2026-27 तक सभी मंजूरियों की उम्मीद, निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
चंडीगढ़/करनाल: हरियाणा में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने करनाल में लगभग 600 एकड़ भूमि पर आधुनिक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर राज्य सरकार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के भीतर सभी आवश्यक औपचारिक मंजूरियां मिलने की उम्मीद है।
नया हवाई अड्डा राज्य में आर्थिक, औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को गति देगा, साथ ही निवेश, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा।
राजनीतिक और क्षेत्रीय दृष्टि से अहम परियोजना
करनाल संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर करते हैं। वर्ष 2014 में वे इसी क्षेत्र से विधानसभा चुनाव जीतकर पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे। ऐसे में इस परियोजना को क्षेत्र के लिए विशेष महत्व का माना जा रहा है।
नवंबर माह में खट्टर ने दिल्ली में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू के साथ इस परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण बैठक की थी, जिसमें करनाल में हवाई सेवाओं के विस्तार पर विस्तार से चर्चा हुई।
मौजूदा एयरस्ट्रिप का विस्तार भी जारी
फिलहाल करनाल में एक नागरिक विमानन क्लब संचालित है, जो पहले 107 एकड़ में फैला था और अब इसका विस्तार कर 171 एकड़ कर दिया गया है। रनवे की लंबाई भी 3,000 फीट से बढ़ाकर 5,000 फीट की जा रही है, जिससे छोटे और मध्यम आकार के विमानों की लैंडिंग संभव हो सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनने के बाद करनाल न केवल उत्तर हरियाणा बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी एक प्रमुख हवाई केंद्र बन सकता है।
बजट में भी मिला प्रमुख स्थान
राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 2026-27 का बजट प्रस्तुत करते हुए करनाल एयरपोर्ट परियोजना का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने इसे क्षेत्रीय संतुलित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
करनाल से भाजपा विधायक जगमोहन आनंद ने इस घोषणा के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना जिले के समग्र विकास को नई दिशा देगी।
“नमो भारत” के तहत RRTS कॉरिडोर को मंजूरी
सड़क और सार्वजनिक परिवहन ढांचे को मजबूत करने के लिए बजट में बड़े प्रावधान किए गए हैं।
136 किलोमीटर लंबा दिल्ली-करनाल RRTS कॉरिडोर 33,051 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्वीकृत किया गया है।
93 किलोमीटर लंबे दिल्ली-बावल कॉरिडोर पर 32,327 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
ये दोनों कॉरिडोर “नमो भारत आरआरटीएस परियोजना” का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य प्रमुख जिलों के बीच तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
मछली प्रसंस्करण इकाई की भी घोषणा
करनाल में 50 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक मछली प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने की भी घोषणा की गई है। इससे मत्स्य पालन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई उड़ान
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट, RRTS कॉरिडोर और औद्योगिक परियोजनाओं के संयोजन से करनाल उत्तर भारत के एक उभरते हुए लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो सकता है।
सरकार की यह पहल हरियाणा को बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत बुनियादी ढांचे और संतुलित क्षेत्रीय विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का संकेत देती है।











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