June 15, 2026 5:23 pm

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CHANDIGARH: डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी केस का खुलासा: साइबर क्राइम पुलिस ने 5 और आरोपियों को किया गिरफ्तार

चंडीगढ़, 31 जनवरी 2026: साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, यूटी चंडीगढ़ ने फर्जी डिजिटल अरेस्ट के एक बड़े साइबर ठगी मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए पांच और साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

यह कार्रवाई एफआईआर नंबर 03 दिनांक 09.01.2026 के तहत थाना साइबर क्राइम, यूटी चंडीगढ़ में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 308, 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2) व 61(2) के अंतर्गत दर्ज की गई है।
यह ऑपरेशन एसपी-साइबर यूटी चंडीगढ़ सुश्री गीतांजलि खंडेलवाल, आईपीएस के नेतृत्व में, ए. वेंकटेश, डीएसपी (साइबर क्राइम व आईटी) के मार्गदर्शन तथा इंस्पेक्टर इराम रिज़वी, एसएचओ, थाना साइबर क्राइम, सेक्टर-17 की निगरानी में अंजाम दिया गया। यह कार्रवाई क्षेत्र में बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

गिरफ्तार किए गए आरोपी
ओंकार शर्मा पुत्र अजीत राय शर्मा, निवासी पंजाब, उम्र 52 वर्ष
अभिनव शर्मा उर्फ अभि पुत्र राज कुमार शर्मा, निवासी पंजाब, उम्र 43 वर्ष
जसविंदर सिंह उर्फ डड्डू पुत्र शमशेर, निवासी पंजाब, उम्र 43 वर्ष
वरिंदर कुमार उर्फ विक्की पुत्र चरण दास, निवासी एसएएस नगर (मोहाली), पंजाब
अंकुश कुमार उर्फ तरुण गुप्ता पुत्र परवीन कुमार, निवासी मोहाली, पंजाब, उम्र 29 वर्ष

मामले की पृष्ठभूमि
यह केस चंडीगढ़ के एक निवासी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि 7 जनवरी 2026 को शाम करीब 5:50 बजे उसे अज्ञात नंबरों से कॉल आई, जिसमें कॉल करने वालों ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताते हुए उसके कार्ड को मनी लॉन्ड्रिंग केस से जोड़ दिया।
पीड़ित को गिरफ्तारी, संपत्ति जब्त करने और घर से बाहर न निकलने जैसी धमकियां दी गईं। इसके बाद व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए “Colaba Mumbai Police” नाम से पुलिस यूनिफॉर्म पहने व्यक्ति ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट और दस्तावेज भेजकर उसे डिजिटल रूप से गिरफ्तार घोषित कर दिया।

बाद में “CBI Director” के नाम से कॉल कर आधार कार्ड के दुरुपयोग का हवाला दिया गया। लगातार धमकी और मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने आरटीजीएस के माध्यम से 38 लाख रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। पीड़ित और उसकी पत्नी को 7 जनवरी की शाम से 8 जनवरी की शाम तक अवैध फोन अरेस्ट में रखा गया।

जांच में हुआ खुलासा
जांच में सामने आया कि यह एक संगठित साइबर अपराध गिरोह है, जो कई मॉड्यूल और म्यूल बैंक खातों के जरिए काम कर रहा था। पहले ही इस मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वित्तीय जांच में पाया गया कि ठगी की राशि में से 8 लाख रुपये ओंकार शर्मा के बैंक खाते में ट्रांसफर हुए थे, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जसविंदर सिंह उर्फ डड्डू म्यूल खातों की व्यवस्था करने, ठगी की रकम निकालने और उसे अन्य साथियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा था। अभिनव शर्मा उर्फ अभि म्यूल खाता धारकों और मुख्य आरोपियों के बीच कड़ी के रूप में काम कर रहा था।
वहीं अंकुश कुमार उर्फ तरुण गुप्ता नकद राशि एकत्र करने में और वरिंदर कुमार उर्फ विक्की नकद के बदले यूएसडीटी (USDT) उपलब्ध कराकर अपराध की आय को इधर-उधर करने में शामिल पाया गया।
फिलहाल जांच निर्णायक चरण में है। आरोपियों की पुलिस रिमांड मांगी गई है ताकि अन्य सहयोगियों का पता लगाया जा सके, अपराध से अर्जित धन की बरामदगी हो सके और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।

आम जनता के लिए पुलिस की एडवाइजरी
कोई भी पुलिस/सीबीआई/ईडी अधिकारी फोन या व्हाट्सएप पर पैसे या निजी जानकारी नहीं मांगता।
पार्सल में ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग या डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी कॉल पूरी तरह फर्जी होती हैं।
फर्जी गिरफ्तारी वारंट या वीडियो कॉल पर भरोसा न करें।
सत्यापन, गिरफ्तारी से बचने या केस निपटाने के नाम पर कभी पैसे ट्रांसफर न करें।
अपनी पहचान संबंधी दस्तावेज केवल अधिकृत अधिकारियों को ही दें।
अपना सिम कार्ड या बैंक खाता किसी को किराये पर देना गंभीर कानूनी मुसीबत में डाल सकता है।
अपने नाम पर जारी सिम कार्ड TAFCOP जैसे सरकारी पोर्टल पर जांचें।
व्हाट्सएप में अनजान कॉल्स को ब्लॉक करने के लिए प्राइवेसी सेटिंग बदलें।
आधार बायोमेट्रिक लॉक रखें।
किसी भी संदिग्ध कॉल की पुष्टि स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर करें।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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