गलत नीतिगत फैसलों, ऑनलाइन ट्रांसफर नीति और करनाल घटना को लेकर कर्मचारियों में रोष
पंचकूला | 10 फरवरी 2026। हैफ़ेड (हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन संघ) को बीते वर्षों में हुए करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान को लेकर अब मामला तूल पकड़ता जा रहा है। हैफ़ेड एम्प्लॉइज यूनियन ने प्रबंधन द्वारा लिए गए कई गलत, अव्यावहारिक और संदिग्ध निर्णयों पर गंभीर सवाल उठाते हुए इनकी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। यूनियन का आरोप है कि इन फैसलों से संस्था को भारी नुकसान हुआ है, जबकि लाभ कुछ विशेष हितों को पहुंचा।
यूनियन ने कहा कि इन मामलों की किसी स्वतंत्र एजेंसी या संस्था से उच्चस्तरीय ऑडिट/जांच करवाई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई, वित्तीय रिकवरी और जवाबदेही तय की जाए।
इन फैसलों पर उठे सवाल
यूनियन के अनुसार जिन प्रमुख मुद्दों पर जांच आवश्यक है, उनमें शामिल हैं—
बासमती निर्यात से जुड़े ऐसे निर्णय, जिनसे हैफ़ेड को भारी आर्थिक नुकसान हुआ
सरसों खरीद सीजन समाप्त होने के बाद अत्यधिक ऊंचे रेट पर खरीद
निजी कंपनियों को स्टॉक संबंधी कार्य सामान्य दरों से लगभग दोगुने रेट पर आवंटित करना
हैफ़ेड बाजार (HAFED Bazar) से जुड़े निर्णय, जिनसे अपेक्षित लाभ की जगह नुकसान
एक बार इस्तेमाल किया गया बारदाना (Once Used Bardana) महंगे दामों पर खरीदना
वर्षों से 174 मीट्रिक टन प्रति स्टैक के अनुसार कैपेसिटी री-असेसमेंट न करवाना, जिससे स्टोरेज चार्ज में बड़ा नुकसान
सरकार, एफसीआई और कॉनफेड से वर्षों से लंबित बकाया राशि की प्रभावी रिकवरी न होना
बकाया राशि न मिलने से हर माह करोड़ों रुपये के ब्याज का नुकसान, जिसकी जिम्मेदारी तय न होना
दोहरा मापदंड लगाने का आरोप
यूनियन ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की छोटी-सी गलती पर तुरंत चार्जशीट और कार्रवाई की जाती है, लेकिन इतने बड़े आर्थिक नुकसान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को उसी कसौटी पर नहीं परखा जाता।
ऑनलाइन ट्रांसफर नीति पर कड़ा विरोध
प्रस्तावित ऑनलाइन ट्रांसफर नीति को यूनियन ने पूरी तरह अव्यावहारिक बताया। यूनियन का कहना है कि यह नीति हैफ़ेड जैसे फील्ड-आधारित व्यावसायिक संगठन के लिए घातक साबित होगी और इससे कार्य-व्यवस्था, स्टॉक प्रबंधन, वित्तीय नियंत्रण के साथ-साथ कर्मचारियों के पारिवारिक जीवन पर भी गंभीर असर पड़ेगा।

करनाल घटना की निंदा
यूनियन ने करनाल में धान खरीद के दौरान हैफ़ेड के दो कर्मचारियों के साथ हुई कथित पुलिस बर्बरता की कड़े शब्दों में निंदा की। यूनियन के अनुसार कर्मचारी धान नीति और सिस्टम की खामियों का शिकार बने हैं, जबकि बिना मूलभूत सुधार के लागू नीतियां कर्मचारियों को मानसिक, कानूनी और शारीरिक जोखिम में डाल रही हैं।
हड़ताल की चेतावनी
हैफ़ेड एम्प्लॉइज यूनियन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि हैफ़ेड को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना, सार्वजनिक धन की रक्षा करना और कर्मचारियों की सुरक्षा व सम्मान सुनिश्चित करना है।
यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते
ऑनलाइन ट्रांसफर नीति पर रोक,
लंबित वास्तविक मांगों का समाधान,
और हैफ़ेड को हुए करोड़ों रुपये के नुकसान की स्वतंत्र जांच
पर ठोस निर्णय नहीं लिए गए, तो संघ 20 फरवरी 2026 से लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।











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