CHANDIGARH: डडुमाजरा डंपिंग ग्राउंड: संसद में सच, फाइलों में बजट… धरातल पर बीमारी का ढेर
चंडीगढ़: “डडुमाजरा डंपिंग ग्राउंड का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर अपराध बन चुका है।” ये कड़े शब्द समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त अधीक्षक (एडवोकेट जनरल कार्यालय, हरियाणा) राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर प्रहार करते हुए कहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि “स्मार्ट सिटी” का तमगा लिए चंडीगढ़ का एक बड़ा इलाका आज जहरीली हवा, दुर्गंध और बीमारियों के बीच नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। डडुमाजरा स्थित कचरे का पहाड़ प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बन चुका है, जो आसपास के सेक्टरों के लिए ‘धीमा जहर’ साबित हो रहा है।
संसद में खुली पोल: केंद्र ने दिया फंड, जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की
राजबीर सिंह भारतीय ने बताया कि हाल ही में संसद में चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी द्वारा डंपिंग ग्राउंड के निस्तारण को लेकर पूछे गए सवाल पर केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू के बयान ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत ₹42.18 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी गई है, जिसमें ₹28.50 करोड़ केंद्र सरकार का हिस्सा है। केंद्र ने साफ कर दिया है कि कचरे का वैज्ञानिक निपटान पूरी तरह नगर निगम और चंडीगढ़ प्रशासन की जिम्मेदारी है।
भारतीय ने कहा, “अब फंड की कमी का बहाना बनाना जनता के साथ धोखा है।”
पांच बार बदली डेडलाइन, हर बार नाकामी
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने डंपिंग साइट हटाने के लिए तय समयसीमाओं को पांच बार बदला, लेकिन हर बार असफल रहा।
31 दिसंबर 2024
31 मार्च 2025
31 जुलाई 2025
30 नवंबर 2025
31 जनवरी 2026
इन सभी डेडलाइनों के बावजूद करीब 7.67 लाख मीट्रिक टन कचरा आज भी डडुमाजरा, धनास, मलोया, सेक्टर 38, 37 और 25 के निवासियों के लिए खतरा बना हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग पर ‘आपराधिक मौन’ का आरोप
राजबीर सिंह भारतीय ने स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में आज तक कोई व्यापक घर-घर मेडिकल सर्वे नहीं किया गया।
उन्होंने पूछा कि दमा, कैंसर, त्वचा रोग और अन्य सांस संबंधी बीमारियों के आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे। “यह सीधे तौर पर नागरिकों के जीने के अधिकार का उल्लंघन है,” उन्होंने कहा।
मानसून के दौरान कचरे से निकलने वाला जहरीला रिसाव (लीचेट) भूजल को भी प्रभावित कर रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
राजबीर सिंह भारतीय ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से ‘वेस्ट टू एनर्जी’ जैसी तकनीकों का उपयोग कर डंपिंग ग्राउंड के निस्तारण की प्रक्रिया तेज नहीं की, तो वे इस मामले को दोबारा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका और जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उठाएंगे।
उन्होंने कहा, “जब केंद्र सरकार ने बजट दे दिया और हाईकोर्ट के आदेश मौजूद हैं, तो प्रशासन किस बात का इंतजार कर रहा है? क्या नागरिकों की जान की कीमत पर राजनीति की जा रही है?”
प्रमुख मांगें
राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन और नगर निगम से निम्न मांगें रखीं:
स्वतंत्र मेडिकल सर्वे: प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर स्वास्थ्य सर्वे कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
पर्यावरण ऑडिट: वायु गुणवत्ता (AQI) और भूजल की स्वतंत्र लैब से जांच कराई जाए।
जवाबदेही तय हो: बार-बार डेडलाइन फेल करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
निःशुल्क उपचार: प्रदूषण से बीमार नागरिकों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाए।
‘स्मार्ट सिटी’ नहीं, सांस लेने योग्य हवा चाहिए
प्रेस वक्तव्य के अंत में उन्होंने कहा, “चंडीगढ़ को ‘स्मार्ट सिटी’ के लेबल की नहीं, बल्कि साफ हवा और सुरक्षित जीवन की जरूरत है।”
डडुमाजरा डंपिंग ग्राउंड का मुद्दा अब केवल सफाई का नहीं, बल्कि लाखों नागरिकों के स्वास्थ्य और भविष्य का प्रश्न बन चुका है।










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