June 15, 2026 2:15 pm

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साइबर दोस्त’ इंटरएक्टिव डिजिटल ई-हैंडबुक – समाज के लिए बनेगी एक वरदान

साइबर दोस्त’ इंटरएक्टिव डिजिटल ई-हैंडबुक – सुरक्षित साइबर समाज की ओर एक सशक्त कदम

डॉ विजय कुमार चावला

आज डिजिटल युग ने हमारे जीवन को अभूतपूर्व रूप से सरल, तीव्र और सुविधाजनक बना दिया है। शिक्षा, बैंकिंग, स्वास्थ्य, शासन, व्यापार और सामाजिक संपर्क —हर क्षेत्र में डिजिटल तकनीक हमारी दिनचर्या का अभिन्न अंग बन चुकी है। किंतु डिजिटल सुविधाओं के साथ-साथ साइबर अपराध, डेटा चोरी, ऑनलाइन ठगी, फेक न्यूज़ और निजता के उल्लंघन जैसी चुनौतियाँ भी तेज़ी से बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में सुरक्षित डिजिटल नागरिक का निर्माण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए “सुरक्षित डिजिटल नागरिक” शीर्षक यह ‘साइबर दोस्त’ इंटरएक्टिव डिजिटल ई-हैंडबुक तैयार की गई है। यह डिजिटल ई-हैंडबुक साइबर अपराध, साइबर सुरक्षा और साइबर जागरूकता पर एक समग्र, सरल एवं व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। यह ई-हैंडबुक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना के अनुरूप कौशल-आधारित, अनुभवात्मक और आजीवन सीखने को बढ़ावा देगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें जीवनोपयोगी कौशलों से सशक्त बनाना है। डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा इसी दिशा में एक अनिवार्य कौशल है। यह ई-हैंडबुक विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों—तीनों के लिए उपयोगी है, क्योंकि यह न केवल क्या करें बताती है, बल्कि क्यों और कैसे करें पर भी स्पष्ट मार्गदर्शन देती है। इसके साथ ही यह ई-हैंडबुक मजबूत पासवर्ड, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण, सुरक्षित ब्राउज़िंग, डेटा गोपनीयता और डिजिटल शिष्टाचार जैसे साइबर सुरक्षा उपायों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

• डॉ चावला का मानना है कि प्रत्येक विद्यालय में एक एक साइबर रिस्पोंडर अवश्य होना चाहिए। जोकि हर साइबर संकट में, पहला डिजिटल सहायक का कार्य करेगा।विद्यालयों में विद्यार्थियों को साइबर अपराध के बारे में विस्तार से बताते हुए साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करते रहना चाहिए। विद्यालयों में साइबर जागरूकता ‘ई-क्लब्स’ का गठन किया जाना चाहिए। विद्यालय मुखिया को साइबर अपराध समिति का गठन करना चाहिए। विद्यालय में समय-समय पर विद्यार्थियों,शिक्षकों व माता-अभिभावकों को साइबर अपराध व साइबर सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण का प्रबंध करते रहना चाहिए। विद्यालय में एक शिकायत पेटी भी लगाईं जानी चाहिए। विद्यालय में साइबर अपराध की घटना घटित होने पर विद्यालय मुखिया को साइबर अपराध रोकथाम के निम्न कार्य अवश्य करने चाहिए-

• बच्चे का विश्वास जीतना चाहिए।

• विद्यालय मुखिया को एक समिति गठित करनी चाहिए।

• पीड़ित के माता-पिता को सूचित करना चाहिए।

• बच्चे को स्कूल परामर्शदाता के पास भेजना चाहिए।

• सोशल मीडिया से साक्ष्य एकत्र करनी चाहिए।

• साइबर कानून विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

उपर्युक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मेरे द्वारा “सुरक्षित डिजिटल नागरिक” शीर्षक यह ‘साइबर दोस्त’ इंटरएक्टिव डिजिटल ई-हैंडबुक तैयार की गई है। इसका इंटरएक्टिव स्वरूप इसे और भी प्रभावी बनाता है। यह ई-हैंडबुक केवल सावधान रहने की सीख नहीं देती, बल्कि जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार को भी प्रोत्साहित करती है। एक सुरक्षित डिजिटल नागरिक वही है जो अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझता है—जो तकनीक का उपयोग सृजन, सहयोग और सकारात्मक परिवर्तन के लिए करता है।

डॉ विजय चावला का मानना है कि “सुरक्षित डिजिटल नागरिक” ई-हैंडबुक एक ऐसे भविष्य की नींव रखेगी,जहाँ विद्यार्थी निडर होकर डिजिटल दुनिया में आगे बढ़ सकेंगे, साइबर खतरों को पहचान सकेंगे और स्वयं के साथ-साथ समाज को भी सुरक्षित रख सकेंगे। यह पहल निश्चित रूप से डिजिटल भारत के सशक्त, जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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