मदन खीचड़ के मुताबिक 16 जनवरी तक मौसम सामान्यतः सूखा रहेगा. इस दौरान ठंडी हवाएं चलेंगी, जिससे रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है. दक्षिण और पश्चिमी हरियाणा में पाला पड़ने की आशंका भी जताई गई है. 19 जनवरी के बाद बारिश से ठंड से कुछ राहत मिलने की संभावना है.
हिसार में सीजन की सबसे ठंडी रात
हिसार में सोमवार रात इस सीजन की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई, जहां न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस रहा. सोनीपत में 1.4 और नारनौल में 1.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया. उत्तरी बर्फीली हवाओं के कारण कई जिलों में पाला जम गया है, जिससे जनजीवन और खेती दोनों प्रभावित हो रहे हैं.
किसानों के लिए विशेष सलाह
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को पाले से फसलों की सुरक्षा के लिए हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है. साथ ही नाजुक पौधों को पॉलीथीन या घास-फूस से ढकने और बागवानी फसलों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है.













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