चंडीगढ़। चंडीगढ़ एस्टेट ऑफिस द्वारा निजी संपत्तियों कखरीद-फरोख्त में स्वयं मध्यस्थ अथवा प्रॉपर्टी डीलर की भूमिका निभाने के प्रस्ताव को लेकर प्रॉपर्टी फेडरेशन, चंडीगढ़ ने कड़ा ऐतराज जताया है। फेडरेशन ने इसे अवैध, अनैतिक और जनविरोधी बताते हुए हजारों लोगों के रोजगार पर सीधा हमला करार दिया है।
इस गंभीर मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए प्रॉपर्टी फेडरेशन, चंडीगढ़ की एक आपातकालीन बैठक आयोजित की गई, जिसमें कमलजीत सिंह पंछी, संजय जैन, तरलोक सिंह, एच.एस. मोंगा, अमित जैन, नरेश बंसल, इंद्रजीत सिंह और नवदीप शर्मा उपस्थित रहे। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर एस्टेट ऑफिस की योजना की कड़े शब्दों में निंदा की गई।
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि एस्टेट ऑफिस एक नियामक संस्था है, न कि कोई व्यावसायिक इकाई। निजी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में उतरना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। सरकार का दायित्व व्यापार करना नहीं, बल्कि नागरिकों को निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
बैठक में यह भी कहा गया कि यदि वही विभाग, जो संपत्ति के रिकॉर्ड, सत्यापन, रजिस्ट्रेशन और ट्रांसफर को नियंत्रित करता है, सौदेबाजी में भी शामिल होगा, तो इससे गंभीर हितों के टकराव (कॉनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) की स्थिति उत्पन्न होगी और व्यवस्था भ्रष्टाचार-प्रवण बन सकती है।
फेडरेशन के अनुसार प्रॉपर्टी डीलिंग एक वैध और सम्मानजनक व्यवसाय है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी है। ऐसे में सरकार का स्वयं इस क्षेत्र में उतरना नागरिकों से सीधी प्रतिस्पर्धा करना है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
प्रॉपर्टी फेडरेशन, चंडीगढ़ ने प्रशासन से मांग की है कि इस प्रस्ताव को तुरंत वापस लिया जाए, एस्टेट ऑफिस को उसके नियामक दायरे तक सीमित रखा जाए और किसी भी नई नीति से पहले सभी हितधारकों से व्यापक परामर्श किया जाए। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो वह लोकतांत्रिक आंदोलन, कानूनी कार्रवाई और उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप के लिए बाध्य होगा।
फेडरेशन ने यह भी जानकारी दी कि इस संबंध में उसका एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही उपायुक्त-सह-संपत्ति अधिकारी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेगा।











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