May 23, 2026 6:51 pm

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अमेरिका-इजराइल हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत, 40 दिन का राजकीय शोक घोषित

तेहरान: अली खामेनेई की अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में मौत की खबर से पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। ईरानी मीडिया की प्रमुख एजेंसियों तस्नीम और फार्स ने उनके निधन की पुष्टि की है। 86 वर्षीय खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। उनकी मौत के बाद ईरान में 40 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की गई है।
इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली अधिकारियों ने दावा किया था कि तेहरान में की गई बमबारी में खामेनेई मारे गए हैं। हालांकि शुरुआती चरण में ईरानी अधिकारियों ने इन दावों को ‘साइकोलॉजिकल वॉरफेयर’ करार देते हुए खारिज कर दिया था।
फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद और नाती की भी मौत हुई है। हालांकि इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।

खामेनेई का जीवन परिचय
आयतुल्लाह अली हुसैनी खामेनेई का जन्म 1939 में ईरान के पवित्र शहर मशहद में हुआ था। उन्होंने बचपन से ही धार्मिक शिक्षा ग्रहण करनी शुरू कर दी थी। आगे चलकर उन्होंने नजफ और कोम के प्रमुख शिया धार्मिक केंद्रों में अध्ययन किया, जहां वे रूहोल्लाह खोमैनी के संपर्क में आए।
1953 में लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मुसद्दिग के तख्तापलट के बाद ईरान में असंतोष बढ़ा। इसी दौर में खामेनेई शाह शासन के खिलाफ सक्रिय हुए।

क्रांतिकारी आंदोलन से सुप्रीम लीडर तक
शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासन के विरोध में खामेनेई को कई बार गिरफ्तार किया गया। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद वे नई व्यवस्था में प्रमुख चेहरा बने।
1981 में एक हमले में वे गंभीर रूप से घायल हुए, जिसमें उनका दाहिना हाथ प्रभावित हुआ। उसी वर्ष वे ईरान के राष्ट्रपति बने और 1989 तक इस पद पर रहे।
1989 में खोमैनी के निधन के बाद खामेनेई को सुप्रीम लीडर चुना गया। ‘विलायत-ए-फकीह’ के सिद्धांत के तहत वे देश के सर्वोच्च निर्णयकर्ता बने। उनके नेतृत्व में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका क्षेत्रीय स्तर पर और मजबूत हुई।

क्षेत्रीय राजनीति पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई की मौत से ईरान में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। साथ ही, मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और गहराने की आशंका है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि ईरान का अगला सुप्रीम लीडर कौन होगा और देश की रणनीतिक दिशा क्या होगी।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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