August 27, 2026 5:07 am

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जालंधर में मिला 105 साल पुराना जर्मन ट्रैक्टर, 1.25 करोड़ में बिका; अब कैलिफोर्निया के म्यूजियम में होगा प्रदर्शित

जालंधर (पंजाब)। पंजाब के जालंधर में एक घर के आंगन में वर्षों से धूल-मिट्टी में पड़ा 105 साल पुराना 1921 मॉडल का जर्मन Lanz Bulldog HL-12 ट्रैक्टर अचानक चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होते ही यह ऐतिहासिक मशीन अंतरराष्ट्रीय एंटीक कलेक्टर्स की नजर में आ गई। आखिरकार एक अमेरिकी एंटीक कलेक्टर ने इसे 1.25 करोड़ रुपये में खरीद लिया।

अब यह दुर्लभ ट्रैक्टर रिस्टोरेशन के बाद अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एक संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा।

घर के आंगन में पड़ा था इतिहास
जानकारी के अनुसार, यह ट्रैक्टर जालंधर के एक परिवार के पास पीढ़ियों से था। परिवार के बुजुर्गों ने इसे दशकों पहले खरीदा था, लेकिन समय के साथ यह उपयोग से बाहर हो गया। रखरखाव न होने के कारण ट्रैक्टर जंग खाकर खराब हालत में घर के परिसर में ही पड़ा रहा।
हाल ही में किसी स्थानीय व्यक्ति ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें बताया गया कि यह 1921 का जर्मन मॉडल है। वीडियो तेजी से वायरल हुआ और विंटेज मशीनरी में रुचि रखने वाले लोगों तक पहुंच गया।
1921 का ऐतिहासिक मॉडल
Lanz Bulldog HL-12 जर्मनी में निर्मित शुरुआती डीजल ट्रैक्टरों में से एक माना जाता है। यह मॉडल अपनी मजबूत बनावट और धीमी लेकिन शक्तिशाली इंजन तकनीक के लिए प्रसिद्ध था।

विशेषज्ञों के अनुसार:
यह ट्रैक्टर सिंगल-सिलेंडर, हॉट-बुल्ब इंजन तकनीक पर आधारित था।
उस दौर में इसे कृषि क्रांति का प्रतीक माना जाता था।
भारत में इस मॉडल की मौजूदगी बेहद दुर्लभ है।

अमेरिकी कलेक्टर ने दिखाई दिलचस्पी
वीडियो देखने के बाद एक अमेरिकी एंटीक मशीनरी कलेक्टर ने परिवार से संपर्क किया। कई दौर की बातचीत और निरीक्षण के बाद 1.25 करोड़ रुपये में सौदा तय हुआ।
सूत्रों के मुताबिक, कलेक्टर ने कहा कि यह ट्रैक्टर वैश्विक स्तर पर अत्यंत दुर्लभ है और इसे संरक्षित करना जरूरी है। खरीद के बाद इसे अमेरिका भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

रिस्टोर होकर पहुंचेगा कैलिफोर्निया
ट्रैक्टर को विशेषज्ञों द्वारा पूरी तरह रिस्टोर किया जाएगा, ताकि इसकी मूल बनावट और ऐतिहासिक पहचान बरकरार रहे। इसके बाद इसे कैलिफोर्निया के एक ऑटोमोबाइल व एग्रीकल्चर हिस्ट्री म्यूजियम में प्रदर्शित किया जाएगा, जहां दुनिया भर के लोग इसे देख सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खोजें न केवल तकनीकी इतिहास को संरक्षित करती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि भारत के गांवों और शहरों में अब भी कितनी दुर्लभ विरासत छिपी हो सकती है।

सोशल मीडिया की ताकत
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सोशल मीडिया की पहुंच कितनी व्यापक है। एक साधारण वीडियो ने वर्षों से अनदेखी पड़ी ऐतिहासिक मशीन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला दी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनके शहर में पड़ा यह जंग खाया ट्रैक्टर करोड़ों की कीमत का हो सकता है।
(समाचार अपडेट जारी…)

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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