चंडीगढ़: Postgraduate Institute of Medical Education and Research (PGIMER) में इंसानियत की ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी। रूपनगर के 36 वर्षीय दविंदर सिंह के निधन के बाद उनके परिवार ने अंगदान का फैसला लिया। इस निर्णय से चार लोगों को नया जीवन मिला, जबकि दो लोगों की आंखों की रोशनी वापस आ सकेगी। इस तरह कुल 6 लोगों को नई उम्मीद मिली है।
सड़क हादसे में गई जान
पेशे से इलेक्ट्रीशियन दविंदर सिंह 21 फरवरी को सड़क हादसे का शिकार हो गए। उनकी बाइक को एक स्कूटी ने टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। पहले उन्हें रोपड़ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत नाजुक होने पर Postgraduate Institute of Medical Education and Research (PGIMER) रेफर किया गया। डॉक्टरों ने चार दिनों तक लगातार प्रयास किए, लेकिन 25 फरवरी को उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया गया।
दुख के बीच लिया बड़ा फैसला
ऐसे कठिन समय में दविंदर की पत्नी गुरप्रीत कौर और पिता अमर सिंह ने साहसिक निर्णय लेते हुए अंगदान के लिए सहमति दे दी। परिवार का कहना था कि अगर दविंदर वापस नहीं आ सकते, तो उनके अंग किसी और की जिंदगी जरूर बचा सकते हैं। भावनात्मक रूप से बेहद कठिन इस फैसले ने कई घरों में उम्मीद की किरण जलाई।
इन लोगों को मिली नई जिंदगी
परिवार की सहमति के बाद दविंदर का लीवर दिल्ली स्थित Institute of Liver and Biliary Sciences (ILBS) भेजा गया, जहां 54 वर्षीय मरीज का सफल प्रत्यारोपण किया गया। उनके फेफड़े गुरुग्राम के एक अस्पताल में 72 वर्षीय मरीज को लगाए गए। अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए फ्लाइट का इस्तेमाल किया गया।
वहीं, Postgraduate Institute of Medical Education and Research (PGIMER) में ही 29 वर्षीय युवक को किडनी और पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट किया गया, जिससे उसे डायलिसिस और इंसुलिन पर निर्भरता से राहत मिलेगी। दूसरी किडनी 37 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित की गई। इसके अलावा, उनकी आंखों की कॉर्निया से दो लोगों की रोशनी लौटेगी। डॉक्टरों ने पूरी प्रक्रिया अत्यंत सावधानी और संवेदनशीलता के साथ संपन्न की।
पिता बोले – “दूसरों की जिंदगी में जिंदा रहेगा बेटा”
दविंदर के पिता अमर सिंह ने भावुक होकर कहा, “बेटे को खोने का दुख कभी कम नहीं होगा, लेकिन यह संतोष है कि वह दूसरों की जिंदगी में जिंदा रहेगा।” पत्नी गुरप्रीत कौर ने भी माना कि फैसला आसान नहीं था, लेकिन उन्हें लगा कि यही सही कदम है।
एक परिवार के साहसिक निर्णय ने छह जिंदगियों में नई सुबह ला दी और अंगदान के महत्व को एक बार फिर समाज के सामने उजागर कर दिया।











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