एआई फेस्ट-2026’ में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने लॉन्च किया ‘डिजिटल मार्केटिंग में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’, छात्रों को मिलेगा ‘अर्न व्हाइल लर्न’ का अवसर
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी पंजाब को नेशनल स्टार्टअप इकोसिस्टम में नंबर 1 बनाने के लिए प्रतिबद्ध, सैंडबॉक्स रेजिडेंशियल प्रोग्राम के तहत अगले 5 सालों में 150 स्टार्टअप को करेगा प्रशिक्षित तथा इनक्यूबेट:सतनाम सिंह संधू, राज्यसभा सांसद एवं चांसलर
भारत का नेशनल क्वांटम मिशन कई गुना बढ़ाएगा देश के विकास की रफ़्तार: डॉ. अर्चना शर्मा, सीईआरएन में इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन रिलेशन्स हेड और प्रिंसिपल साइंटिस्ट
एआई युग में निरंतर सीखते रहने की इच्छा सबसे ज़रूरी: विष्णु गोगुला, प्रिंसिपल पीएम मैनेजर, माइक्रोसॉफ्ट
रोबोटिक सर्जरी में एआई के साथ मानवीय स्पर्श देते है सटीक नतीजे: डॉ. भानु प्रताप सिंह सलूजा,डायरेक्टर, रोबोटिक आर्थ्रोप्लास्टी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के डायरेक्टर
‘एआई वैल्यू बढ़ा सकता है लेकिन इंसानी सोच की जगह नहीं ले सकता; टूल्स बदल गए हैं लेकिन फ़ॉर्मूला नहीं’: गणेशप्रसाद, फ़ाउंडर, थिंक स्कूल
एआई काम की गति और गुणवत्ता बढ़ा सकता है लेकिन इंसान की जगह कभी नहीं ले सकता’: हिमीश मदान, बिज़नेस ओनर, हिमीश मदान ट्रेनिंग सॉल्यूशंस
चंडीगढ़। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में शुरू हुए भारत के पहले तीन दिवसीय एआई फेस्ट– 2026 के दूसरे दिन 90 दिन का ‘सैंडबॉक्स रेजिडेंशियल प्रोग्राम’ लॉन्च किया गया। इसके तहत, अपने आईडिया पिच करने वाले 300 स्टार्टअप्स में से टॉप 30 को चयनित किया जायेगा। यह फेस्ट नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अनुरूप यूनिवर्सिटी कैंपस में आयोजित किया गया है। इस रेजिडेंशियल प्रोग्राम’ के तहत एक ही प्लेटफॉर्म पर मेंटरशिप और रिसोर्स दिए जाएंगे ताकि एआई, डीपटेक और मीडिया में उनके गो-टू-मार्केट (GTM) की स्टेज को तेज़ करने में मदद मिल सके। अपने इनोवेशन नेटवर्क को अधिक मज़बूत करते हुए, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने डिजिटल मार्केटिंग में एक सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस भी लॉन्च किया है जो “अर्न व्हाइल लर्न” मॉडल पर काम करता है। यह सेंटर छात्रों को लाइव इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स और कंसल्टेंसी असाइनमेंट पर काम करने के साथ ही एआई-पावर्ड डिजिटल टूल्स का हैंड्स-ऑन एक्सपीरियंस भी देगा। इसका उद्देश्य एंटरप्राइज़-लेड लर्निंग, इनोवेशन और डिजिटल एक्सीलेंस के लिए एक मल्टीडिसिप्लिनरी ग्लोबल हब बनना है।
