नई दिल्ली, 21 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि गैर-कानूनी माइनिंग से पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो सकती है। इसी को देखते हुए शीर्ष अदालत ने अरावली क्षेत्र में खनन और उससे जुड़े तमाम मुद्दों की जांच के लिए संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का निर्णय लिया है।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और के. एम. नटराज बेंच के सामने उपस्थित रहे।
अरावली पहाड़ियों को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अदालत में दलील दी कि विभिन्न इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है और इसे तत्काल रोके जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो पर्यावरणीय संतुलन को भारी नुकसान होगा।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गैर-कानूनी खनन पूरी तरह से एक अपराध है। अदालत ने टिप्पणी की कि अवैध माइनिंग से ऐसा नुकसान होता है जिसकी भरपाई संभव नहीं है और इसके बेहद गंभीर तथा भयावह परिणाम सामने आते हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से और पूरी निष्ठा के साथ पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के संज्ञान में आया है कि कुछ लोग अवैध खनन गतिविधियों में गहराई से शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को भी फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सरकार को अपनी पूरी मशीनरी का इस्तेमाल कर समस्या का समाधान करना चाहिए। अदालत ने संकेत दिए कि अरावली क्षेत्र की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।











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