April 6, 2026 3:17 am

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चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में स्टाफ संकट गहराया, मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन ने जताई चिंता

समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय बोले—जल्द भर्ती नहीं हुई तो ठप हो सकती हैं स्वास्थ्य सेवाएं
चंडीगढ़, 15 फरवरी 2026। चंडीगढ़ के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी के चलते स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल स्थायी भर्तियां करने की मांग की है। उन्होंने हालिया ऑडिट रिपोर्ट (दिसंबर 2025–फरवरी 2026) के आंकड़ों को चिंताजनक करार देते हुए कहा कि यदि रिक्त पदों को शीघ्र नहीं भरा गया, तो शहर की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा सकती हैं।

आंकड़ों में बदहाली, मरीज बेहाल
राजबीर सिंह भारतीय ने ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि GMSH-16 में मेडिकल ऑफिसरों के करीब 34% पद खाली हैं। कुल 721 स्वीकृत पदों में से केवल 476 पर ही तैनाती है।
उन्होंने कहा कि रेडियोलॉजी विभाग में तकनीशियनों की भारी कमी के कारण अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जांच के लिए मरीजों को हफ्तों इंतजार करना पड़ रहा है।

मनीमाजरा व सेक्टर-22 में विशेषज्ञों की कमी
मनीमाजरा और सेक्टर-22 के सिविल अस्पतालों में स्त्री रोग (गायनी) और एनेस्थीसिया जैसे महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं और आपातकालीन मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर ग्रहण’
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि सेक्टर-16, मनीमाजरा और सेक्टर-22 के अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब और बुजुर्ग मरीज निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं, जहां उन्हें आर्थिक शोषण झेलना पड़ता है।

पड़ोसी राज्यों का बढ़ता बोझ
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ सिर्फ स्थानीय निवासियों ही नहीं, बल्कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के मरीजों के लिए भी एक बड़ा भरोसेमंद केंद्र है।
“पिछले 2–3 वर्षों में मरीजों की संख्या में 35% की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके अनुपात में स्टाफ बढ़ने के बजाय घटा है। इससे पड़ोसी राज्यों से आने वाले मरीजों का भरोसा भी टूट रहा है,।

प्रशासन से प्रमुख मांगें
मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रशासन से निम्न मांगें रखीं—
स्थायी भर्ती: आउटसोर्सिंग या डेपुटेशन के बजाय नियमित पदों पर तुरंत नियुक्तियां।
अंतरिम व्यवस्था: जुलाई 2026 तक भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक वॉक-इन इंटरव्यू और संविदा नियुक्तियों में तेजी।
बुनियादी ढांचा मजबूत हो: रेडियोलॉजी, फार्मेसी और सपोर्टिंग स्टाफ के खाली पद प्राथमिकता से भरे जाएं, ताकि दवा वितरण और जांच की लंबी कतारें कम हों।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा, “कागजों पर बजट और वेतन बढ़ रहा है, लेकिन धरातल पर डॉक्टर और स्टाफ नदारद हैं। फार्मेसी की खिड़कियों पर लंबी लाइनें और अल्ट्रासाउंड के लिए महीनों की वेटिंग बुजुर्गों और गरीबों के साथ अन्याय है।”

चेतावनी
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आने वाले कुछ हफ्तों में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो एसोसिएशन जनहित में आंदोलन तेज करेगी और प्रशासन के आला अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेगी।
“चंडीगढ़ का ‘मेडिकल हब’ का दर्जा बचाने के लिए अब तत्काल फैसले जरूरी हैं,।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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