May 23, 2026 9:55 pm

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PUNJAB: गुजरात के छात्रों ने पंजाब राज्य किसान एवं खेत मज़दूर आयोग का किया दौरा

चंडीगढ़, 31 जनवरी। गुजरात के वडोदरा स्थित पारुल यूनिवर्सिटी के कृषि एवं खाद्य प्रौद्योगिकी से जुड़े छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के कृषि परिदृश्य और विशेष रूप से पंजाब राज्य कृषि नीति–2023 को समझने के उद्देश्य से पंजाब राज्य किसान एवं खेत मज़दूर आयोग का दौरा किया।

इस दल में पारुल यूनिवर्सिटी के बी.एससी. एग्रीकल्चर (ऑनर्स), एम.एससी. एग्रीकल्चर और बी.एससी. (फूड टेक्नोलॉजी) के छात्र शामिल थे। टीम का नेतृत्व कोऑर्डिनेटर एलेक्स राज, आरव जैन और नमहिक धबालिया कर रहे थे, जबकि यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. विक्रम परमार भी उनके साथ मौजूद रहे।

दौरे के दौरान आयोग के प्रशासनिक अधिकारी-सह-सचिव डॉ. रणजोध सिंह बैंस और सीआरआईडीडी के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. सुखविंदर सिंह ने छात्रों से संवाद किया। इस अवसर पर छात्रों ने आयोग के चेयरमैन एवं अधिकारियों के साथ पंजाब की कृषि को प्रभावित करने वाले अहम मुद्दों पर गहन चर्चा की।

विचार-विमर्श के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), किसानों पर कर्ज का बोझ, किसानों द्वारा आत्महत्याएं, किसान आंदोलन तथा राज्य में कृषि के भविष्य जैसे विषयों पर प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किया गया। आयोग के चेयरमैन प्रो. डॉ. सुखपाल सिंह ने कृषि अर्थशास्त्र और नीति में अपने दीर्घ अनुभव के आधार पर छात्रों के प्रश्नों के स्पष्ट और व्यावहारिक उत्तर दिए।

प्रो. डॉ. सुखपाल सिंह ने सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने, फसली विविधता को बढ़ावा देने, किसानों को ऋण और बाज़ार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने तथा कृषि को अधिक व्यवहारिक और लाभकारी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कुछ चुनिंदा फसलों पर अत्यधिक निर्भरता से आर्थिक और पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जिन्हें संतुलित और सतत कृषि उपायों के माध्यम से ही दूर किया जा सकता है।

उन्होंने छात्रों से कृषि एवं सहायक क्षेत्रों में रोज़गार की संभावनाओं पर भी चर्चा की और कहा कि आने वाले समय में खाद्य प्रसंस्करण और खाद्य-आधारित उद्योग सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभरेंगे।

इस खुले संवाद सत्र में छात्रों को अपने विचार खुलकर रखने और शंकाओं का समाधान पाने का अवसर मिला। छात्रों ने इस इंटरएक्टिव सत्र की सराहना करते हुए कहा कि इससे उन्हें कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़कर पंजाब की कृषि से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों को समझने में मदद मिली।

सत्र के अंत में डॉ. रणजोध सिंह बैंस ने सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने प्रो. डॉ. सुखपाल सिंह, डॉ. सुखविंदर सिंह, एलेक्स राज, आरव जैन, नमहिक धबालिया, डॉ. विक्रम परमार सहित आयोग के अनुसंधान अधिकारियों और सहायकों की सक्रिय भागीदारी एवं सार्थक विचार-विमर्श के लिए आभार व्यक्त किया।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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