बजट 2026 के बाद पहली MPC बैठक, बाजार की उम्मीदों के अनुरूप फैसला
नई दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए बताया कि रेपो रेट फिलहाल 5.25 प्रतिशत पर ही बना रहेगा। यह केंद्रीय बजट 2026 के बाद आयोजित पहली एमपीसी बैठक थी, जिस पर बाजार और निवेशकों की खास नजर थी।
बाजार की उम्मीदों पर खरा उतरा RBI का फैसला
अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का पहले से ही अनुमान था कि इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। ऐसे में आरबीआई का यह फैसला पूरी तरह उम्मीदों के अनुरूप रहा। रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब है कि फिलहाल होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्जों की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। इससे कर्जदारों को न तो राहत मिली है और न ही अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।
दिसंबर 2025 में हुई थी आखिरी कटौती
गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी, जिसके बाद यह दर 5.25 प्रतिशत पर आ गई थी। उस समय इस फैसले को आर्थिक विकास को गति देने के लिहाज से अहम माना गया था। इसके बाद से केंद्रीय बैंक ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति अपनाए हुए है।
एक साल में 125 बेसिस पॉइंट की कुल राहत
पिछले एक साल में आरबीआई ने कुल मिलाकर 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। वर्ष 2025 के दौरान महंगाई नियंत्रण में रहने और आर्थिक विकास संतुलित होने के चलते केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों को नरम रखा था।
फरवरी की MPC बैठक क्यों थी अहम
फरवरी की यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। हाल ही में पेश हुए केंद्रीय बजट 2026 और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से अर्थव्यवस्था और महंगाई पर संभावित असर को लेकर निवेशक आरबीआई के रुख को समझना चाहते थे।
वैश्विक अनिश्चितता का भी असर
बड़े बैंकों और रिसर्च संस्थानों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और सरकारी बॉन्ड यील्ड के स्थिर रहने के कारण आरबीआई ने सतर्क रुख अपनाया है। केंद्रीय बैंक पिछली दर कटौतियों के असर का आकलन करना चाहता है।
आम लोगों पर क्या असर
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। जब यह घटती है तो लोन सस्ते होते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल अर्थव्यवस्था एक संतुलित या ‘गोल्डीलॉक्स स्थिति’ में है, जहां न ज्यादा तेजी है और न ही मंदी, इसलिए आरबीआई ने यथास्थिति बनाए रखना बेहतर समझा है।











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