सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन का विश्लेषण, विकास के बजाय रखरखाव पर केंद्रित बजट का आरोप
चंडीगढ़: सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने चंडीगढ़ के लिए केंद्रीय बजट 2026–27 का विस्तृत विश्लेषण जारी करते हुए इसे बजट 2024–25 के वास्तविक व्यय से तुलना की है। एसोसिएशन का कहना है कि इस अवधि में प्रशासनिक स्थिरता तो बनी रही, लेकिन चंडीगढ़ नगर निगम की वित्तीय स्थिति और भूमिका अब भी कमजोर और कम मान्यता प्राप्त बनी हुई है।
कुल बजट में गिरावट
विश्लेषण के अनुसार,
2024–25 (वास्तविक व्यय): ₹5,859 करोड़
2026–27 (बजट आवंटन): ₹5,720 करोड़
इस तरह कुल ₹139 करोड़ (लगभग 2.4%) की गिरावट दर्ज की गई है। एसोसिएशन का कहना है कि यह कटौती ऐसे समय में की गई है, जब महंगाई, जनसंख्या वृद्धि और शहरी सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि बजट विकासोन्मुख न होकर केवल रखरखाव तक सीमित है।
प्रशासनिक खर्च बढ़ा, सेवाओं को लाभ नहीं
2024–25 में प्रशासनिक व स्थापना व्यय: ₹3,413 करोड़
2026–27 में: ₹3,816 करोड़
एसोसिएशन के मुताबिक, प्रशासनिक खर्च में तेज वृद्धि के बावजूद नागरिक सेवाओं, आधारभूत संरचना और नगर निगम के सशक्तिकरण के लिए कोई ठोस बढ़ोतरी नहीं की गई। इसका सीधा असर शहरी शासन के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों पर पड़ा है।
नगर निगम की वित्तीय अनिश्चितता बरकरार
2026–27 के बजट में भी नगर निगम के लिए कोई अलग या स्पष्ट बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है।
नगर निगम की फंडिंग अब भी “Grantee / Other Bodies” हेड के अंतर्गत समाहित है—
2024–25: ₹916 करोड़
2026–27: ₹1,145 करोड़ (लगभग 25% की वृद्धि)
हालांकि, इस हेड में स्कूल, कॉलेज, एनजीओ और अन्य संस्थान भी शामिल हैं, जिससे नगर निगम को मिलने वाला वास्तविक हिस्सा अनिश्चित, विवेकाधीन और अपारदर्शी बना रहता है। अन्य राज्यों की तरह सूत्र-आधारित फाइनेंस कमीशन ट्रांसफर न होने से नगर निगम सालाना प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर है।
शहरी विकास और पूंजीगत व्यय पर असर
एसोसिएशन ने बताया कि Urban Development मद में भारी recoveries के कारण शुद्ध आवंटन नकारात्मक हो गया है। सड़क, ड्रेनेज, स्वच्छता, सार्वजनिक सुविधाएं और अन्य शहरी परियोजनाएं recoveries या बाद की मंजूरी (post-facto support) पर निर्भर हैं।
हालांकि कुल पूंजीगत व्यय 2026–27 में 2024–25 के समान है, लेकिन नगर निगम को सीधे कोई पूंजीगत फंडिंग नहीं मिली। नतीजतन, नगर निगम एक सशक्त शहरी संस्था के बजाय केवल कार्यान्वयन एजेंसी बनकर रह गया है।
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन का कहना है कि 2024–25 से 2026–27 के बीच प्रशासनिक स्थिरता तो रही, लेकिन नगर निगम को सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण अवसर खो दिया गया। शहरी जिम्मेदारियाँ बढ़ीं, पर उनके अनुरूप वित्तीय अधिकार और संसाधन नगर निगम को नहीं मिले। गोपनीय और गैर-वैधानिक बजट व्यवस्था से स्थायी और न्यायसंगत शहरी शासन संभव नहीं है।
सिफारिश / मांग
एसोसिएशन ने केंद्र सरकार और यूटी प्रशासन से मांग की है कि नगर निगम चंडीगढ़ के लिए अलग, पारदर्शी और सूत्र-आधारित अनुदान व्यवस्था लागू की जाए, साथ ही समर्पित पूंजीगत समर्थन सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि प्रभावी, जवाबदेह और टिकाऊ शहरी शासन के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।











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