लाल गाड़ी चली सड़क पर,
दो दोस्त बैठे हैं उस पर।
आगे वाला गाड़ी चलाए,
पीछे वाला गीत सुनाए।
हँसना-खेलना, बातें करना,
साथ सफ़र का सुख है धरना।
हँसी-खुशी की बातें होतीं,
राहें भी मुस्काती होतीं।
राह किनारे पेड़ खड़े हैं,
छाया देने को जड़े हैं।
जैसे बचपन गीत सुनाएँ,
मन में मीठी यादें लाएँ।
गाड़ी नहीं, ये यादें चलतीं,
मन की खुशियाँ संग में ढलतीं।
दोस्ती का ऐसा नाता,
अच्छा लगता, सबको भाता।
साथ चले तो राह सुहानी,
मुस्कान बने जीवन कहानी।
धीरे-धीरे जीवन गाड़ी जाए,
खुशियों का संदेश सुनाए।
— डॉ. प्रियंका सौरभ













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