प्रशासनिक निष्क्रियता, न्यायालयी आदेशों की अनदेखी और मनमाने विस्तार पर सवाल
चंडीगढ़: सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने चंडीगढ़ के भविष्य को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष आर. के. गर्ग ने कहा कि देश का सबसे सुव्यवस्थित और विरासत-आधारित शहर चंडीगढ़ आज अपने इतिहास के सबसे बड़े नियोजन संकट से गुजर रहा है। यह संकट न तो जनसंख्या दबाव का स्वाभाविक परिणाम है और न ही किसी अपरिहार्य आवश्यकता का, बल्कि यह प्रशासन की जानबूझकर की गई निष्क्रियता, चयनात्मक नीति-निर्माण और न्यायालयी आदेशों की अवहेलना का नतीजा है।
आर. के. गर्ग ने बताया कि लगभग तीन वर्ष पहले माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) का निपटारा करते हुए चंडीगढ़ के फेज़-1 में फ़्लोर एरिया रेशियो (FAR) को फ्रीज़ कर दिया था और संपत्तियों के शेयर-वाइज़ विभाजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। फेज़-1 की संवेदनशील और विरासतगत प्रकृति को देखते हुए यह मामला चंडीगढ़ हेरिटेज कंज़र्वेशन कमेटी (CHCC) को सौंपा गया था, ताकि शहर की मूल नियोजन अवधारणा सुरक्षित रह सके।
इसके बावजूद, बीते तीन वर्षों में प्रशासन की ओर से कोई ठोस, पारदर्शी या निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई। न तो CHCC के स्तर पर कोई प्रभावी प्रक्रिया आगे बढ़ी और न ही नीति-निर्माण को सर्वोच्च न्यायालय या पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ढाला गया। एसोसिएशन का आरोप है कि यह निष्क्रियता आकस्मिक नहीं, बल्कि सुनियोजित टालमटोल का हिस्सा है।
फेज़-1 में 20 लाख वर्ग फुट निर्माण प्रस्ताव पर आपत्ति
एसोसिएशन ने फेज़-1 में हाईकोर्ट के लिए लगभग 20 लाख वर्ग फुट अतिरिक्त निर्माण के प्रस्ताव को चौंकाने वाला बताया। आर. के. गर्ग के अनुसार, चंडीगढ़ के 75 वर्षों के नियोजित इतिहास में फेज़-1 के भीतर इतने बड़े पैमाने पर निर्माण का कोई उदाहरण नहीं है। यह प्रस्ताव न केवल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाए गए FAR फ्रीज़ की भावना के खिलाफ है, बल्कि चंडीगढ़ की विरासत-आधारित योजना पर सीधा हमला है।
उन्होंने यह भी कहा कि जहां फेज़-1 से जुड़े वैधानिक निर्णयों से बचा जा रहा है, वहीं औद्योगिक क्षेत्रों में FAR बढ़ाने के लिए समितियां गठित की जा रही हैं। यह चयनात्मक नीति-निर्माण और न्यायालयी निगरानी की सुविधाजनक व्याख्या को दर्शाता है।
सार्वजनिक भूमि और निजी बिल्डरों का मुद्दा
चिंता तब और बढ़ जाती है जब चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को मूल्यवान सार्वजनिक भूमि निजी बिल्डरों को बेचने की अनुमति देने वाले निर्णयों को मौन स्वीकृति दी जा रही है। पहले नगर निगम के ऐसे प्रयास कानूनी अड़चनों के कारण विफल हो चुके थे, लेकिन अब वही बाधाएं कैसे और क्यों हट गईं, यह एक बड़ा सवाल है।
बजट में कटौती पर भी सवाल
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने चंडीगढ़ के मौजूदा बजट पर भी सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन के अनुसार, इस वर्ष के बजट में महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए आवंटन को 35.94 करोड़ रुपये से घटाकर 33.57 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं, दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए बजट में मात्र 1.65 करोड़ रुपये की मामूली बढ़ोतरी करते हुए इसे 19.76 करोड़ से 21.41 करोड़ रुपये किया गया है।
आर. के. गर्ग ने कहा कि ऐसे में यह समझ से परे है कि कमजोर वर्गों का वास्तविक कल्याण कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।
अंतिम सवाल
एसोसिएशन ने प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो चंडीगढ़ अपनी पहचान एक नियोजित विरासत शहर के रूप में खो देगा और एक अव्यवस्थित शहरी प्रयोग बनकर रह जाएगा।
उन्होंने सवाल उठाया—क्या चंडीगढ़ का भविष्य ऐसे लोगों के हाथों में सौंपा जा रहा है, जिनका इस शहर की दीर्घकालिक विरासत और पहचान से कोई सरोकार नहीं है?











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