वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और देश की न्यायपालिका के बीच टकराव अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स द्वारा उनके शुरुआती टैरिफ आदेशों को ‘अवैध’ करार दिए जाने के कुछ ही दिनों बाद ट्रंप प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए 24 फरवरी 2026 से दुनिया के सभी देशों से होने वाले आयात पर 10 प्रतिशत का नया ‘ग्लोबल टैरिफ’ लागू करने की घोषणा कर दी है।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह नया शुल्क मौजूदा आयात शुल्क के अतिरिक्त होगा और आधी रात से अमेरिकी कस्टम विभाग इसकी वसूली शुरू कर देगा।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रंप की प्रतिक्रिया
बीते 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका देते हुए उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके तहत 10% से 50% तक के अतिरिक्त टैरिफ लगाए गए थे। अदालत ने साफ कहा कि राष्ट्रपति ‘International Emergency Economic Powers Act (IEEPA)’ का इस्तेमाल इस तरह व्यापक टैरिफ लगाने के लिए नहीं कर सकते।
इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और घरेलू उद्योगों के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घोषणा की कि वे ‘Trade Act of 1974’ के सेक्शन 122 के तहत नई कार्रवाई करेंगे। इसके बाद उन्होंने 10% के नए ग्लोबल टैरिफ आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए।
क्या है सेक्शन 122 और कैसे करेगा काम?
‘ट्रेड एक्ट 1974’ का सेक्शन 122 राष्ट्रपति को विशेष परिस्थितियों में अस्थायी व्यापारिक कदम उठाने की शक्ति देता है। यदि अमेरिका का ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट’ यानी भुगतान संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित होता है, तो राष्ट्रपति बिना लंबी जांच प्रक्रिया के अधिकतम 15% तक का आयात शुल्क 150 दिनों (लगभग पांच महीने) के लिए लागू कर सकते हैं।
ट्रंप ने इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए 10% ग्लोबल टैरिफ लागू किया है। यह आदेश फिलहाल 150 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा। इसके बाद इसे जारी रखने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी।
भारत और वैश्विक बाजारों पर असर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह माना जा रहा था कि अमेरिका में अतिरिक्त टैरिफ व्यवस्था खत्म हो सकती है और भारत जैसे देशों के लिए शुल्क दरें पुराने स्तर (करीब 3-4%) पर लौट सकती हैं। लेकिन नए ‘ग्लोबल सरचार्ज’ के ऐलान से यह उम्मीद फिलहाल धुंधली पड़ गई है।
अब भारत समेत सभी देशों को मौजूदा आयात शुल्क के ऊपर अतिरिक्त 10% शुल्क देना होगा। इससे भारतीय निर्यातकों—खासतौर पर स्टील, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और आईटी हार्डवेयर क्षेत्र—पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि ट्रंप ने यह संकेत भी दिया है कि भारत जैसे ‘मित्र देशों’ के साथ अलग से बातचीत की जा सकती है।
वैश्विक बाजारों में इस फैसले के बाद अनिश्चितता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ सकता है और कई देश जवाबी शुल्क लगाने पर विचार कर सकते हैं।
व्हाइट हाउस की पूरी तैयारी
व्हाइट हाउस ने एक विस्तृत ‘फैक्ट शीट’ जारी कर स्पष्ट किया है कि नई टैरिफ व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अमेरिकी कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसियों को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं।
ट्रंप का यह कदम साफ संकेत देता है कि अदालती अड़चनों के बावजूद वे अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ व्यापार नीति से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अमेरिकी कांग्रेस और वैश्विक समुदाय इस फैसले पर क्या रुख अपनाते हैं।











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