सैंडबॉक्स के पोर्टल को चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के मैनेजिंग डायरेक्टर जय इंदर सिंह संधू ने आज एआई फेस्ट के दूसरे दिन हिमेश मदान, बिज़नेस ओनर हिम-ईश मदान ट्रेनिंग सॉल्यूशंस, गणेशप्रसाद एस को-फाउंडर और सीओओ थिंक स्कूल,नीरज वालिया टेक्निकल लीड एवं कंटेंट क्रिएटर Yellow.ai, फ्यूचर और एआई के फाउंडर निवेदन राठी, CERN, जिनेवा, स्विट्जरलैंड की सीनियर साइंटिस्ट डॉ. अर्चना गौर शर्मा , फर्स्ट एआई कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के को-फाउंडर और चीफ क्रिएटिव ऑफिसर मनेश स्वामी, डॉ. भानु प्रताप सिंह सलूजा डायरेक्टर रोबोटिक आर्थ्रोप्लास्टी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, नॉर्थ-पार्क ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ग्रुप सीईओ आशीष चड्ढा, एम. विजयलक्ष्मी एड. सीईओ सुपर स्पेशियलिटी पार्क हॉस्पिटल्स अमित सिंघल जनरल पार्टनर इंडिकॉर्न एंजल्स, फ्लूइड वेंचर्स और रियलटाइम (RTAF), जिमिश कपाड़िया को-फाउंडर ग्रोथ सेंस/ग्रोथ91, अनुपम जोशी डायरेक्टर, हेड गुजरात सोशल एंटरप्राइज फंड, पुलकित मेहरोत्रा वाइस प्रेसिडेंट यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स, तरनजीत सिंह फाउंडर और सीईओ सर्ज एआई , संजीब बिस्वास पार्टनर ग्रुप इंजीनियरिंग मैनेजर माइक्रोसॉफ्ट, माइक्रोसॉफ्ट से विष्णु गोगुला,अभिषेक अग्रवाल प्रिंसिपल इंजीनियरिंग मैनेजर माइक्रोसॉफ्ट, राहुल मित्तल प्रिंसिपल प्रोडक्ट मैनेजर माइक्रोसॉफ्ट, भार्गव मुथुर रामचंद्रन को-फाउंडर इंटेलिकार, आयुष जैन प्रिंसिपल – इन्वेस्टमेंट्स और फाइनेंस मल्टीप्लाई वेंचर्स, डॉ. सुमन ज्योति डेका को-फाउंडर और सीईओ , समीर शेख को-फाउंडर फंडएनेबल, डॉ. मनीष कुमार लीला फाउंडिंग डायरेक्टर कम्पोजिटेक ग्रीनसोल प्राइवेट लिमिटेड, अनुज अग्रवाल ओनर कोलिज़ीयमटैलेंट्स तथा राघव शर्मा मैनेजर थिंक स्कूल की उपस्थिति में किया।
अपने संबोधन में, राज्यसभा सांसद और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू ने कहा, “वर्तमान में पंजाब में 2000 स्टार्टअप हैं, जो पंजाब को भारत के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल करते है। वर्तमान में पंजाब में 24 एआई स्टार्टअप हैं। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के कैंपस टैंक और सैंडबॉक्स पहल का उद्देश्य पंजाब को स्टार्टअप में नंबर एक बनाना है। सैंडबॉक्स रेजिडेंशियल प्रोग्राम के शुभारंभ से उभरते स्टार्टअप को पंजाब में प्रशिक्षण, सर्टिफिकेशन और सहायता प्राप्त करने में मदद मिलेगी। सैंडबॉक्स रेजिडेंशियल प्रोग्राम के तहत अगले पांच वर्षों में 150 से अधिक स्टार्टअप को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। साथ ही, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने अपना स्वयं का एआई मिशन शुरू किया है और इसके तहत 1.5 लाख युवाओं को इसके एआई एथिक प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा।
सैंडबॉक्स के लॉन्च पर, जय इंदर सिंह संधू ने कहा, “पारंपरिक प्रोग्राम के विपरीत, सैंडबॉक्स रेजिडेंशियल प्रोग्राम ‘कमिटमेंट से नतीजे मिलते हैं’ के सिद्धांत पर काम करेगा। को-फाउंडर्स और पूरी टीम को फिजिकली मौजूद रहने और अपने वेंचर के लिए पूरी तरह से समर्पित होने की ज़रूरत होने के कारण, सैंडबॉक्स फाउंडर्स को जगह प्रदान कर रहा है। इस रेजिडेंशियल प्रोग्राम के तहत जो 90-दिन का रेजिडेंशियल माहौल देगा, ताकि 12-18 महीने के सीड-टू-सीरीज़ सफ़र को तीन मुख्य तरीकों एआई , एजेंटिक एआई और खास माइक्रो सेक्टर के ज़रिए तेज़ी से आगे बढ़ाया जा सके।
