May 23, 2026 10:55 pm

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नीट–जेईई से आगे भी एक दुनिया है— डॉ. विजय गर्ग

हर वर्ष लाखों विद्यार्थी नीट-यूजी और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपनी किशोरावस्था और युवावस्था का बड़ा हिस्सा लगा देते हैं। कोचिंग संस्थान, मॉक टेस्ट, रैंक और कट-ऑफ ही जीवन का केंद्र बन जाते हैं। सफलता मिलने पर जश्न होता है, और असफलता मिलने पर आत्मग्लानि। लेकिन एक अहम सवाल अक्सर अनसुना रह जाता है—क्या जीवन केवल नीट या जेईई तक ही सीमित है?

सच्चाई यह है कि ये परीक्षाएँ करियर के कुछ रास्ते खोलती हैं, पूरा भविष्य तय नहीं करतीं। भारत जैसे विशाल और विविध देश में प्रतिभा के अवसरों की कमी नहीं है, कमी है तो सही जानकारी और व्यापक दृष्टि की। विज्ञान, तकनीक और चिकित्सा के अलावा भी ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जहाँ रुचि, कौशल और निरंतर सीखने से एक सार्थक और सम्मानजनक जीवन बनाया जा सकता है।

आज के समय में बेसिक साइंस, डेटा साइंस, बायोटेक्नोलॉजी, पर्यावरण अध्ययन, डिज़ाइन, आर्किटेक्चर, कानून, अर्थशास्त्र, पब्लिक पॉलिसी, पत्रकारिता, शिक्षा, साइंस कम्युनिकेशन और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्र तेज़ी से उभर रहे हैं। कई बार ये क्षेत्र व्यक्ति की प्रकृति और रुचियों से अधिक मेल खाते हैं, जिससे काम बोझ नहीं बल्कि आनंद बन जाता है।

नीट या जेईई की तैयारी अपने आप में व्यर्थ नहीं है। यह अनुशासन, परिश्रम और धैर्य सिखाती है। समस्या तब पैदा होती है, जब परीक्षा के परिणाम को व्यक्ति के आत्म-मूल्य से जोड़ दिया जाता है। असफलता को अयोग्यता मान लेना सबसे बड़ा भ्रम है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि कई महान वैज्ञानिक, लेखक, शिक्षक और उद्यमी पारंपरिक अर्थों में “टॉपर” नहीं थे।

यहाँ माता-पिता और समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। बच्चों को एक ही फ्रेम में ढालने के बजाय उनकी रुचियों को समझना और विविध विकल्पों की जानकारी देना आवश्यक है। करियर एक मैराथन है, सौ मीटर की दौड़ नहीं। रास्ते बदलते हैं और लक्ष्य समय के साथ परिभाषित होते रहते हैं।

नीट–जेईई से आगे सोचने का अर्थ है—

रैंक से आगे सीखना,

डिग्री से आगे कौशल,

और तुलना से आगे आत्मविश्वास।

अंततः सफलता वही है, जहाँ व्यक्ति न केवल अच्छा कमा सके, बल्कि समाज में सार्थक योगदान दे सके और मानसिक रूप से संतुलित जीवन जी सके। परीक्षा एक पड़ाव है, मंज़िल नहीं। जीवन की किताब का यह सिर्फ़ एक अध्याय है—पूरी कहानी अभी बाकी है।

डॉ. विजय गर्ग

सेवानिवृत्त प्रिंसिपल, मलोट (पंजाब)

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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