तहसीलदार विक्रम: विवादों का पुराना इतिहास
पंचकूला, 01 फरवरी : करीब 17 एकड़ भूमि के फर्जी और धोखाधड़ीपूर्ण लेन–देन के मामले में गिरफ्तार रायपुररानी के तहसीलदार विक्रम से पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। अब इस पूरे प्रकरण में एक पटवारी की भूमिका भी बेहद संदिग्ध मानी जा रही है, जिससे मामला और ज्यादा गंभीर होता जा रहा है। गिरफ्तार किए गए तहसीलदार विक्रम का नाम इससे पहले भी कई विवादित मामलों से जुड़ चुका है।
कालका में एक कथित गलत रजिस्ट्री को लेकर पहले से ही विजिलेंस जांच चल रही है।
पिंजौर में एक महिला को कागजों में मृत दिखाकर जमीन की रजिस्ट्री कराने के मामले में भी एफआईआर दर्ज है और जांच जारी है।
सूत्रों के अनुसार, जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव, जमाबंदी, इंतकाल (म्यूटेशन) और अन्य राजस्व दस्तावेजों की प्रक्रिया में उक्त पटवारी की संलिप्तता सामने आई है। जांच अधिकारियों का मानना है कि बिना पटवारी की मिलीभगत के इतनी बड़ी जमीन का फर्जी लेन–देन संभव ही नहीं था। रिकॉर्ड में कथित रूप से की गई हेराफेरी और नियमों की अनदेखी की जांच अब इसी कड़ी में की जा रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पटवारी पहले भी रिश्वतखोरी के एक मामले में पकड़ा जा चुका है। उस समय उसके खिलाफ कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन बाद में कथित तौर पर “सेटिंग” के जरिए उसने दोबारा रायपुररानी क्षेत्र में ही पोस्टिंग हासिल कर ली। अब विजिलेंस यह भी जांच कर रही है कि आखिर किन अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में उसे फिर से संवेदनशील इलाके में तैनाती दी गई।
विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) की टीम तहसीलदार विक्रम से चल रही तीन दिन की पुलिस रिमांड के दौरान पटवारी के साथ उसकी कथित सांठगांठ, पैसों के लेन–देन, दस्तावेजों में छेड़छाड़ और पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है। जांच एजेंसी को आशंका है कि इस जमीन घोटाले में केवल दो लोग नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था।
सूत्र बताते हैं कि जांच के दायरे में अब अन्य राजस्व कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के नाम भी आ सकते हैं। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो संबंधित पटवारी के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसकी पूर्व पोस्टिंग व मामलों की भी दोबारा समीक्षा होगी।
इस मामले ने एक बार फिर राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार और राजनीतिक–प्रशासनिक संरक्षण के सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी ने साफ संकेत दिए हैं कि दोषी चाहे किसी भी पद पर क्यों न हो, उसे कानून के शिकंजे से बचने नहीं दिया जाएगा।
तहसीलदार विक्रम: विवादों का पुराना इतिहास
गिरफ्तार किए गए तहसीलदार विक्रम का नाम इससे पहले भी कई विवादित मामलों से जुड़ चुका है।
कालका में एक कथित गलत रजिस्ट्री को लेकर पहले से ही विजिलेंस जांच चल रही है।
पिंजौर में एक महिला को कागजों में मृत दिखाकर जमीन की रजिस्ट्री कराने के मामले में भी एफआईआर दर्ज है और जांच जारी है।
सेवा काल के दौरान तहसीलदार विक्रम की अम्बाला और पंचकूला जिलों की तहसीलों में सबसे ज्यादा पोस्टिंग रही, जिसे लेकर भी विभागीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी पर ट्राइसिटी (चंडीगढ़–पंचकूला–मोहाली) में कई करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति का मालिक होने के भी गंभीर आरोप हैं, जिनकी अब जांच एजेंसियां पड़ताल कर सकती हैं।
इन तमाम तथ्यों के सामने आने के बाद विजिलेंस जांच का दायरा और विस्तृत होने की संभावना जताई जा रही है।













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