उन्होंने आगे कहा, “एक बदलाव लाने वाली कोहोर्ट-बिल्डिंग पहल के तौर पर, सैंडबॉक्स रेजीडेंसी प्रोग्राम का मकसद नए स्टार्टअप्स को आइडिया स्टेज से मार्केट के लिए तैयार एंटरप्राइज तक पहचानना, मेंटर करना और बढ़ाना है। आज SANDBOX पोर्टल के लॉन्च के साथ ही प्रोग्राम के लिए आवेदन करने के लिए 45 दिनों तक रजिस्ट्रेशन के लिए खुला रहेगा, जिससे देश भर के स्टार्टअप्स अप्लाई कर सकेंगे। यह रेजीडेंशल प्रोग्राम एक्सपर्ट मेंटरिंग, स्ट्रक्चर्ड हैंडहोल्डिंग, सीड फंडिंग की सुविधा, वेबसाइट डेवलपमेंट में मदद और नेशनल स्टार्टअप पहल के तहत आर्थिक मदद पाने के लिए गाइडेंस समेत पूरा इनक्यूबेशन सपोर्ट देगा।”
एआई फेस्ट-2026, जिसे एआई ड्रिवन एंटरप्रेन्योरशिप को तेज़ करने के लिए एक प्रीमियर नेशनल प्लेटफॉर्म के तौर पर सोचा गया है, जिसमें तीन फ्लैगशिप इनिशिएटिव-इन्नोवफेस्ट 2026, कैंपस टैंक और सैंडबॉक्स शामिल हैं, जो आइडिएशन, इनक्यूबेशन और कमर्शियलाइज़ेशन को एकीकृत करते हैं।
यह फेस्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती टेक्नोलॉजी से जुड़े 35 से ज़्यादा कॉम्पिटिशन करवाए जा रहे है, जिसमें भारत और विदेशों से 1,000 से ज़्यादा टीमें हिस्सा ले रही हैं। 200 से ज़्यादा यूनिवर्सिटियों और कॉलेजों के 10,000 से ज़्यादा छात्र इसमें शामिल हो रहे हैं, जिससे यह देश के सबसे बड़े शैक्षणिक एआई समूहों में से एक बन गया है। 1 करोड़ रुपये से ज़्यादा के प्राइज़ पूल के साथ, विजेता टीमों को नकद पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।इसके अलावा, प्रतिभागियों को एसएएस (SAS) इंस्टीट्यूट से वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेशन भी मिलेंगे, जिसमें 1 करोड़ रुपये से ज़्यादा के सर्टिफ़िकेशन लाभ शामिल हैं।
एआई फेस्ट के दूसरे दिन “एआई इंजीनियर्ड रियलिटी” पर एक पैनल डिस्कशन में हिस्सा लेते हुए,राष्ट्रपति द्वारा प्रवासी भारतीय सम्मान 2023 से सम्मानित, सीईआरएन (CERN) में हेड–रिलेशंस इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशंस और प्रिंसिपल साइंटिस्ट ने कहा, “AI एक कैटालिस्ट है जो हमारी प्रगति की गति को तेज़ कर रहा है। हम सुबह के अलार्म से लेकर गूगल ड्राइव तक, अपनी मंज़िल पर पहुँचाने तक और फिर अपनी प्रोडक्टिविटी का पूरा इस्तेमाल करने तक हम हर दिन एआई का उपयोग कर रहे हैं। भारत में सहयोगात्मक विज्ञान की अपार संभावनाएं हैं। नेशनल क्वांटम मिशन देश की प्रगति की रफ्तार को कई गुना बढ़ाएगा। प्लस क्वांटम जटिल गणनाएं मिनटों में कर देंगे, जिनमें पहले महीनों या वर्ष लगते थे। अमेरिका के GDP का लगभग 30% भारत से जुड़ा है और वैश्विक कंपनियों के कई शीर्ष सीईओ भारत से हैं।”
रोबोटिक आर्थ्रोप्लास्टी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के डायरेक्टर डॉ. भानु प्रताप सिंह सलूजा ने कहा, “मानवीय स्पर्श हमेशा जरूरी रहेगा, क्योंकि रोबोट से सर्जरी करवाने के लिए भी, सर्जन ही तय करता है कि रोबोट में दिया गया खास एल्गोरिदम सही है या नहीं, क्योंकि अगर वे एल्गोरिदम ठीक से नहीं दिए गए तो सर्जरी ठीक नहीं होगी। आखिरकार रोबोट उन्हीं कमांड्स का पालन करता है जो हम उसमें डालते हैं। इसलिए सर्जन का मैन्युअल रूप से बेहद अनुभवी होना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा, “रोबोटिक