मुंबई:. एशियाई बाजारों से मिले सुस्त संकेतों और बढ़ते वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच मंगलवार (20 जनवरी) को भारतीय शेयर बाजार भारी दबाव में नजर आए। कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। दिन के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही एक फीसदी से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए।
बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 83,207 अंक पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार से ही कमजोरी हावी रही। जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ा, बिकवाली का दबाव और गहराता गया। अंत में सेंसेक्स 1,065.71 अंक या 1.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,180.47 अंक पर बंद हुआ।
इसी तरह, एनएसई का निफ्टी-50 भी सपाट शुरुआत के बाद दबाव में आ गया। इंडेक्स 25,580 अंक पर खुला, लेकिन कुछ ही देर में 25,500 के नीचे फिसल गया। पूरे दिन बिकवाली हावी रहने के बाद निफ्टी 353 अंक या 1.38 प्रतिशत टूटकर 25,232.50 अंक पर बंद हुआ।
वैश्विक अनिश्चितता ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ते राजनीतिक और व्यापारिक तनावों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कमजोर किया है। अमेरिका की ओर से टैरिफ को लेकर सख्त बयानबाजी और यूरोपीय देशों के साथ बढ़ते मतभेदों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इसका असर उभरते बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया।
इसके अलावा अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। मजबूत अमेरिकी श्रम बाजार के चलते यह आशंका जताई जा रही है कि फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रख सकता है। इससे डॉलर में मजबूती आई और भारत समेत अन्य उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ गया।
रुपये की कमजोरी से एफपीआई बिकवाली का डर
घरेलू मोर्चे पर डॉलर के मुकाबले रुपये में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। रुपया 91 के स्तर के आसपास फिसल गया, जिससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली तेज होने की आशंका बढ़ गई। पहले से ही सतर्क रुख अपनाए हुए विदेशी निवेशकों ने बाजार से दूरी बनाए रखी।
सेक्टर और शेयरों में व्यापक गिरावट
सेंसेक्स के अधिकांश शेयर लाल निशान में बंद हुए। फाइनेंस, ऑटो, मेटल और फार्मा सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला, जबकि केवल कुछ चुनिंदा बैंकिंग शेयरों में सीमित मजबूती दर्ज की गई।
सेक्टोरल इंडेक्स में रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा नुकसान में रहा। इसके अलावा ऑटो और आईटी सेक्टर के शेयरों में भी दो फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट और गहरी रही, जहां करीब तीन फीसदी तक की कमजोरी देखने को मिली।













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