August 29, 2026 12:53 pm

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PUNJAB: जल विवाद पर पंजाब के हितों की मजबूती से रक्षा कर रही है पंजाब सरकार: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

पंजाब के पास अतिरिक्त पानी नहीं, एक बूंद भी किसी को नहीं देंगे
एसवाईएल विवाद सुलझाने को पंजाब बड़े भाई की भूमिका निभाने को तैयार
पंजाब के सुझाव पर संयुक्त समिति बनाने पर हरियाणा सहमत
चंडीगढ़, 27 जनवरी: सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पंजाब सरकार जल विवाद पर राज्य के हितों की मजबूती से रक्षा कर रही है और पंजाब के हिस्से के पानी की एक बूंद भी किसी अन्य राज्य को नहीं लेने दी जाएगी। उन्होंने यह बात आज हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ हुई बैठक के बाद कही।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है। “हम किसी का हक नहीं मार रहे, लेकिन यह भी साफ है कि पंजाब के हिस्से का पानी किसी और को देने का सवाल ही नहीं उठता,” उन्होंने कहा। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि हरियाणा पंजाब का पड़ोसी और छोटा भाई है, इसलिए राज्य आपसी वैर-विरोध नहीं चाहता और इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान सौहार्दपूर्ण ढंग से निकालने के पक्ष में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एसवाईएल नहर का मुद्दा पंजाब के लिए भावनात्मक होने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। यदि इसे वर्तमान परिस्थितियों में लागू किया गया तो राज्य में गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज की स्थिति में एसवाईएल नहर के लिए पंजाब के पास भूमि भी उपलब्ध नहीं है।


पंजाब के जल अधिकारों का पक्ष रखते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि तीन नदियों के कुल 34.34 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी में से पंजाब को मात्र 14.22 एमएएफ, यानी लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ही मिला है, जबकि शेष 60 प्रतिशत पानी हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को दिया जाता है, जबकि इन राज्यों से होकर इन नदियों में से कोई भी नदी नहीं बहती।
मुख्यमंत्री ने राज्य में बढ़ते जल संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सतही जल की कमी के कारण भूमिगत जल पर अत्यधिक दबाव है। पंजाब के 153 ब्लॉकों में से 115 ब्लॉकों में भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन हो चुका है और यह दर पूरे देश में सबसे अधिक है।
भाई घनैया जी की सेवा भावना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने अपनी जरूरतों की परवाह किए बिना अब तक 60 प्रतिशत पानी गैर-रिपेरियन राज्यों को दिया है। “पंजाब पानी साझा करता है, लेकिन बाढ़ से होने वाला नुकसान अकेले पंजाब को ही झेलना पड़ता है,” उन्होंने कहा और जोर दिया कि किसी भी निर्णय में पंजाब के हितों को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।
पावन गुरबाणी की पंक्ति ‘पवण गुरु पाणी पिता माता धरत महत॥’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु साहिबान ने वायु, जल और धरती को सर्वोच्च दर्जा दिया है और राज्य सरकार इन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए उसी मार्ग पर चल रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इसे एक सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि हाल के इतिहास में यह पहली बार है जब दोनों राज्यों की सरकारें इस मुद्दे के समाधान के लिए गंभीरता से आपसी बातचीत कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जीत या हार का सवाल नहीं, बल्कि पंजाब और पंजाबियों के हितों व भावनाओं का विषय है।


जल विवाद के समाधान के लिए पंजाब द्वारा संयुक्त वर्किंग ग्रुप गठित करने के सुझाव पर हरियाणा सरकार की सहमति का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि अधिकारियों के स्तर पर नियमित बैठकों से इस लंबे विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकलेगा और दोनों राज्यों में विकास व समृद्धि का नया अध्याय शुरू होगा।
इस अवसर पर पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर गोयल, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. रवि भगत, जल संसाधन सचिव कृष्ण कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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