October 12, 2026 2:54 pm

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बड़ा बेटा

बड़ा बेटा

बड़ा बेटा घर की नींव होता है,

जिस पर सब खड़े रहते हैं

पर जिसे कोई देखता नहीं।

उसकी हँसी

ज़िम्मेदारियों में दब जाती है,

और बचपन

कर्ज़ की तरह

जल्दी उतार लिया जाता है।

वह देता रहता है—

वक़्त, ताक़त, सपने,

फिर भी अंत में

उसके हिस्से में

सिर्फ़ चुप्पी आती है।

छाँव देने वाला पेड़

जब सूखने लगे,

तो याद आता है—

काश हमने पूछा होता

कि धूप उसे

कितनी लगी थी।

-डॉ. सत्यवान सौरभ

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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