September 21, 2026 6:39 am

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हरियाणा ग्राम सामूहिक भूमि कानून में संशोधन पर हाईकोर्ट की रोक जैसी टिप्पणी, स्वामित्व परिवर्तन रहेगा याचिका के अंतिम फैसले के अधीन

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा हरियाणा ग्राम सामूहिक भूमि अधिनियम में किए गए हालिया संशोधन को लेकर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सरकार ने अधिसूचना संख्या LG 26 of 2024 दिनांक 12.12.2024 के माध्यम से अधिनियम में संशोधन किया था, जिसके तहत कुछ परिस्थितियों में शामलात देह भूमि को काश्तकारों/पट्टेदारों के नाम पर बेचने अथवा उन्हें मालिक घोषित करने का प्रावधान किया गया।

क्या है संशोधन का मुख्य प्रावधान
संशोधन के अनुसार, यदि:
शामलात देह भूमि को 1964 के पंजाब ग्राम सामूहिक भूमि नियमों के लागू होने से पहले,
हरियाणा यूटिलाइजेशन ऑफ लैंड एक्ट के तहत कलेक्टर द्वारा 20 वर्षों के लिए पट्टे पर दिया गया हो,
और वह भूमि मूल पट्टेदार/हस्तांतरित व्यक्ति/उसके कानूनी वारिसों के निरंतर कब्जे व खेती में रही हो, जैसा कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है,
तो ऐसे मामलों में कलेक्टर को अधिकार दिया गया कि वह कलेक्टर रेट जमा करवाने के बाद उक्त भूमि को बेच सके या संबंधित व्यक्ति को उसका मालिक घोषित कर सके।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उठा विवाद
इस संशोधन के बाद मामला तब उलझ गया जब Supreme Court of India ने State of Haryana बनाम Jai Singh मामले में यह फैसला दिया कि ऐसी भूमि गांव के मूल मालिकों (प्रोप्राइटर) को ही वापस जाएगी। इस निर्णय के चलते संशोधित अधिसूचना की वैधता और उस पर किए जा रहे स्वामित्व परिवर्तनों पर सवाल खड़े हो गए।
गांव कलसा के प्रोप्राइटरों ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
सुप्रीम कोर्ट के उपरोक्त फैसले के आधार पर गांव कलसा के प्रोप्राइटरों से संबंधित भूमि को लेकर अधिसूचना LG 26 of 2024 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई।
यह याचिका CWP/2976/2026 — Balraj and others बनाम State of Haryana and others के रूप में दायर की गई है।
याचिका एडवोकेट राजेंद्र कुमार द्वारा दायर की गई, जबकि मामले की पैरवी सीनियर एडवोकेट अमन पाल ने की।

हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान Punjab and Haryana High Court ने:
हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया,
और यह स्पष्ट किया कि इस अधिसूचना के तहत यदि किसी भी प्रकार का स्वामित्व परिवर्तन किया गया है, तो वह इस रिट याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन माना जाएगा।

क्या होगा असर
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद:
संशोधित अधिसूचना के तहत किए गए मालिकाना हक के दावे फिलहाल अनिश्चित हो गए हैं,
कलेक्टर स्तर पर हो रही बिक्री या स्वामित्व घोषणा कानूनी जोखिम में आ गई है,
और हजारों एकड़ शामलात देह भूमि से जुड़े मामलों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि सरकार का संशोधन प्रभावी रहेगा या सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप शामलात भूमि गांव के मूल प्रोप्राइटरों को ही वापस जाएगी।

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बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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