चंडीगढ़/नई दिल्ली: केंद्र शासित प्रदेशों में IAS एवं IPS अधिकारियों की तैनाती को लेकर भारत सरकार द्वारा 3 जनवरी 2025 को जारी अधिसूचना अब तक लागू न होने पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मुद्दे को लेकर चंडीगढ़ स्थित सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय (DoPT) को औपचारिक प्रतिनिधित्व सौंपते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष आर. के. गर्ग द्वारा भेजे गए प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि वरिष्ठ नागरिकों एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों का यह संगठन केंद्र शासित प्रदेशों की प्रशासनिक व्यवस्था पर लगातार नजर रखता है। ऐसे में IAS एवं IPS अधिकारियों की समयबद्ध तैनाती से संबंधित अधिसूचना का अब तक क्रियान्वयन न होना गंभीर चिंता का विषय है।
प्रशासनिक शून्यता से प्रभावित हो रहा सुशासन
प्रतिनिधित्व में स्पष्ट किया गया है कि IAS एवं IPS अधिकारियों की तैनाती में देरी के कारण केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक अनिश्चितता की स्थिति बन रही है। इसका सीधा असर कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों, नीतिगत निर्णयों और आम जनता से जुड़े प्रशासनिक कार्यों पर पड़ रहा है। एसोसिएशन का मानना है कि यह स्थिति सुशासन के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
कारणों पर नहीं है कोई स्पष्टता
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने यह भी सवाल उठाया है कि अधिसूचना के लागू न होने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। क्या यह किसी नीतिगत या प्रशासनिक बाधा के कारण रुका हुआ है, या फिर राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से किसी प्रकार की आपत्ति सामने आई है—इस बारे में अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
शीघ्र क्रियान्वयन की मांग
एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि 3 जनवरी 2025 को जारी नोटिफिकेशन को लागू न किए जाने के कारणों की स्पष्ट जानकारी दी जाए और यदि कोई बाधा है तो उसे तत्काल दूर कर अधिसूचना को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। साथ ही, केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक स्थिरता और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए IAS एवं IPS अधिकारियों की तैनाती में हो रही देरी को प्राथमिकता के आधार पर समाप्त करने का आग्रह किया गया है।
सरकार से सकारात्मक कदम की उम्मीद
प्रतिनिधित्व के अंत में एसोसिएशन ने विश्वास जताया है कि भारत सरकार इस गंभीर प्रशासनिक मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाएगी और आवश्यक कदम उठाकर केंद्र शासित प्रदेशों की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी।











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