मकर संक्रांति पर आंध्र प्रदेश में हाई-स्टेक्स मुर्गा लड़ाई, विजेता को मिले 1.53 करोड़ रुपये
ताडेपल्लीगुडेम (आंध्र प्रदेश), मकर संक्रांति के अवसर पर आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले में आयोजित एक मुर्गा लड़ाई (कॉकफाइट) ने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया। ताडेपल्लीगुडेम क्षेत्र में हुए इस आयोजन में एक शख्स ने अपने मुर्गे की जीत के दम पर 1 करोड़ 53 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम जीत ली। इतनी बड़ी राशि जीतने की खबर फैलते ही आसपास के जिलों तक यह मुकाबला सुर्खियों में आ गया।
इस हाई-प्रोफाइल कॉकफाइट का आयोजन स्थानीय स्तर पर पैबोयिना वेंकटरमैया द्वारा किया गया था। मकर संक्रांति के चलते पहले से ही क्षेत्र में उत्सव का माहौल था, ऐसे में इस पारंपरिक लेकिन विवादित खेल को देखने के लिए आस-पास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आयोजन स्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई और सुरक्षा व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण नजर आई।

दो ताकतवर नस्लों की आमने-सामने भिड़ंत
अखाड़े में जिन दो मुर्गों के बीच मुकाबला हुआ, वे दोनों ही अपनी-अपनी नस्ल और ताकत के लिए जाने जाते हैं।
पहला मुर्गा सेथुवा नस्ल का था, जो गुडीवाड़ा निवासी प्रभाकर का बताया गया।
दूसरा मुर्गा डेगा नस्ल का था, जिसके मालिक राजमुंदरी के रमेश थे।
लड़ाई की शुरुआत से ही दोनों मुर्गों ने एक-दूसरे पर आक्रामक वार किए। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और दर्शक हर हमले पर तालियां और शोर मचाते नजर आए। लंबे समय तक चली इस फाइट में दोनों मुर्गों ने जबरदस्त ताकत और फुर्ती का प्रदर्शन किया।
डेगा नस्ल के मुर्गे की जीत, रमेश बने करोड़पति
कड़ी टक्कर के बाद आखिरकार रमेश के डेगा नस्ल के मुर्गे ने बाज़ी मार ली। इस जीत के साथ ही रमेश की किस्मत पूरी तरह बदल गई। मुर्गे की जीत पर उसे कुल 1 करोड़ 53 लाख रुपये की इनामी राशि मिली, जिससे वह रातों-रात करोड़पति बन गया।
इतनी बड़ी रकम की जीत ने वहां मौजूद लोगों को भी हैरान कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि मकर संक्रांति के दौरान कॉकफाइटिंग का पीक सीजन जरूर होता है, लेकिन इतनी बड़ी बाज़ी और इनाम की रकम बेहद कम देखने को मिलती है।
परंपरा, रोमांच और विवाद
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में मकर संक्रांति के दौरान मुर्गा लड़ाई को परंपरा से जोड़ा जाता है, हालांकि यह गतिविधि अक्सर कानूनी और नैतिक विवादों में भी घिरी रहती है। पशु अधिकार संगठनों और प्रशासन की ओर से समय-समय पर इस पर रोक लगाने की कोशिशें की जाती रही हैं, इसके बावजूद हर साल संक्रांति पर ऐसे आयोजन सामने आते हैं।
फिलहाल, इस आयोजन और भारी धनराशि की जीत को लेकर पूरे पश्चिम गोदावरी जिले में चर्चाओं का दौर जारी है, और रमेश की यह जीत स्थानीय लोगों के बीच एक मिसाल के तौर पर देखी जा रही है।













Total Users : 310678
Total views : 521984