August 5, 2026 10:41 am

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डिजिटल नशा: छात्र जीवन के लिए एक बड़ी चुनौती

डॉ. विजय गर्ग

आधुनिक युग में मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया छात्र जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। ऑनलाइन शिक्षा, सूचना की आसान उपलब्धता और प्रौद्योगिकी के सुविधाजनक पहलुओं ने शिक्षा को एक नई दिशा दी है। लेकिन जब ये उपकरण अत्याधिक रूप से उपयोग किए जाने लगते हैं, तो यह ‘डिजिटल नसीब” का स्वरूप ले लेता है, जो छात्रों के लिए गंभीर चुनौती हो सकती है।

डिजिटल नशे क्या है?

डिजिटल नशा उस स्थिति को कहते हैं जब व्यक्ति मोबाइल, गेम, वीडियो प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया के बिना नहीं रह सकता। घंटों तक स्क्रीन के सामने बैठना, पढ़ाई से ध्यान भटकाना और हर समय नोटिफिकेशन का इंतजार करना इसके लक्षण हैं।

छात्र जीवन पर प्रभाव

पढ़ाई में कमी से लगातार ऑनलाइन रहने के कारण ध्यान और एकाग्रता कम हो जाती है।

स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे आंखों की थकान, नींद न आना और सिरदर्द बढ़ जाना।

मानसिक तनाव: सोशल मीडिया पर तुलना और प्रदर्शन की दौड़ के कारण चिंता और असंतोष पैदा होता है।

सामाजिक दूरी: परिवार और मित्रों के साथ प्रत्यक्ष बातचीत कम हो रही है।

कारण

ऑनलाइन कक्षाएं, गेमिंग ऐप्स, रील्स और चैटिंग प्लेटफॉर्म छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। माता-पिता की उपेक्षा और समय की सही योजना का अभाव भी इसका एक बड़ा कारण है।

समाधान

समय सीमा निर्धारित करना और डिजिटल डिटॉक्स का अभ्यास करना।

खेल, पठन और रचनात्मक गतिविधियों में रुचि बढ़ाना।

माता-पिता और शिक्षकों की निगरानी और उचित मार्गदर्शन।

प्रौद्योगिकी का उचित और उद्देश्यपूर्ण उपयोग।

उत्कृष्ट

डिजिटल उपकरण अपने आप में हानिकारक नहीं हैं; वे हमारे उपयोग पर निर्भर करते हैं। यदि छात्र समय की सराहना करते हुए प्रौद्योगिकी का सही दिशा में उपयोग करते हैं, तो यह उनकी प्रगति का साधन बन सकता है। अन्यथा डिजिटल लत उनके भविष्य के लिए एक बाधा हो सकती है।

डॉ. विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य शैक्षिक स्तंभकार मलोट पंजाब

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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