चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव से ठीक पहले शहर की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। गुरुवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू होने जा रही है और इससे पहले सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। अगले 24 घंटे चंडीगढ़ की सियासत के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इन्हीं घंटों में सत्ता संतुलन की दिशा तय हो सकती है।
कांग्रेस में मंथन तेज, आप को समर्थन पर अभी असमंजस
मेयर चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी में लगातार बैठकों का दौर जारी है। चंडीगढ़ कांग्रेस कमेटी की अहम बैठक में आम आदमी पार्टी को समर्थन देने या न देने को लेकर गहन चर्चा हुई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की और सांसद मनीष तिवारी को अधिकृत किया गया कि वे परिस्थितियों के अनुसार आगे की रणनीति तय करें और जरूरत पड़ने पर अंतिम फैसला लें।
आप ने समर्थन नहीं मांगा तो कांग्रेस उतारेगी अपने उम्मीदवार
कांग्रेस की बैठक में यह स्पष्ट राय उभरकर सामने आई कि यदि आम आदमी पार्टी औपचारिक रूप से समर्थन मांगने आगे नहीं आती है, तो कांग्रेस अपने मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए उम्मीदवार उतार सकती है। पार्टी नेताओं का मानना है कि बिना किसी ठोस समझौते के समर्थन देना भविष्य में कांग्रेस के लिए राजनीतिक नुकसानदेह साबित हो सकता है।
कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष उजागर, पार्षदों की गैरहाजिरी बनी चिंता
मेयर चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आए। पार्टी की अहम बैठक में आधे से ज्यादा पार्षदों की गैरमौजूदगी ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी। हालात की गंभीरता को देखते हुए सांसद मनीष तिवारी ने खुद मोर्चा संभाला और अपने आवास पर अलग से बैठक बुलाने का फैसला लिया, ताकि सभी पार्षदों और नेताओं से सीधे संवाद किया जा सके।
मनीष तिवारी के आवास पर देर रात तक रणनीतिक बैठक
कांग्रेस के सभी पार्षद सांसद मनीष तिवारी के घर पहुंचे, जहां देर रात तक मेयर चुनाव की रणनीति पर मंथन होता रहा। सूत्रों के मुताबिक बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नामों के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के साथ तालमेल की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
एचएस लक्की बोले—कांग्रेस-आप में कोई औपचारिक गठबंधन नहीं
आम आदमी पार्टी को समर्थन देने के सवाल पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच फिलहाल कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है। प्रेस वार्ता में उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया। भाजपा को सत्ता से रोकने के लिए सीट एडजस्टमेंट जैसे विकल्पों पर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
आम आदमी पार्टी का दावा—पार्टी एकजुट, कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ेगी चुनाव
वहीं आम आदमी पार्टी ने अपनी एकजुटता का दावा किया है। पार्टी के सभी 11 पार्षद फिलहाल शहर से बाहर हैं, लेकिन वे वीरवार को नामांकन प्रक्रिया में शामिल होंगे। आप नेताओं का कहना है कि उम्मीदवारों को लेकर अंतिम फैसला सामूहिक सहमति से लिया जाएगा।
आप पार्षदों ने यह भी दावा किया कि इस बार मेयर चुनाव कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ा जाएगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि भाजपा के कुछ पार्षदों से बातचीत चल रही है और जल्द ही किसी पार्षद के आम आदमी पार्टी में शामिल होने की संभावना है।
भाजपा में भी अंदरूनी खींचतान, कई दावेदार मैदान में
भाजपा की ओर से भी चुनावी तैयारियां तेज कर दी गई हैं, लेकिन पार्टी के भीतर अंदरूनी मतभेदों की खबरें सामने आ रही हैं। मेयर पद को लेकर कई भाजपा पार्षद खुद को दावेदार मान रहे हैं, जिससे पार्टी में खींचतान की स्थिति बनी हुई है।
विनोद तावड़े चंडीगढ़ पहुंचे, भाजपा में सहमति बनाने की कोशिश
स्थिति को संभालने के लिए भाजपा हाईकमान ने वरिष्ठ नेता और पर्यवेक्षक विनोद तावड़े को चंडीगढ़ भेजा है। वे लगातार भाजपा पार्षदों के साथ बैठकें कर रहे हैं और उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बनाने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि भाजपा जल्द ही मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है।
नामांकन से पहले निर्णायक मोड़ पर चंडीगढ़ की सियासत
कुल मिलाकर नामांकन शुरू होने से ठीक पहले चंडीगढ़ की राजनीति पूरी तरह उबाल पर है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच तालमेल बनता है या नहीं, भाजपा अपने अंदरूनी मतभेदों से कैसे निपटती है और कौन से चेहरे मैदान में उतरते हैं—इन सभी सवालों के जवाब अगले कुछ घंटों में सामने आ सकते हैं। चंडीगढ़ मेयर चुनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।













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