नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए कहा कि सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क से जुड़े बजटीय प्रस्तावों का उद्देश्य शुल्क ढांचे को सरल बनाना, घरेलू विनिर्माण को समर्थन देना, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की विसंगतियों को दूर करना है।
सीमा शुल्क छूटों का युक्तिकरण
वित्त मंत्री ने बताया कि लंबे समय से जारी सीमा शुल्क छूटों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की प्रक्रिया जारी रहेगी। हालांकि, भारत में निर्मित वस्तुओं अथवा जिनका घरेलू उत्पादन नगण्य है, उन पर कुछ बुनियादी छूट देने का प्रस्ताव किया गया है। शुल्क निर्धारण को आसान बनाने के लिए कई प्रभावी दरों को सीधे सीमा शुल्क अनुसूची में शामिल करने का भी प्रावधान किया गया है।
निर्यात को बढ़ावा देने के प्रमुख प्रावधान
निर्यात को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से समुद्री खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण में प्रयुक्त विशिष्ट निविष्टियों के शुल्क-मुक्त आयात की सीमा को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर पिछले वर्ष के निर्यात कारोबार के एफओबी मूल्य का 3 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है।
इसके साथ ही जूतों के ऊपरी हिस्सों के निर्यात के लिए भी निर्दिष्ट निविष्टियों के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी जाएगी।
चमड़े एवं वस्त्र परिधानों, चमड़े या कृत्रिम जूते-चप्पलों तथा अन्य चमड़ा उत्पादों के निर्यातकों के लिए अंतिम उत्पाद के निर्यात की समय-सीमा को 6 महीने से बढ़ाकर 1 वर्ष कर दिया गया है।
ऊर्जा परिवर्तन और सुरक्षा पर विशेष जोर
बजट 2026-27 में ऊर्जा परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव किए गए हैं। बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में उपयोग होने वाली लिथियम-आयन सेल विनिर्माण से जुड़ी पूंजीगत वस्तुओं पर मूल सीमा शुल्क छूट का विस्तार किया गया है।
सौर ऊर्जा क्षेत्र में सोलर ग्लास निर्माण के लिए सोडियम एंटीमोनेट के आयात पर भी मूल सीमा शुल्क में छूट देने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा, नाभिकीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक वस्तुओं के आयात पर मौजूदा सीमा शुल्क छूट को वर्ष 2035 तक बढ़ाने और सभी नाभिकीय संयंत्रों पर लागू करने की घोषणा की गई है।
विमानन, रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को राहत
नागरिक, प्रशिक्षण और अन्य विमानों के निर्माण में प्रयुक्त घटकों एवं पुर्जों पर मूल सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी। रक्षा क्षेत्र में विमानों के अनुरक्षण, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) के लिए उपयोग होने वाले आयातित कच्चे माल को भी सीमा शुल्क से राहत देने का प्रस्ताव किया गया है।
उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में मूल्यवर्धन को मजबूत करने के लिए माइक्रोवेव ओवन के निर्माण में प्रयुक्त विशिष्ट पुर्जों पर भी सीमा शुल्क में छूट का प्रावधान किया गया है।
विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) को एक-बारगी राहत
वैश्विक व्यापार व्यवधानों के कारण विशेष आर्थिक क्षेत्रों में विनिर्माण इकाइयों की क्षमता उपयोग से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए, बजट में एक विशेष एक-बारगी उपाय प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत सेज़ में पात्र विनिर्माण इकाइयों को घरेलू शुल्क क्षेत्र (DTA) में रियायती दरों पर बिक्री की अनुमति दी जाएगी, जो उनके निर्यात के एक निर्धारित अनुपात तक सीमित होगी।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि डीटीए में कार्यरत इकाइयों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक नियामक संशोधन किए जाएंगे।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 के ये प्रस्ताव घरेलू उद्योग, निर्यात और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।











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