June 15, 2026 2:15 pm

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3 मार्च 2026: फाल्गुन पूर्णिमा पर विशेष संयोग, आज चंद्रग्रहण भी

चंडीगढ़/शिमला, 3 मार्च 2026 (मंगलवार)। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि आज श्रद्धा और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और मां पार्वती की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। शुभ कार्यों की शुरुआत, दान-पुण्य, व्रत और आध्यात्मिक साधना के लिए यह दिन फलदायी माना जाता है।

खास बात यह है कि आज चंद्रग्रहण का भी संयोग बन रहा है, जिससे इस पूर्णिमा का महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण काल में विशेष सावधानियां बरतने और मंत्र-जप, ध्यान व दान करने की परंपरा है।

 

3 मार्च 2026 का पंचांग

विक्रम संवत: 2082

मास: फाल्गुन

पक्ष: शुक्ल पक्ष

तिथि: पूर्णिमा

दिन: मंगलवार

योग: सुकर्म

नक्षत्र: मघा

करण: बव

चंद्र राशि: सिंह

सूर्य राशि: कुंभ

सूर्योदय: सुबह 06:45 बजे

सूर्यास्त: शाम 06:21 बजे

चंद्रोदय: शाम 06:21 बजे

चंद्रास्त: नहीं

राहुकाल: 15:27 से 16:54 बजे तक

यमगंड: 11:06 से 12:33 बजे तक

 

मघा नक्षत्र में शुभ कार्यों से परहेज की सलाह

आज चंद्रमा सिंह राशि में मघा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। मघा नक्षत्र का विस्तार सिंह राशि में 0 से 13:20 डिग्री तक माना जाता है। इस नक्षत्र के देवता पितृगण और स्वामी केतु हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसे उग्र और क्रूर प्रकृति का नक्षत्र बताया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस नक्षत्र में विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा या धन उधार लेने-देने जैसे शुभ कार्यों से बचना चाहिए। हालांकि शत्रु निवारण, साहसिक निर्णय और कठिन कार्यों की योजना बनाने के लिए यह समय अनुकूल माना जाता है।

 

वर्जित समय का रखें ध्यान

आज दोपहर 3:27 बजे से 4:54 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य आरंभ करने से परहेज करना उचित माना गया है।

इसके अलावा यमगंड, गुलिक काल, दुमुहूर्त और वर्ज्यम् काल में भी शुभ कार्य न करने की सलाह दी गई है।

 

पूर्णिमा और चंद्रग्रहण का धार्मिक महत्व

फाल्गुन पूर्णिमा का दिन स्नान, दान और पूजा के लिए विशेष माना जाता है। कई स्थानों पर भक्तजन मंदिरों में विशेष आरती और हवन का आयोजन करते हैं। चंद्रग्रहण के कारण आज मंत्र-जप, ध्यान और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

धार्मिक आस्था रखने वाले लोग ग्रहण काल में भोजन से परहेज करते हैं और ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान कर पुण्य अर्जित करते हैं।

(नोट: ग्रहण और पूजा संबंधी नियमों के लिए स्थानीय पंचांग या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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