August 28, 2026 10:12 am

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पंजाब विश्वविद्यालय में जे.सी. आनंद स्मृति व्याख्यान ‘राग दरबारी’ पश्चिमी प्रशासनिक सिद्धांतों से अधिक यथार्थपरक — प्रो. सत्यजीत सिंह

चंडीगढ़ | 18 फरवरी, 2026। पंजाब विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित वार्षिक जे.सी. आनंद स्मृति व्याख्यान में साहित्य और राजनीति के अंतर्संबंधों पर गहन विमर्श हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा (यूएसए) से आए प्रो. सत्यजीत सिंह रहे।
“राजनीति एक कल्पना के रूप में, कल्पना एक वास्तविकता के रूप में” विषय पर बोलते हुए प्रो. सिंह ने हिंदी साहित्य के कालजयी रचनाकार श्रीलाल शुक्ल के प्रसिद्ध उपन्यास राग दरबारी का विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासन और राजनीति के विद्यार्थी इस कृति को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह ग्रामीण भारत की जमीनी राजनीति, सत्ता-संबंधों और प्रशासनिक जटिलताओं को अत्यंत यथार्थवादी ढंग से सामने रखती है।

पश्चिमी मॉडलों को दी चुनौती
प्रो. सिंह के अनुसार मैक्स वेबर और वुडरो विल्सन जैसे विचारकों के पश्चिमी प्रशासनिक सिद्धांत भारत की विकेंद्रीकृत व स्थानीय शासन संरचना को समझने में कई बार अपर्याप्त साबित होते हैं। उन्होंने कहा कि ‘राग दरबारी’ में वर्णित काल्पनिक गांव शिवपालगंज आज भी भारतीय शासन व्यवस्था का जीवंत प्रतिबिंब लगता है, जहां स्थानीय अभिनेताओं और जमीनी स्तर के अधिकारियों की भूमिका निर्णायक होती है।

संस्थागत सुधारों पर जोर
व्याख्यान के दौरान प्रो. सिंह ने प्रसिद्ध मानवविज्ञानी अखिल गुप्ता का उल्लेख करते हुए उपन्यास को “क्वासी-एथनोग्राफिक” (अर्ध-नृवंशविज्ञानात्मक) बताया। उन्होंने कहा कि यद्यपि उपन्यास का स्वर व्यंग्यात्मक और कहीं-कहीं निराशावादी है, फिर भी यह स्थानीय शासन को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देता है। प्रो. सिंह ने “एलीट कैप्चर” को रोकने के लिए राज्य की क्षमताओं और संस्थागत सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. आशुतोष कुमार ने की। विश्वविद्यालय की डीन ऑफ यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शंस (डीयूआई) प्रो. योजना रावत सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। विभागाध्यक्ष प्रो. पम्पा मुखर्जी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए मुख्य वक्ता का परिचय कराया।
कार्यक्रम में प्रो. जे.सी. आनंद के परिजन, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, संकाय सदस्य तथा बड़ी संख्या में शोधार्थी और छात्र उपस्थित रहे।

 

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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