पलवल (हरियाणा): हरियाणा के पलवल जिले के छायंसा गांव में कथित तौर पर दूषित पेयजल से फैली बीमारी ने भयावह रूप ले लिया है। महज़ 15 दिनों के भीतर 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 6 मासूम बच्चे शामिल हैं। इस मामले को लेकर राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
“नल में ज़हर, सत्ता बेअसर”
सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में सुरजेवाला ने कहा—
“नल में ज़हर, सत्ता बेअसर; पानी में कहर, सरकार बेख़बर! अमृत का दावा, हकीकत में ज़हर का असर!”
उन्होंने इसे ‘अमृत काल’ नहीं, बल्कि ‘मृत्यु जाल’ करार दिया।
जांच के आंकड़े चौंकाने वाले
स्वास्थ्य व जलापूर्ति से जुड़ी शुरुआती जांच में सामने आया कि:
107 पानी के सैंपल लिए गए, जिनमें 23 फेल पाए गए।
कई नमूनों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिला, जो मल-मूत्र से दूषण का संकेत है।
क्लोरीनेशन नहीं हुआ, बिना शुद्धिकरण के पानी घरों तक पहुंचा।
स्वास्थ्य संकट की तस्वीर
1,500 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग
800+ ओपीडी जांच
210 ब्लड सैंपल
हेपेटाइटिस B और C के मामले सामने आए
ग्रामीण बुखार, पीलिया, उल्टी और पेट दर्द से जूझते रहे, जबकि प्रशासन पर निष्क्रियता के आरोप लगे।
जिम्मेदारी किसकी?
सुरजेवाला ने सवाल उठाया—
अगर पानी ही ज़हर बन जाए तो जीवन कैसे बचेगा?
क्या गरीबों और किसानों की बस्तियों में रहने वालों की जान सस्ती है?
12 घरों के चिराग किसकी लापरवाही से बुझ गए?
मांगें तेज
हरियाणा की जनता और विपक्ष ने मांग की है:
तुरंत साफ पानी की आपूर्ति
जिम्मेदार अधिकारियों पर FIR
दोषियों को कड़ी सज़ा
यह सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि बदइंतज़ामी की पराकाष्ठा है—एक जल-जनित जनसंहार। अब सवाल यही है: पानी गंदा क्यों था, व्यवस्था अंधी क्यों थी और सत्ता चुप क्यों है?











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