सर्जरी नतीजों में सटीकता, एक्यूरेसी और निपुणता के मामले में बहुत अच्छी है क्योंकि इससे खून का बहाव कम होता है, सॉफ्ट टिशू में कम से कम चोट लगती है, तथा सबसे ज़्यादा बेहतर नतीजे मिलते है। ये सभी रोबोटिक सर्जरी के अच्छे फीचर्स हैं। लेकिन मरीज को समझने और बेहतर परिणाम के लिए सर्जन का मानवीय स्पर्श जरूरी है। जब एआई इंटेलिजेंस के साथ इंसानी स्पर्श जुड़ जाता है, तो यह सटीक नतीजे देता है। मरीज़ की संतुष्टि उच्च स्तर पर पहुँच जाती है।”
माइक्रोसॉफ्ट के प्रिंसिपल PM मैनेजर विष्णु गोगुला ने कहा, “आजकल एकमात्र टिकाऊ स्किल है सीखते रहने की इच्छा। औद्योगिक युग, कंप्यूटर या इंटरनेट किसी भी तकनीकी क्रांति ने इंसानों को अप्रासंगिक नहीं बनाया, बल्कि हमें विकसित होने के लिए प्रेरित किया। “सवाल यह नहीं है कि एआई इंसानों की जगह लेगा या नहीं। बल्कि यह है कि हम आगे बढ़ते हैं या नहीं। अगर आप आज मेडिसिन, इंजीनियरिंग या किसी भी फील्ड में स्टूडेंट हैं तो अपडेटेड रहें। जब तक आप खुद को बदलते रहेंगे, आप काम के बने रहेंगे। एआई इंसानों के महत्व को कम नहीं बल्कि एग्ज़िक्यूशन से ऑर्केस्ट्रेशन और गवर्नेंस की ओर ऊपर ले जाता है। एजेंटिक प्रोडक्ट्स पर उन्होंने कहा, “जीपीयू की कमी और धीमी चिप मैन्युफैक्चरिंग बड़ी रुकावटें बनी हुई हैं, साथ ही कूलिंग और एनर्जी में भी चुनौतियां हैं। लेकिन हमेशा की तरह, इंसानी सूझबूझ इन मुश्किलों को दूर कर देगी।”
थिंक स्कूल के फाउंडर गणेशप्रसाद ने कहा, “अगर मैं आज एआई के ज़माने में शुरू कर रहा होता, तो मैं फंडामेंटल्स नहीं बदलता। टूल्स सिर्फ़ गूगल से बढ़कर जेमिनी और मिडजर्नी जैसे प्लेटफॉर्म्स तक आ गए हैं, लेकिन मूल्य बिज़नेस बनाती हैं, टूल्स नहीं। एआई वैल्यू बढ़ा सकता है, लेकिन सोच की जगह नहीं ले सकता। टूल्स बदल गए हैं लेकिन फ़ॉर्मूला नहीं बदला है, सीखें, काम करें, फेल हों, इम्प्रूव करें। सिर्फ़ हर जगह एआई जोड़ने से इनोवेशन नहीं होता। तीन कोर स्किल्स हैं जिन्हें एआई रिप्लेस नहीं कर सकता, कम्युनिकेशन, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और पीपल मैनेजमेंट। अगर आप अपने विचार साफ़-साफ़ नहीं बता सकते, तो आप AI को लीड नहीं कर सकते, बेच नहीं सकते या ठीक से इस्तेमाल भी नहीं कर सकते। कॉलेज सफल होने का प्लेटफ़ॉर्म नहीं है, यह सुरक्षित रूप से फेल होने का प्लेटफ़ॉर्म है। कुछ बनाएं, कुछ बेचें, इवेंट्स ऑर्गनाइज़ करें। बार-बार कोशिश करें। तेज़ी से सीखने के लिए अक्सर फेल हों।”
हिमीश मदान ट्रेनिंग सॉल्यूशंस के बिज़नेस ओनर हिमेश मदान ने कहा, “एआई काम की गति को तेज़ कर सकता है, लेकिन यह इंसानी समझ की जगह नहीं ले सकता। आप टूल्स इस्तेमाल कर सकते हैं, आप महीने में 30 रील, पॉडकास्ट, लंबे वीडियो बना सकते हैं, लेकिन अगर आप असली चुनौत्ती को हल नहीं कर रहे हैं या असली भावनाएं नहीं दिखा रहे हैं, तो आप एक वफादार समुदाय नहीं बना पाएंगे। टैक्टिक्स से व्यूज़ खरीदे जा सकते हैं लेकिन भरोसा नहीं। जब फाउंडर्स और हाई परफॉर्मर्स की बात आती है, तो एक बात सर्वमान्य है कि वे ज़्यादा सोचते नहीं हैं। वे केवल सोचते हैं और काम करते हैं।”










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