अमेरिका–इजराइल के संयुक्त हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में हालात बिगड़े, तेल बाजार और हवाई सेवाएं प्रभावित
तेहरान: ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य हमलों का मंगलवार को चौथा दिन है। हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं और पूरे मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद हालात और भड़क उठे हैं, जिससे पश्चिमी ताकतों और ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव तेज हो गया है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई तेज, अमेरिकी ठिकाने बने निशाना
ईरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी हमला शुरू कर दिया है। ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, इराक और सीरिया में अमेरिकी बेसों पर रॉकेट और ड्रोन हमले किए गए हैं।
साथ ही, ईरान ने इजराइल के कई प्रमुख शहरों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं, जिससे व्यापक नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि, इजराइली रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है।
रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला
तनाव के बीच रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास को भी निशाना बनाए जाने की खबर है। हमले के बाद दूतावास परिसर में आग लग गई। अभी तक हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इलाके को घेरकर जांच में जुटी हैं।
इस घटना ने खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक बाजारों में घबराहट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।
हवाई सेवाएं बाधित, कई उड़ानें रद्द
ईरान, इजराइल और आसपास के देशों के ऊपर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से बंद कर दिया गया है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों ने अपनी उड़ानें रद्द या डायवर्ट कर दी हैं।
यूरोप, एशिया और खाड़ी देशों के बीच यात्रा कर रहे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है। हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
भारत समेत कई देशों की नजर हालात पर
भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है और क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षा पर नजर रखी जा रही है।
मिडिल ईस्ट में काम करने वाले लाखों भारतीयों के परिवारों में चिंता का माहौल है।
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी यह सैन्य संघर्ष अब केवल सीमित कार्रवाई नहीं रहा, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। तेल, व्यापार, हवाई सेवाओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर साफ दिखने लगा है। आने वाले 24–48 घंटे इस संकट की दिशा तय करने में बेहद अहम माने जा रहे हैं।










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